नई दिल्ली/लखनऊ। देश की पहली रीजनल रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) परियोजना दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर की सफलता के बाद अब उत्तर प्रदेश में हाई-स्पीड सार्वजनिक परिवहन के विस्तार की दिशा में बड़ा कदम उठाया जा रहा है। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र परिवहन निगम (NCRTC) पश्चिमी उत्तर प्रदेश के कई महत्वपूर्ण शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों को जोड़ने के लिए नए नमो भारत कॉरिडोर पर काम कर रहा है। यदि इन प्रस्तावित परियोजनाओं को अंतिम मंजूरी मिल जाती है तो गाजियाबाद, जेवर एयरपोर्ट, खुर्जा, बुलंदशहर, बागपत, बड़ौत, हापुड़, पिलखुवा, खेकड़ा और शामली जैसे शहरों की कनेक्टिविटी पूरी तरह बदल जाएगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह केवल परिवहन परियोजना नहीं होगी, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था, उद्योग, शिक्षा, पर्यटन और रोजगार के लिए एक नया विकास मॉडल साबित हो सकती है।
दिल्ली-मेरठ कॉरिडोर की सफलता के बाद विस्तार की तैयारी
82 किलोमीटर लंबे दिल्ली-गाजियाबाद-मेरठ नमो भारत कॉरिडोर ने यात्रियों को तेज, सुरक्षित और आधुनिक यात्रा का अनुभव दिया है। पहले जहां दिल्ली से मेरठ पहुंचने में लगभग दो घंटे तक का समय लग जाता था, वहीं अब यह दूरी करीब 50 से 55 मिनट में पूरी हो रही है।
इसी सफलता को देखते हुए NCRTC अब दूसरे चरण में कई नए कॉरिडोर विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है। इन नए रूटों से लाखों लोगों को प्रतिदिन तेज और सुविधाजनक यात्रा का लाभ मिलेगा।
गाजियाबाद से जेवर एयरपोर्ट तक हाई-स्पीड कनेक्टिविटी
प्रस्तावित परियोजनाओं में सबसे महत्वपूर्ण गाजियाबाद-जेवर एयरपोर्ट नमो भारत कॉरिडोर माना जा रहा है।
करीब 72 किलोमीटर लंबा यह कॉरिडोर गाजियाबाद RRTS स्टेशन से शुरू होकर ग्रेटर नोएडा के परी चौक होते हुए नोएडा इंटरनेशनल एयरपोर्ट (जेवर) तक पहुंचेगा।
इस रूट की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार कर संबंधित अधिकारियों को सौंप दी गई है। इसके बनने से दिल्ली, मेरठ और गाजियाबाद से आने वाले यात्रियों को सीधे जेवर एयरपोर्ट तक तेज और सुगम यात्रा की सुविधा मिलेगी। भविष्य में यह कॉरिडोर अंतरराष्ट्रीय यात्रियों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
दिल्ली-शाहदरा-बागपत-बड़ौत-शामली कॉरिडोर से मिलेगा बड़ा फायदा
दूसरा प्रस्तावित कॉरिडोर दिल्ली के शाहदरा क्षेत्र से शुरू होकर लोनी, खेकड़ा, बागपत, बड़ौत और आगे शामली तक जाने की योजना में शामिल है।
करीब 55 से 60 किलोमीटर लंबे इस रूट से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हजारों छात्रों, किसानों, व्यापारियों और नौकरीपेशा लोगों को प्रतिदिन बड़ी राहत मिलेगी।
वर्तमान में दिल्ली-सहारनपुर हाईवे पर भारी ट्रैफिक जाम के कारण यात्रा में दो घंटे या उससे अधिक समय लग जाता है। नमो भारत सेवा शुरू होने के बाद यही सफर मात्र 30 से 40 मिनट में पूरा किया जा सकेगा।
बागपत और बड़ौत क्षेत्र चीनी उद्योग, कृषि उत्पादन और शिक्षा संस्थानों के लिए प्रसिद्ध हैं। बेहतर परिवहन सुविधा मिलने से स्थानीय व्यापार और निवेश में भी तेजी आने की संभावना है।
खुर्जा और बुलंदशहर को मिलेगा नया औद्योगिक जीवन
प्रस्तावित गाजियाबाद-बुलंदशहर-खुर्जा नमो भारत कॉरिडोर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
करीब 65 से 70 किलोमीटर लंबे इस रूट में गाजियाबाद, लालकुआं, दादरी, सिकंदराबाद, बुलंदशहर और खुर्जा को जोड़ा जा सकता है।
