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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड में नशे के खिलाफ बड़े एक्शन की तैयारी: मुख्य सचिव ने मांगा एक साल का एक्शन प्लान, सप्लाई चेन तोड़ने पर जोर

The Hill India News
Last updated: April 29, 2026 3:06 pm
The Hill India News
Published: April 29, 2026
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देहरादून। देवभूमि उत्तराखंड को नशे के जाल से मुक्त करने की दिशा में राज्य सरकार ने अब अपनी रणनीति को और अधिक आक्रामक और परिणामोन्मुखी बना दिया है। बुधवार को सचिवालय में आयोजित ‘राज्य स्तरीय नेशनल कोआर्डिनेशन सेंटर फॉर ड्रग लॉ एनफोर्समेंट’ (NCORD) की 11वीं बैठक में मुख्य सचिव आनन्द बर्द्धन ने स्पष्ट किया कि नशे के खिलाफ लड़ाई अब केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रहेगी। उन्होंने पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को सख्त हिदायत देते हुए अगले 15 दिनों के भीतर ‘नशा मुक्त उत्तराखंड’ के लिए एक साल का व्यापक रोडमैप प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

Contents
15 दिन का अल्टीमेटम: तैयार होगा एक साल का विजनसप्लाई चेन पर प्रहार और विधिक सख्तीस्कूली बच्चों की सुरक्षा: 100 मीटर के दायरे में सख्तीडी-एडिक्शन सेंटर्स की होगी ‘सर्जरी’मानस-1933: एक कॉल पर मिलेगी मददबैठक में मौजूद रहे उच्चाधिकारी

15 दिन का अल्टीमेटम: तैयार होगा एक साल का विजन

मुख्य सचिव ने बैठक के दौरान जनपदों की स्थिति की समीक्षा की और जिलाधिकारियों (DM) व पुलिस अधीक्षकों (SP) को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में एनफोर्समेंट (प्रवर्तन) और रिहेबिलिटेशन (पुनर्वास) को लेकर ठोस योजना बनाएं। उन्होंने कहा कि अगले 15 दिनों में सचिव गृह को राज्य और जनपद स्तरीय रोडमैप उपलब्ध कराया जाए, जिसमें स्पष्ट हो कि अगले एक वर्ष में नशीले पदार्थों की तस्करी को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे। उत्तराखंड ड्रग फ्री देवभूमि अभियान 2026 की सफलता के लिए यह रोडमैप एक आधारशिला के रूप में कार्य करेगा।


सप्लाई चेन पर प्रहार और विधिक सख्ती

नशे के अवैध कारोबार को जड़ से खत्म करने के लिए मुख्य सचिव ने पुलिस विभाग को ‘सप्लाई चेन’ पर प्रहार करने की बात कही। उन्होंने कहा कि केवल ड्रग पेडलर्स को पकड़ना काफी नहीं है, बल्कि उन स्रोतों तक पहुंचना जरूरी है जहां से ये मादक पदार्थ राज्य में प्रवेश कर रहे हैं।

विधिक कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

  • शीघ्र निस्तारण: मादक पदार्थों से जुड़े अदालती मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए प्रभावी पैरवी की जाएगी।

  • कमर्शियल क्वांटिटी पर फोकस: व्यवसायिक मात्रा में पकड़े गए ड्रग्स के मामलों में दोषियों को सख्त सजा दिलाने के लिए लगातार ‘फॉलोअप’ सुनिश्चित किया जाएगा।

  • ड्रग इंस्पेक्टरों की नियुक्ति: गढ़वाल और कुमाऊं मंडल के लिए समर्पित ‘ड्रग इंस्पेक्टर’ नियुक्त किए जाएंगे, जो विशेष रूप से दवाओं के दुरुपयोग और अवैध बिक्री पर नजर रखेंगे।


स्कूली बच्चों की सुरक्षा: 100 मीटर के दायरे में सख्ती

नशे की गिरफ्त में आ रही युवा पीढ़ी को बचाने के लिए मुख्य सचिव ने ‘अवेयरनेस और प्रिवेंशन’ मॉडल पर जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिए कि प्रदेश के सभी शिक्षण संस्थानों में ‘एंटी ड्रग क्लब’ का गठन अनिवार्य रूप से किया जाए। इसके साथ ही, सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम (COTPA) के तहत स्कूलों के 100 मीटर के दायरे में गुटखा, तंबाकू और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध को प्रभावी ढंग से लागू करने को कहा।

मुख्य सचिव ने इस बात पर भी जोर दिया कि पूरे प्रदेश में मादक पदार्थों के उपयोग के पैटर्न को समझने के लिए एक विस्तृत सर्वे कराया जाए। इस सर्वे के आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की रणनीति तैयार की जाएगी ताकि उत्तराखंड ड्रग फ्री देवभूमि अभियान 2026 को लक्षित (Targeted) सफलता मिल सके।


डी-एडिक्शन सेंटर्स की होगी ‘सर्जरी’

प्रदेश में संचालित निजी नशामुक्ति केंद्रों (Private De-addiction Centers) की कार्यप्रणाली पर भी मुख्य सचिव ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने आदेश दिए कि जो केंद्र मानकों को पूरा नहीं कर रहे हैं या जहां मरीजों के साथ अमानवीय व्यवहार की शिकायतें मिल रही हैं, उन्हें तत्काल बंद कराया जाए।

इसके विकल्प के रूप में, सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के निर्देश दिए गए हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि शुरुआत में प्रत्येक जनपद के कम से कम एक सरकारी अस्पताल में कुछ बेड ‘डी-एडिक्शन’ (नशामुक्ति) के लिए समर्पित (Dedicate) किए जाएं, ताकि गरीब और जरूरतमंद लोगों को सरकारी देखरेख में उचित उपचार मिल सके।


मानस-1933: एक कॉल पर मिलेगी मदद

नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) द्वारा जारी राष्ट्रीय हेल्पलाइन नंबर ‘मानस-1933’ (मादक पदार्थ निषेध आसूचना केंद्र) को जन-जन तक पहुंचाने के लिए मुख्य सचिव ने व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश दिए। उन्होंने सभी सरकारी कार्यालयों के सूचना पट्टों और मुख्य द्वारों पर इस हेल्पलाइन की जानकारी चस्पा करने को कहा।

“आम जनता को यह पता होना चाहिए कि वे नशीले पदार्थों की बिक्री या आपूर्ति की जानकारी बिना किसी डर के कहां साझा कर सकते हैं। मानस-1933 इस लड़ाई में एक सशक्त हथियार साबित होगा।” – आनन्द बर्द्धन, मुख्य सचिव

बैठक में मौजूद रहे उच्चाधिकारी

इस महत्वपूर्ण बैठक में डीजी इंटेलिजेंस अभिनव कुमार, सचिव शैलेष बगौली, आईजी डॉ. नीलेश आनन्द भारणे, अपर सचिव गृह निवेदिता कुकरेती और एसएसपी एसटीएफ अजय सिंह सहित सभी जनपदों के जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से उपस्थित रहे।

राज्य स्तरीय NCORD की इस 11वीं बैठक ने यह स्पष्ट कर दिया है कि उत्तराखंड सरकार अब नशे के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति पर काम कर रही है। प्रवर्तन, जागरूकता और सुधार (Enforcement, Awareness, and Reform) के त्रिकोणीय मॉडल के माध्यम से राज्य को 2026 तक नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य रखा गया है। अब दारोमदार जनपदों के अधिकारियों पर है कि वे मुख्य सचिव द्वारा मांगे गए रोडमैप को कितनी सटीकता से जमीन पर उतारते हैं।

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