मानसून की विदाई के बीच यूपी में बारिश का रौद्र रूप, 56 लोगों की मौत और दर्जनों घायल; कई जिलों में बाढ़ जैसे हालात, जानिए बंगाल की खाड़ी से लेकर पश्चिमी विक्षोभ तक कैसे बना बारिश का खतरनाक सिस्टम
लखनऊ: उत्तर प्रदेश में मानसून की विदाई के बीच मौसम ने अचानक ऐसा करवट बदला कि पूरे प्रदेश में आसमानी आफत का दौर शुरू हो गया। पिछले कई दिनों से जारी मूसलाधार बारिश, तेज हवाओं और आकाशीय बिजली ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। प्रदेश के कई जिलों में सड़कें जलमग्न हैं, गांवों में पानी घुस गया है, पेड़ और बिजली के खंभे गिरने से यातायात तथा बिजली आपूर्ति प्रभावित हुई है। इस बारिश से जुड़े हादसों में अब तक 56 लोगों की मौत और 46 लोगों के घायल होने की जानकारी सामने आई है।
कानपुर, वाराणसी, प्रयागराज, गोरखपुर, बरेली समेत कई जिलों में बारिश का असर साफ दिखाई दे रहा है। कहीं खेत पानी में डूबे हैं तो कहीं सड़कें और निचले इलाके जलभराव से जूझ रहे हैं। तेज हवाओं के कारण कई स्थानों पर पेड़ उखड़ गए और बिजली के खंभे गिर गए। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आखिर सितंबर के आखिर में, जब मानसून की विदाई का समय माना जा रहा है, उत्तर प्रदेश में इतनी भारी बारिश क्यों हो रही है?
सामान्य से कई गुना ज्यादा बारिश ने बढ़ाई चिंता
उत्तर प्रदेश में इस मौसम के दौरान सामान्य तौर पर रोजाना औसतन करीब 1.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज होती है। लेकिन रविवार सुबह तक बीते 24 घंटों में प्रदेश में करीब 45.1 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई। यह सामान्य बारिश के मुकाबले कई गुना अधिक है।
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश के 75 में से 56 जिलों में अत्यधिक या भारी बारिश दर्ज की गई। बारिश की तीव्रता और लगातार बने मौसम सिस्टम ने हालात को और गंभीर कर दिया। कई इलाकों में जलभराव के साथ नदियों का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा है, जिससे बाढ़ का खतरा पैदा हो गया है।
लेकिन यह केवल स्थानीय बारिश का मामला नहीं है। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक इसके पीछे कई मौसमी परिस्थितियों का एक साथ सक्रिय होना प्रमुख कारण है।
बंगाल की खाड़ी से उठा ‘डीप डिप्रेशन’ बना बारिश की बड़ी वजह
इस पूरे मौसम तंत्र की शुरुआत बंगाल की खाड़ी में बने डीप डिप्रेशन यानी गहरे दबाव वाले क्षेत्र से हुई। यह सिस्टम आंध्र प्रदेश और ओडिशा के तटीय क्षेत्रों को पार करते हुए आगे बढ़ा और फिर मध्य भारत की ओर पहुंचा।
मध्य प्रदेश के उत्तर-पूर्वी हिस्सों से गुजरते हुए यह सिस्टम उत्तर प्रदेश के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में दाखिल हुआ। आगे बढ़ने के दौरान इसकी प्रकृति कमजोर हुई और यह कम दबाव वाले क्षेत्र (Low Pressure Area) में बदल गया।
हालांकि, कमजोर होने के बावजूद यह सिस्टम अपने साथ बंगाल की खाड़ी से बड़ी मात्रा में नमी लेकर आया था। यही नमी उत्तर प्रदेश में लगातार बादलों के निर्माण और भारी बारिश की एक बड़ी वजह बनी।
यानी समुद्र से उठी नमी हजारों किलोमीटर का सफर तय करते हुए उत्तर भारत के मैदानी इलाकों तक पहुंची और वहां पहले से मौजूद मौसमी परिस्थितियों के साथ मिलकर बारिश का सिलसिला तेज कर दिया।
फिर पश्चिम से आया ‘वेस्टर्न डिस्टर्बेंस’ और बदल गया पूरा मौसम
बारिश के इस सिस्टम को और ताकत देने वाली दूसरी महत्वपूर्ण वजह थी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस यानी पश्चिमी विक्षोभ।
वेस्टर्न डिस्टर्बेंस ऐसे मौसम सिस्टम हैं जो पश्चिमी क्षेत्रों से आगे बढ़ते हुए उत्तर-पश्चिम भारत के मौसम को प्रभावित करते हैं। सामान्य तौर पर इनका प्रभाव सर्दियों में अधिक चर्चा में रहता है, लेकिन मौसम की विशेष परिस्थितियों में ये अन्य समय पर भी उत्तर भारत में बदलाव ला सकते हैं।
इस बार बंगाल की खाड़ी से आई नम हवाओं और पश्चिमी दिशा से आने वाले सिस्टम का प्रभाव एक-दूसरे के करीब आया। इसके कारण वातावरण में अस्थिरता बढ़ी और बादलों के विकास के लिए अनुकूल परिस्थितियां बनीं।
यही वजह है कि उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में अचानक तेज बारिश, गरज-चमक और तेज हवाओं का दौर देखने को मिला।
बारिश का ‘महा-चक्रव्यूह’ कैसे बना?
