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उत्तराखंड हाईकोर्ट का कड़ा रुख: नैनीताल जिला पंचायत टेंडर में धांधली और हरिद्वार में अवैध कब्जों पर जवाब तलब

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने प्रदेश की प्रशासनिक कार्यप्रणाली और टेंडर प्रक्रियाओं में हो रही कथित अनियमितताओं पर सख्त टिप्पणी करते हुए कई महत्वपूर्ण आदेश जारी किए हैं। मुख्य न्यायाधीश मनोज कुमार गुप्ता और न्यायमूर्ति सुभाष उपाध्याय की खंडपीठ ने जिला पंचायत नैनीताल में टेंडर धांधली, नगर पालिका की लेक ब्रिज चुंगी विवाद और हरिद्वार में सड़क की भूमि पर हुए बड़े पैमाने पर अतिक्रमण के मामलों की एक साथ सुनवाई की। अदालत ने स्पष्ट किया कि नियमों की अनदेखी और अदालती आदेशों की सुस्ती को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

जिला पंचायत नैनीताल: शर्तों के उल्लंघन पर टेंडर प्रक्रिया संदेह के घेरे में

हाईकोर्ट ने जिला पंचायत नैनीताल द्वारा ‘द्वाराम बाजार’ (हाट बाजार) के लिए आमंत्रित की गई निविदाओं में हुई अनियमितताओं के खिलाफ दायर याचिका पर गंभीर संज्ञान लिया है। हल्द्वानी के चोरगलिया निवासी पंकज बजेठा ने याचिका में आरोप लगाया कि लाखामंडी क्षेत्र में बाजार लगाने के लिए जिला पंचायत ने नौ कड़ी शर्तें रखी थीं।

याचिकाकर्ता का तर्क है कि उन्होंने सभी शर्तों को पूरा किया था, लेकिन प्रशासन ने जानबूझकर उन निविदाकर्ताओं को टेंडर आवंटित कर दिया जिन्होंने अनिवार्य शर्तें पूरी ही नहीं की थीं। खंडपीठ ने इस मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट की सुनवाई के दौरान जिला पंचायत को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है। अदालत ने इस मामले की अगली सुनवाई के लिए 1 जून की तिथि निर्धारित की है।

नैनीताल लेक ब्रिज विवाद: कोर्ट के आदेश पर प्रशासन की ‘सुस्ती’ से नाराजगी

नैनीताल नगर पालिका और स्थानीय टैक्सी यूनियन के बीच चल रहे ‘लेक ब्रिज चुंगी पास’ विवाद पर भी कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। प्रोफेसर अजय रावत और टैक्सी यूनियन की याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए खंडपीठ ने राज्य सरकार और नगर पालिका से तीखे सवाल पूछे।

अदालत ने याद दिलाया कि 12 सितंबर 2023 को ही एसएसपी, जिलाधिकारी और यूनियन अध्यक्ष की एक कमेटी बनाकर सुझाव पेश करने का आदेश दिया गया था। लेकिन महीनों बीत जाने के बाद भी न तो कमेटी गठित हुई और न ही अनुपालन रिपोर्ट पेश की गई। कोर्ट ने प्रशासन को अंतिम अवसर के रूप में दो सप्ताह का समय दिया है।

हरिद्वार में अतिक्रमण: सड़क की भूमि पर बनीं 200 दुकानें रडार पर

एक अन्य महत्वपूर्ण मामले में, हरिद्वार के अवधूत मंडल आश्रम द्वारा गुरुकुल कांगड़ी के पास सड़क की भूमि पर अतिक्रमण कर करीब 200 दुकानें बनाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर सुनवाई हुई। याचिका में आरोप लगाया गया है कि सार्वजनिक भूमि पर कब्जा कर न केवल दुकानें बनाई गईं, बल्कि उन्हें व्यवसायिक रूप से किराए पर भी दिया गया है।

याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि हरिद्वार विकास प्राधिकरण (HDA) ने पिछले आदेशों के बावजूद अभी तक अपना जवाब दाखिल नहीं किया है। इस पर नाराजगी जताते हुए खंडपीठ ने एचडीए सहित अन्य प्रतिपक्षियों को तीन सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब पेश करने का अंतिम निर्देश दिया है।

न्यायिक सक्रियता और शासन की जवाबदेही

हाईकोर्ट के ये हालिया आदेश राज्य में सुशासन और पारदर्शिता की दिशा में महत्वपूर्ण माने जा रहे हैं। चाहे वह निविदाओं में पारदर्शिता का मामला हो या सार्वजनिक भूमि से अतिक्रमण हटाने का, न्यायालय की सक्रियता ने शासन और प्रशासन के अधिकारियों को कटघरे में खड़ा कर दिया है। जानकारों का मानना है कि 1 जून और उसके बाद होने वाली सुनवाइयों में प्रशासन को ठोस कार्रवाई की रिपोर्ट पेश करनी होगी, अन्यथा संबंधित अधिकारियों पर सख्त गाज गिर सकती है।

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