उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड विधानसभा विशेष सत्र: “आकाओं को खुश करने की नौटंकी”, कांग्रेस का धामी सरकार पर तीखा हमला, खर्चे पर उठाए सवाल

देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम’ को लेकर बुलाई गई विधानसभा की एक दिवसीय विशेष बैठक अब सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच युद्ध का मैदान बन गई है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी सरकार ने जहां इसे राज्य की मातृशक्ति के सम्मान में एक ऐतिहासिक कदम बताया है, वहीं कांग्रेस ने इसे जनता की गाढ़ी कमाई की बर्बादी करार देते हुए सरकार की नीयत पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता आलोक शर्मा ने इस सत्र को ‘औचित्यहीन’ बताते हुए धामी सरकार पर तीखा हमला बोला है।

“जनता के 12 करोड़ की बर्बादी”: आलोक शर्मा का वार

देहरादून पहुंचे कांग्रेस के दिग्गज नेता आलोक शर्मा ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए सरकार की कार्यप्रणाली को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड विधानसभा विशेष सत्र के नाम पर धामी सरकार केवल एक राजनीतिक इवेंट कर रही है। शर्मा ने आरोप लगाया कि एक दिन के इस ‘चुनावी भाषण’ वाले सत्र पर लगभग 10 से 12 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर इस फिजूलखर्ची का जिम्मेदार कौन है?

आलोक शर्मा ने सीधे तौर पर कहा कि यह सत्र राज्य की महिलाओं के कल्याण के लिए नहीं, बल्कि केंद्र में बैठे अपने राजनीतिक ‘आकाओं’ को खुश करने के लिए बुलाया गया है। उनके अनुसार, जिस तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद के पटल का उपयोग राजनीति के लिए किया, उसी राह पर चलते हुए धामी सरकार भी संवैधानिक संस्थाओं का राजनीतिकरण कर रही है।

आरक्षण के पेच और ’73वें-74वें संशोधन’ की याद

कांग्रेस प्रवक्ता ने तकनीकी पहलुओं पर सरकार को घेरते हुए कहा कि जब तक 73वें और 74वें संशोधन जैसे संवैधानिक मुद्दों पर स्थिति संसद और विधानसभाओं में स्पष्ट नहीं होगी, तब तक आरक्षण की राह में अड़चनें आती रहेंगी। उन्होंने भाजपा के महिला प्रेम को ‘दिखावटी’ बताते हुए कहा कि कांग्रेस हमेशा से महिलाओं को निर्णय लेने वाली संस्थाओं में अधिक से अधिक सीटें देने की पक्षधर रही है।

आलोक शर्मा ने कहा, “भाजपा सत्ता में है, यदि वह वास्तव में महिलाओं को सशक्त बनाना चाहती है तो पहल करे, कांग्रेस उससे चार कदम आगे बढ़कर समर्थन देगी। लेकिन केवल सत्र बुलाकर सुर्खियां बटोरना समाधान नहीं है।”

अंकिता भंडारी केस: “जब तक न्याय नहीं, तब तक सशक्तिकरण की बात बेमानी”

कांग्रेस ने उत्तराखंड के चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को एक बार फिर सरकार के खिलाफ ढाल बनाया है। आलोक शर्मा ने दोटूक शब्दों में कहा कि धामी सरकार को महिला सशक्तिकरण पर बोलने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा, “जिस दिन सरकार अंकिता भंडारी को संपूर्ण न्याय दिला देगी और दोषियों को उनके अंजाम तक पहुंचा देगी, उसी दिन से हम मानेंगे कि सरकार महिलाओं के प्रति गंभीर है। उससे पहले सशक्तिकरण की बातें केवल खोखले नारे हैं।”

रामायण, रथ और विचारधारा की लड़ाई

अपने संबोधन में आलोक शर्मा ने एक दिलचस्प कटाक्ष भी किया। उन्होंने कहा कि धामी सरकार को पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न राजीव गांधी के निर्देशों पर बनी ‘रामायण’ जरूर देखनी चाहिए। उन्होंने भाजपा की तुलना रावण के रथ से करते हुए कहा, “रामायण में रावण रथ पर चलता था, और भाजपा ने भी देश भर में रथ यात्राएं निकाली हैं। वे रथ पर चलने वाले लोग हैं, जबकि हम (कांग्रेस) जमीन पर चलने वाले और संघर्ष करने वाले लोग हैं।”

सियासी गलियारों में चर्चा: विशेष सत्र या चुनावी बिसात?

उत्तराखंड विधानसभा विशेष सत्र को लेकर छिड़ी यह जंग संकेत दे रही है कि आने वाले चुनावों में महिला आरक्षण और सुरक्षा सबसे बड़े मुद्दे रहने वाले हैं। एक ओर भाजपा इसे अपनी ‘डबल इंजन’ सरकार की उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है, वहीं कांग्रेस इसे ‘इवेंट मैनेजमेंट’ बताकर जनता के बीच ले जा रही है।

जानकारों का मानना है कि एक दिन के सत्र में भले ही अधिनियम पर मुहर लग जाए, लेकिन इसके खर्च और औचित्य पर उठे सवाल सरकार के लिए गले की हड्डी बन सकते हैं। आलोक शर्मा के इन तीखे हमलों ने यह स्पष्ट कर दिया है कि विपक्ष अब सरकार को किसी भी मोर्चे पर ‘वॉकओवर’ देने के मूड में नहीं है।

देवभूमि की राजनीति में अब ‘नारी शक्ति’ केंद्र बिंदु बन गई है। लेकिन सवाल वही है—क्या यह विशेष सत्र वास्तव में उत्तराखंड की महिलाओं की स्थिति में बदलाव लाएगा या यह केवल करोड़ों रुपए के खर्च के साथ एक और राजनीतिक अध्याय बनकर रह जाएगा? कांग्रेस के आरोपों ने फिलहाल धामी सरकार को रक्षात्मक रुख अपनाने पर मजबूर कर दिया है।

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button