
देहरादून: उत्तराखंड में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा की गुणवत्ता को सुदृढ़ करने की दिशा में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। सचिवालय में आयोजित मंत्रिमंडल की महत्वपूर्ण बैठक में चिकित्सा एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग से जुड़े कई बड़े प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। कैबिनेट के इन फैसलों का मुख्य केंद्र बिंदु भर्ती प्रक्रियाओं का सरलीकरण, चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का विस्तार और लंबे समय से लंबित कर्मचारियों की मांगों का निस्तारण रहा।
भर्ती प्रक्रिया में ‘रेड टेप’ खत्म: अब सचिव स्तर पर होगा संविदा चयन
राज्य के राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों (प्रोफेसरों) की भारी कमी को देखते हुए कैबिनेट ने चयन प्रक्रिया में ऐतिहासिक संशोधन किया है। अब तक राजकीय मेडिकल कॉलेजों में संविदा पर 3 साल के लिए रखे जाने वाले प्रोफेसरों और फैकल्टी सदस्यों के चयन के लिए विभागीय मंत्री और मुख्यमंत्री का अनुमोदन अनिवार्य होता था। इस लंबी प्रक्रिया के कारण नियुक्तियों में महीनों का विलंब होता था और पद खाली रह जाते थे।
धामी कैबिनेट ने इस जटिलता को समाप्त करते हुए अब चयन का अधिकार सचिव स्तर पर ही केंद्रित कर दिया है। स्वास्थ्य मंत्री सुबोध उनियाल ने बैठक के बाद जानकारी दी कि अब ‘वॉक-इन-इंटरव्यू’ के बाद फाइल को सीधे सचिव स्तर से निस्तारित किया जा सकेगा, जिससे कॉलेजों को जल्द से जल्द विशेषज्ञ शिक्षक मिल सकेंगे।
चिकित्सा शिक्षा निदेशालय का विस्तार: पदों में भारी वृद्धि
प्रदेश में बढ़ते मेडिकल कॉलेजों और उनके प्रभावी प्रबंधन के लिए चिकित्सा शिक्षा निदेशालय के ढांचे को पुनर्गठित करने का निर्णय लिया गया है। वर्तमान में निदेशालय का ढांचा केवल 29 पदों पर आधारित था, जिसे बढ़ाकर अब 40 कर दिया गया है।
कैबिनेट ने 11 नए पदों के सृजन पर मुहर लगाई है, जिनमें:
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वित्त नियंत्रक (1 पद)
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कनिष्ठ अभियंता (1 पद)
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प्रशासनिक अधिकारी (1 पद)
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लेखाकार और सहायक (विभिन्न पद)
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4 मल्टी पर्पज वर्कर और वाहन चालक
यह पुनर्गठन निदेशालय की प्रशासनिक और वित्तीय क्षमता को बढ़ाने में मील का पत्थर साबित होगा।
श्रीनगर मेडिकल कॉलेज के 277 कर्मियों को ‘समान कार्य-समान वेतन’
कैबिनेट ने श्रीनगर राजकीय मेडिकल कॉलेज में वर्ष 2009 से कार्यरत संविदा, दैनिक वेतन भोगी और प्रबंधन समिति के माध्यम से काम कर रहे 277 कर्मियों को बड़ी राहत दी है। मुख्यमंत्री ने इन कर्मियों को ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’ प्रदान करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। यह निर्णय उन कर्मचारियों के लिए बड़ी जीत है जो पिछले डेढ़ दशक से एक ही पद पर अल्प वेतन में सेवा दे रहे थे।
IPHS मानकों के अनुरूप लैब टैक्नीशियन संवर्ग का पुनर्गठन
स्वास्थ्य विभाग की रीढ़ मानी जाने वाली लैब सेवाओं को वैश्विक मानकों (IPHS) के अनुरूप ढालने के लिए लैब टैक्नीशियन संवर्ग के ढांचे को भी पुनर्गठित किया गया है। मंत्रिमंडल ने कुल 345 पदों के पुनर्गठन को मंजूरी दी है, जिसमें:
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मेडिकल लैब टैक्नोलॉजिस्ट: 266 पद
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टैक्निकल ऑफिसर: 54 पद
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चीफ टैक्निकल ऑफिसर: 25 पद
इस कदम से प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में पैथोलॉजी और लैब सेवाओं की गुणवत्ता में व्यापक सुधार होने की उम्मीद है।
स्वास्थ्य क्षेत्र में सुशासन की नई मिसाल
धामी सरकार के ये निर्णय स्पष्ट करते हैं कि राज्य सरकार स्वास्थ्य सेवाओं को ‘प्रक्रियाओं के जाल’ से निकालकर ‘परिणामों की धरातल’ पर लाना चाहती है। भर्ती प्रक्रियाओं का विकेंद्रीकरण और कर्मचारियों के हितों का संरक्षण न केवल स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाएगा, बल्कि युवाओं के लिए रोजगार के सुगम अवसर भी प्रदान करेगा।