खुर्जा अपनी विश्व प्रसिद्ध सिरेमिक और पॉटरी इंडस्ट्री के लिए जाना जाता है, जबकि दादरी और सिकंदराबाद बड़े औद्योगिक पार्क और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में तेजी से विकसित हो रहे हैं।
यह कॉरिडोर ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (EDFC) और दिल्ली-हावड़ा रेलवे लाइन के निकट होने के कारण उद्योगों के लिए परिवहन लागत कम करेगा और नए निवेश को आकर्षित करेगा।
हापुड़ और पिलखुवा भी होंगे हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़े
तीसरा प्रस्तावित गाजियाबाद-पिलखुवा-हापुड़ नमो भारत कॉरिडोर लगभग 30 से 35 किलोमीटर लंबा होगा।
यह कॉरिडोर गाजियाबाद RRTS स्टेशन से डासना, पिलखुवा और हापुड़ को जोड़ेगा।
पिलखुवा अपने हैंडलूम और वस्त्र उद्योग के लिए देशभर में प्रसिद्ध है, जबकि हापुड़ तेजी से विकसित हो रहा व्यावसायिक केंद्र है। यह रूट NH-9 पर बढ़ते ट्रैफिक दबाव को कम करने में भी मदद करेगा।
हजारों छात्र, व्यापारी और नौकरीपेशा लोग रोजाना गाजियाबाद और दिल्ली की यात्रा करते हैं। नमो भारत सेवा शुरू होने के बाद उनका सफर तेज, सुरक्षित और सुविधाजनक हो जाएगा।
गाजियाबाद बनेगा सबसे बड़ा इंटरचेंज हब
नई योजनाओं के लागू होने के बाद गाजियाबाद RRTS स्टेशन पूरे नेटवर्क का सबसे बड़ा इंटरचेंज केंद्र बन सकता है।
यात्री यहां से दिल्ली, मेरठ, जेवर एयरपोर्ट, हापुड़, खुर्जा, बागपत, बड़ौत और अन्य प्रस्तावित नमो भारत रूटों पर आसानी से यात्रा कर सकेंगे।
भविष्य में यह स्टेशन दिल्ली-अलवर और दिल्ली-पानीपत-करनाल जैसे अन्य प्रस्तावित RRTS कॉरिडोर से भी जुड़ सकता है, जिससे राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की कनेक्टिविटी और मजबूत होगी।
हरिद्वार और ऋषिकेश तक भी पहुंच सकती है नमो भारत
नमो भारत परियोजना का विस्तार केवल उत्तर प्रदेश तक सीमित नहीं रहेगा। प्रस्ताव है कि मेरठ के मोदीपुरम से आगे यह कॉरिडोर मुजफ्फरनगर, रुड़की, हरिद्वार और ऋषिकेश तक बढ़ाया जाए।
यदि यह योजना साकार होती है तो दिल्ली और पश्चिमी उत्तर प्रदेश से आने वाले श्रद्धालु, पर्यटक और स्थानीय नागरिक बेहद कम समय में हरिद्वार और ऋषिकेश पहुंच सकेंगे।
इससे उत्तराखंड के धार्मिक पर्यटन, होटल उद्योग और स्थानीय व्यापार को भी बड़ा लाभ मिलने की संभावना है।
रियल एस्टेट और उद्योगों को मिलेगा नया प्रोत्साहन
विशेषज्ञों का मानना है कि नमो भारत कॉरिडोर केवल यात्रा का माध्यम नहीं बल्कि आर्थिक विकास का इंजन भी साबित होगा।
जहां-जहां स्टेशन बनेंगे, वहां रियल एस्टेट परियोजनाओं, लॉजिस्टिक्स पार्क, वेयरहाउस, औद्योगिक इकाइयों, शैक्षणिक संस्थानों और व्यावसायिक केंद्रों का तेजी से विकास होगा।
बेहतर कनेक्टिविटी मिलने से निवेशकों का भरोसा बढ़ेगा और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की बदल सकती है तस्वीर
यदि प्रस्तावित सभी नमो भारत कॉरिडोर को मंजूरी मिलती है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश के परिवहन ढांचे में ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा। दिल्ली, मेरठ, गाजियाबाद, जेवर एयरपोर्ट, बुलंदशहर, खुर्जा, बागपत, बड़ौत, शामली, हापुड़ और पिलखुवा जैसे शहर एक आधुनिक हाई-स्पीड नेटवर्क से जुड़ जाएंगे।
इससे लाखों यात्रियों का समय बचेगा, सड़क यातायात पर दबाव कम होगा, प्रदूषण में कमी आएगी और उद्योग, व्यापार, शिक्षा तथा पर्यटन को नई गति मिलेगी। यही कारण है कि नमो भारत का प्रस्तावित विस्तार केवल एक परिवहन परियोजना नहीं, बल्कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश के समग्र आर्थिक और सामाजिक विकास की दिशा में एक ऐतिहासिक पहल माना जा रहा है।
