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Reading: विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच TMC बनाम चुनाव आयोग: प्रतिनिधिमंडल को बुलाया, पर ‘10 सांसदों’ की मांग पर विवाद तेज
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विशेष मतदाता सूची पुनरीक्षण के बीच TMC बनाम चुनाव आयोग: प्रतिनिधिमंडल को बुलाया, पर ‘10 सांसदों’ की मांग पर विवाद तेज

The Hill India News
Last updated: November 25, 2025 1:54 pm
The Hill India News
Published: November 25, 2025
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नई दिल्ली | 25 नवंबर 2025: पश्चिम बंगाल सहित देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रहे विशेष गहन मतदाता सूची पुनरीक्षण (Special Intensive Revision–SIR) के बीच चुनाव आयोग (ECI) और तृणमूल कांग्रेस (TMC) के बीच तनातनी एक बार फिर खुलकर सामने आ गई है।

Contents
TMC की शिकायत: SIR प्रक्रिया में ‘गंभीर अनियमितताओं’ का आरोपECI की प्रतिक्रिया: “पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए समय तय”अभिषेक बनर्जी का सीधा हमला: “यदि पारदर्शी हो तो डर क्यों?”मुद्दा क्या है? SIR प्रक्रिया पर सभी की निगाहेंपिछले चुनावों की घटनाओं का हवालाECI का पक्ष: ‘प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी’राजनीतिक तापमान बढ़ा, सियासी तकरार तेजशुक्रवार की बैठक अब अत्यंत महत्वपूर्णआगे क्या?

निर्वाचन आयोग ने शुक्रवार को तृणमूल कांग्रेस के पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को मिलने का समय दिया है, लेकिन पार्टी का कहना है कि उसने 10 सांसदों के प्रतिनिधिमंडल के लिए अनुमति मांगी थी।

इस मुद्दे पर TMC और आयोग के बीच जुबानी संघर्ष तेज हो गया है। TMC के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने चुनाव आयोग पर सवाल उठाते हुए कहा कि यदि आयोग पारदर्शी है, तो वह “सिर्फ 10 सांसदों का सामना करने से क्यों डरता है?”


TMC की शिकायत: SIR प्रक्रिया में ‘गंभीर अनियमितताओं’ का आरोप

तृणमूल कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची पुनरीक्षण प्रक्रिया में कई अनियमितताएं हो रही हैं।
पार्टी का कहना है कि—

  • ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम बिना सूचना हटाए जा रहे हैं
  • कई इलाकों में नए मतदाताओं को शामिल करने में बाधाएँ
  • घर–घर सत्यापन में निष्पक्षता पर सवाल
  • विपक्षी दलों के दबाव में स्थानीय अधिकारी कार्रवाई कर रहे हैं

इन्हीं मुद्दों पर चर्चा के लिए TMC ने बड़े प्रतिनिधिमंडल के साथ आयोग से मिलने का अनुरोध किया था।


ECI की प्रतिक्रिया: “पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल के लिए समय तय”

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार चुनाव आयोग ने अपने मानक प्रोटोकॉल के तहत 5 सदस्यों को ही बुलाने का निर्णय लिया है।
ECI का मानना है कि—

  • बड़े प्रतिनिधिमंडल से बैठक का स्वरूप “राजनीतिक प्रदर्शन” जैसा हो सकता है
  • आयोग बातचीत को “औपचारिक और तकनीकी” दायरे में ही रखना चाहता है
  • पहले भी अधिकतम 3–5 सदस्यों के प्रतिनिधिमंडल ही मुलाकात करते आए हैं

हालांकि आयोग की ओर से आधिकारिक बयान में बस इतना कहा गया है कि तृणमूल कांग्रेस को शुक्रवार के लिए समय दे दिया गया है।


अभिषेक बनर्जी का सीधा हमला: “यदि पारदर्शी हो तो डर क्यों?”

चुनाव आयोग के निर्णय पर नाराजगी जताते हुए अभिषेक बनर्जी ने ‘X’ पर लिखा—

“हमने 10 सांसदों का प्रतिनिधिमंडल भेजने का अनुरोध किया था। यदि चुनाव आयोग पारदर्शी है और उसके निर्णय निष्पक्ष हैं, तो वह 10 सांसदों का सामना करने से क्यों डर रहा है? आखिर हमें रोका क्यों जा रहा है?”