इसे आसान भाषा में समझें तो एक तरफ बंगाल की खाड़ी से नमी से भरा मौसम सिस्टम उत्तर प्रदेश की तरफ बढ़ रहा था, जबकि दूसरी तरफ पश्चिम से आने वाली मौसम प्रणाली सक्रिय थी।
जब इन दोनों प्रणालियों का प्रभाव उत्तर भारत के ऊपर मिला तो वातावरण में नमी और अस्थिरता बढ़ गई। इससे बादलों को विकसित होने और लंबे समय तक टिके रहने के लिए अनुकूल परिस्थितियां मिलीं।
यही कारण है कि कुछ क्षेत्रों में सामान्य बारिश के बजाय बहुत कम समय में भारी मात्रा में पानी बरसा। तेज हवाओं और गरज-चमक ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया।
हालांकि, हर स्थान पर हुई अत्यधिक बारिश को सीधे तौर पर ‘क्लाउडबर्स्ट’ यानी बादल फटना कहना सही नहीं होगा। क्लाउडबर्स्ट एक विशिष्ट स्थानीय मौसम घटना है, जबकि व्यापक क्षेत्र में भारी बारिश कई अलग-अलग मौसम प्रणालियों के प्रभाव से हो सकती है।
IMD ने पश्चिमी यूपी के लिए जारी किया अलर्ट
मौसम विभाग के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. अखिल श्रीवास्तव के अनुसार पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 28 सितंबर को आंधी-तूफान और आकाशीय बिजली की संभावना को देखते हुए अलर्ट जारी किया गया है। वहीं पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए इस समय कोई विशेष चेतावनी नहीं बताई गई है।
उनके अनुसार अब प्रदेश में बारिश की तीव्रता धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। मध्य उत्तर प्रदेश के उत्तरी हिस्सों के ऊपर बना Well-Marked Low Pressure Area पश्चिमी यूपी के कुछ हिस्सों में अत्यधिक भारी बारिश और पूर्वी यूपी में भारी बारिश की वजह बना।
इसका मतलब यह है कि बारिश का सबसे तीव्र दौर धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है, लेकिन कुछ इलाकों में मौसम पूरी तरह सामान्य होने में समय लग सकता है।
घाघरा और राप्ती समेत कई नदियों पर बढ़ा दबाव
लगातार बारिश का सीधा असर उत्तर प्रदेश की नदियों पर भी पड़ा है। घाघरा और राप्ती समेत कई नदियों का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ का खतरा बढ़ गया है।
नदियों के किनारे रहने वाले लोगों के लिए स्थिति अधिक संवेदनशील हो जाती है, क्योंकि लगातार बारिश के अलावा ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों से आने वाला पानी भी नदी के जलस्तर को प्रभावित कर सकता है।
प्रशासन की ओर से संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ाई जा रही है और लोगों से स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करने की अपील की जा रही है।
किसानों के लिए भी बड़ी चुनौती बनी बारिश
इस समय हुई भारी बारिश ने किसानों की चिंता भी बढ़ा दी है। खेतों में लंबे समय तक पानी जमा रहने से धान, मक्का, गन्ना और दलहन जैसी फसलों को नुकसान हो सकता है।
कृषि विशेषज्ञ किसानों को खेतों से जल निकासी की व्यवस्था करने की सलाह दे रहे हैं। जिन खेतों में पानी जमा है, वहां संभव हो तो निकासी की व्यवस्था करना जरूरी है, ताकि फसल की जड़ों में लंबे समय तक पानी न ठहरे।
बारिश के बाद खेतों में नमी अधिक होने के कारण किसानों को कृषि कार्य मौसम की स्थिति देखकर ही करने की सलाह दी जा रही है।
आकाशीय बिजली और तेज हवाओं से सावधानी जरूरी
भारी बारिश के साथ सबसे बड़ा खतरा आकाशीय बिजली और तेज हवाओं का भी है। ऐसे मौसम में खुले मैदान, खेत या ऊंचे स्थान पर खड़े रहना जोखिम भरा हो सकता है।
विशेष रूप से अकेले खड़े पेड़ के नीचे शरण लेने से बचने की सलाह दी जाती है। आंधी के दौरान बिजली के खंभों, तारों और कमजोर संरचनाओं से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है।
बारिश के दौरान यदि संभव हो तो लोग सुरक्षित भवन के अंदर रहें और मौसम विभाग तथा स्थानीय प्रशासन की ओर से जारी चेतावनियों पर नजर रखें।
अब क्या होगा? धीरे-धीरे कमजोर पड़ सकता है बारिश का दौर
मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर प्रदेश में बारिश की तीव्रता अब धीरे-धीरे कम होने की संभावना है। हालांकि, मौसम पूरी तरह साफ होने में समय लग सकता है और कुछ इलाकों में स्थानीय स्तर पर बारिश का दौर जारी रह सकता है।
दरअसल, बंगाल की खाड़ी से आने वाली नमी, कम दबाव वाले क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ जैसी प्रणालियों के प्रभाव ने सितंबर के अंतिम दिनों में उत्तर प्रदेश के मौसम को पूरी तरह बदल दिया।
यही वजह है कि मानसून की विदाई के समय प्रदेश को अचानक भारी बारिश का सामना करना पड़ा। ‘डीप डिप्रेशन’ से आई नमी और पश्चिमी विक्षोभ के प्रभाव ने मिलकर ऐसा मौसम सिस्टम बनाया, जिसने उत्तर प्रदेश के कई हिस्सों में सामान्य से कई गुना अधिक बारिश करा दी।
फिलहाल सबसे जरूरी है कि लोग मौसम विभाग की चेतावनियों को गंभीरता से लें, नदी और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूरी बनाए रखें तथा आकाशीय बिजली और तेज हवाओं के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें। बारिश की तीव्रता भले ही कम होने लगे, लेकिन पहले से जमा पानी और बढ़े हुए नदी जलस्तर के कारण अगले कुछ समय तक प्रशासन और आम लोगों को सतर्क रहने की जरूरत बनी रह सकती है।
