
नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली की सियासत में आज एक बड़ा उलटफेर देखने को मिला। दिल्ली नगर निगम (MCD) के मेयर चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए सत्ता की चाबी अपने नाम कर ली है। बीजेपी के वरिष्ठ पार्षद प्रवेश वाही दिल्ली के नए महापौर (Mayor) चुने गए हैं। उन्होंने कांग्रेस के उम्मीदवार जहीर को एकतरफा मुकाबले में करारी शिकस्त दी। इस चुनाव की सबसे बड़ी विशेषता आम आदमी पार्टी (AAP) का सदन से बहिष्कार रहा, जिसने पूरी चुनावी प्रक्रिया को बीजेपी बनाम कांग्रेस के सिमटे हुए मुकाबले में तब्दील कर दिया।
वोटों का गणित: प्रवेश वाही की ऐतिहासिक जीत
बुधवार को हुए मतदान में कुल 165 मतदाताओं (सांसदों, विधायकों और पार्षदों) ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। चुनाव अधिकारियों के अनुसार, डाले गए सभी वोट वैध पाए गए। मतों की गिनती शुरू होते ही फासला साफ नजर आने लगा था। बीजेपी प्रत्याशी प्रवेश वाही को कुल 156 वोट मिले, जबकि कांग्रेस के जहीर के खाते में महज 9 वोट ही आ सके।
प्रवेश वाही ने 147 वोटों के विशाल अंतर से जीत दर्ज कर सदन में बीजेपी की मजबूती का लोहा मनवाया है। इस भारी जीत के साथ ही बीजेपी के खेमे में जश्न का माहौल है, वहीं कांग्रेस के लिए यह नतीजे आत्ममंथन का विषय बन गए हैं।
डिप्टी मेयर पद पर मोनिका पंत निर्विरोध निर्वाचित
मेयर चुनाव के बाद डिप्टी मेयर पद के लिए मतदान की औपचारिकता की आवश्यकता नहीं पड़ी। भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रत्याशी मोनिका पंत को इस पद पर निर्विरोध चुन लिया गया। विपक्ष की ओर से किसी अन्य मजबूत दावेदारी की कमी और आम आदमी पार्टी के बहिष्कार के चलते मोनिका पंत की राह आसान हो गई। बीजेपी की इस दोहरी जीत ने दिल्ली नगर निगम के प्रशासनिक ढांचे पर पार्टी की पकड़ को और मजबूत कर दिया है।
AAP का बहिष्कार और ‘स्थायी समिति’ की रणनीति
इस चुनाव का सबसे चर्चित पहलू आम आदमी पार्टी (AAP) का रुख रहा। दिल्ली की सत्ता पर काबिज ‘आप’ ने मेयर और डिप्टी मेयर दोनों ही चुनावों का पूर्ण बहिष्कार किया। मतदान के दौरान पार्टी का कोई भी पार्षद, सांसद या विधायक सदन में नजर नहीं आया।
हालांकि, राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह ‘आप’ की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पार्टी ने मेयर चुनाव से दूरी बनाई, लेकिन स्थायी समिति (Standing Committee) के चुनाव में हिस्सा लेने का फैसला किया है। दरअसल, स्थायी समिति की तीन सीटों के लिए कुल तीन ही नामांकन हुए हैं, जिनमें बीजेपी के दो और ‘आप’ का एक पार्षद शामिल है। ऐसे में ‘आप’ का एक सदस्य बिना किसी विरोध के समिति में पहुंच जाएगा। इसी वजह से अरविंद केजरीवाल की पार्टी ने पूरी तरह से सदन का त्याग करने के बजाय केवल मेयर पद की वोटिंग से किनारा किया।
MCD मेयर चुनाव का पेचीदा समीकरण
दिल्ली नगर निगम के चुनाव का गणित काफी रोचक है। सदन में कुल 273 वोट होते हैं, जिनमें 249 निर्वाचित पार्षद, 7 लोकसभा सांसद, 3 राज्यसभा सदस्य और दिल्ली विधानसभा द्वारा मनोनीत 14 विधायक शामिल होते हैं। बहुमत का जादुई आंकड़ा 137 है।
बीजेपी की बढ़त के पीछे के मुख्य कारण:
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दलों का समर्थन: बीजेपी के पास अपने 123 पार्षद, 7 सांसद और 11 विधायकों का समर्थन था।
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स्वाति मालीवाल फैक्टर: हाल ही में राज्यसभा सांसद स्वाति मालीवाल के बीजेपी में शामिल होने के बाद पार्टी का आंकड़ा 142 तक पहुंच गया, जो बहुमत की रेखा से ऊपर है।
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विपक्ष का बिखराव: आम आदमी पार्टी (100 पार्षद) के बहिष्कार और कांग्रेस (9 पार्षद) की सीमित संख्या ने बीजेपी की राह में आ रही सभी बाधाओं को समाप्त कर दिया।
कौन हैं दिल्ली के नए मेयर प्रवेश वाही?
प्रवेश वाही दिल्ली की राजनीति का एक अनुभवी चेहरा हैं। वर्तमान में रोहिणी बी वार्ड से पार्षद वाही की छवि एक जमीनी नेता की रही है। उनके पास निगम के कामकाज का व्यापक अनुभव है:
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वे पूर्वी उत्तरी दिल्ली नगर निगम में तीन बार जोन चेयरमैन रह चुके हैं।
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उन्होंने स्थायी समिति के अध्यक्ष पद जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी भी संभाली है।
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प्रशासनिक पकड़ और पार्षदों के बीच लोकप्रियता के कारण ही पार्टी ने उन पर भरोसा जताया।
चुनौतियां और आगामी राह
नवनियुक्त मेयर प्रवेश वाही के सामने दिल्ली की सफाई व्यवस्था, कूड़े के पहाड़ों का निस्तारण और निगम के वित्तीय संकट को दूर करने जैसी बड़ी चुनौतियां होंगी। मेयर के रूप में अपने संबोधन में वाही ने कहा कि उनकी प्राथमिकता दिल्ली को ‘स्वच्छ और सुंदर’ बनाना और विकास कार्यों को बिना किसी भेदभाव के हर वार्ड तक पहुंचाना है।
दिल्ली मेयर चुनाव 2026 परिणाम ने स्पष्ट कर दिया है कि नगर निगम में फिलहाल बीजेपी का पलड़ा भारी है। ‘आप’ के बहिष्कार ने भले ही चुनाव को फीका करने की कोशिश की हो, लेकिन 156 वोटों का भारी समर्थन प्रवेश वाही के लिए एक बड़ी नैतिक जीत है। अब देखना यह होगा कि स्थायी समिति में ‘आप’ के प्रवेश के बाद सदन की कार्यवाही कितनी सुचारू रूप से चल पाती है।