उन्होंने आयोग को “राजनीतिक दबाव में काम करने” का भी परोक्ष आरोप लगाया और कहा कि चुनाव आयोग जैसी संवैधानिक संस्था को किसी भी प्रतिनिधिमंडल से मिलने में हिचकिचाना नहीं चाहिए।


मुद्दा क्या है? SIR प्रक्रिया पर सभी की निगाहें

लोकसभा चुनाव 2026 से पहले देशभर में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण चल रहा है।
12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में यह प्रक्रिया अधिक संवेदनशील मानी जा रही है—

  • पश्चिम बंगाल
  • उत्तर प्रदेश
  • असम
  • झारखंड
  • जम्मू–कश्मीर
  • छत्तीसगढ़
    आदि।

SIR के तहत—

  1. घरों का भौतिक सत्यापन
  2. लापता मतदाताओं की पहचान
  3. नए 18+ मतदाताओं का पंजीकरण
  4. दोहराव वाले नाम हटाना

जैसी प्रक्रियाएं की जाती हैं।

पश्चिम बंगाल में इस प्रक्रिया पर हमेशा से राजनीतिक आरोप–प्रत्यारोप रहे हैं और TMC–BJP के बीच अक्सर विवाद भी उठते रहे हैं।


पिछले चुनावों की घटनाओं का हवाला

विशेषज्ञ बताते हैं कि 2021 से लेकर 2024 तक पश्चिम बंगाल में कई चुनावों के दौरान मतदाता सूची में गंभीर गड़बड़ियों की शिकायतें आई थीं।
तृणमूल कांग्रेस अक्सर दावा करती रही है कि—

  • “फर्जी मतदान रोकने के नाम पर असल मतदाताओं के नाम हटाए गए”
  • “कई क्षेत्रों में विपक्ष समर्थकों के नाम बढ़ा–चढ़ाकर जोड़े गए”

इन दावों की पुष्टि किसी स्वतंत्र जांच में अब तक नहीं हो सकी, लेकिन राजनीतिक रूप से यह विवाद हमेशा जीवित रहा।


ECI का पक्ष: ‘प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी’

चुनाव आयोग ने हाल ही में जारी बयान में कहा था कि SIR प्रक्रिया में—

  • BLOs का डिजिटल ट्रैकिंग
  • घर–घर सत्यापन का लाइव GIS लॉग
  • सभी राज्यों में निगरानी समितियाँ
  • जिला चुनाव अधिकारियों की ऑनलाइन रिपोर्टिंग

जैसे तकनीकी कदम पारदर्शिता सुनिश्चित कर रहे हैं।

आयोग ने यह भी कहा कि किसी भी दल को शिकायत हो तो वह निर्धारित प्रतिनिधिमंडल के जरिए मिल सकता है।


राजनीतिक तापमान बढ़ा, सियासी तकरार तेज

इस पूरे विवाद ने बंगाल की राजनीति में नया तनाव पैदा कर दिया है।
तृणमूल कांग्रेस और भाजपा दोनों चुनाव आयोग के फैसलों पर खुलकर बयान देते आए हैं।
अब TMC का “10 सांसदों को रोकने” का आरोप राजनीतिक रूप से बड़ा मुद्दा बन सकता है।

राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि—

“2026 के लोकसभा चुनाव से पहले दोनों दल चुनाव आयोग से जुड़े मुद्दों को अपने-अपने राजनीतिक नैरेटिव गढ़ने के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं। यह विवाद आने वाले समय में और बढ़ सकता है।”


शुक्रवार की बैठक अब अत्यंत महत्वपूर्ण

राजनीतिक हलकों में यह बैठक बेहद अहम मानी जा रही है।
इस बैठक में प्रतिनिधिमंडल आयोग के सामने—

  • मतदाता सूची से नाम हटाने की शिकायतें
  • SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता
  • BLOs की नियुक्ति
  • स्थानीय अधिकारियों के रवैये
  • डिजिटल सत्यापन में खामियों
    जैसे मुद्दे उठा सकता है।

सूत्रों का कहना है कि TMC इस बैठक को लेकर आक्रामक रणनीति अपना सकती है।


आगे क्या?

इस विवाद के बाद संभावना है कि—

  • आयोग TMC की कुछ शिकायतों पर विशेष जांच करा सकता है
  • बंगाल के जिलों में SIR की निगरानी और कड़ी हो सकती है
  • राजनीतिक रूप से यह मुद्दा संसद के आगामी सत्र में भी उठ सकता है

फिलहाल पूरा ध्यान शुक्रवार को होने वाली बैठक पर है जहाँ यह देखा जाएगा कि आयोग और TMC के बीच चर्चा से कोई ठोस समाधान निकलता है या विवाद और तीखा होता है।

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