कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ता का सिंहासन किसके पास जाएगा, इसका फैसला करने के लिए सूबे में सियासी बिसात बिछ चुकी है। दूसरे चरण के मतदान के लिए शनिवार शाम 5 बजे पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार का शोर पूरी तरह थम गया। अब बारी मतदाताओं की है, जो 29 अप्रैल को अपने मताधिकार का प्रयोग कर उम्मीदवारों की किस्मत का फैसला ईवीएम (EVM) में कैद करेंगे। प्रचार के अंतिम दिन सभी राजनीतिक दलों ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी, जिससे बंगाल का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया।
प्रचार के आखिरी दिन दिग्गजों ने झोंकी ताकत
शनिवार शाम को लाउडस्पीकरों के शांत होने से पहले राज्य के विभिन्न कोनों में रैलियों और रोड शो का तांता लगा रहा। तृणमूल कांग्रेस (TMC) की ओर से मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने अपनी सत्ता को बरकरार रखने के लिए ‘माटी, मानुष और चिनि’ के नारे को बुलंद किया। वहीं, भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने परिवर्तन की लहर पैदा करने के लिए अपने राष्ट्रीय स्तर के दिग्गजों की फौज मैदान में उतार दी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद मोर्चा संभालते हुए कई बड़ी जनसभाओं को संबोधित किया। उनके अलावा केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ जैसे कद्दावर नेताओं ने धुआंधार प्रचार कर भाजपा के पक्ष में माहौल बनाने की कोशिश की। कांग्रेस और लेफ्ट गठबंधन ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के लिए छोटी जनसभाओं और जनसंपर्क अभियानों पर जोर दिया।
कांटे की टक्कर: साख की लड़ाई बनी बंगाल की जंग
पश्चिम बंगाल में इस बार मुकाबला मुख्य रूप से दो ध्रुवों के बीच सिमटा नजर आ रहा है।
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TMC की चुनौती: ममता बनर्जी के लिए यह चुनाव अपनी उपलब्धियों को भुनाने और तीसरी बार सत्ता में मजबूती से वापसी करने की चुनौती है। टीएमसी लगातार राज्य की अस्मिता और विकास योजनाओं को अपना ढाल बना रही है।
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BJP का लक्ष्य: दूसरी तरफ, भाजपा के लिए बंगाल इस समय सबसे बड़ा लक्ष्य है। पार्टी ‘सोनार बांग्ला’ के संकल्प के साथ मैदान में है और भ्रष्टाचार व कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर सत्ताधारी दल को घेर रही है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि दूसरे चरण की सीटों पर जीत का अंतर काफी कम रहने वाला है, जिससे मुकाबला बेहद रोचक और संघर्षपूर्ण हो गया है।
पहले चरण का उत्साह: 91.78% मतदान ने चौंकाया
भारतीय चुनाव आयोग (ECI) के आंकड़ों ने सभी को हैरान कर दिया है। विधानसभा चुनाव के पहले चरण में पश्चिम बंगाल ने लोकतंत्र के प्रति अपनी भारी प्रतिबद्धता दिखाई। आयोग के अनुसार, पहले चरण में रिकॉर्ड 91.78 प्रतिशत मतदान हुआ। यह आंकड़ा पिछले चुनावों के मुकाबले कहीं अधिक है और यह दर्शाता है कि बंगाल की जनता बदलाव या निरंतरता के मुद्दे पर कितनी मुखर है। उच्च मतदान प्रतिशत ने राजनीतिक दलों की धड़कनें बढ़ा दी हैं, क्योंकि अक्सर इसे सत्ता विरोधी लहर या फिर भारी जनसमर्थन के तौर पर देखा जाता है।
सुरक्षा के कड़े इंतजाम और आयोग की मुस्तैदी
29 अप्रैल को होने वाले दूसरे चरण के मतदान के लिए चुनाव आयोग ने सुरक्षा के अभूतपूर्व इंतजाम किए हैं। संवेदनशील बूथों पर केंद्रीय अर्धसैनिक बलों की तैनाती की गई है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी प्रकार की हिंसा या धांधली को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। ड्रोन और सीसीटीवी के जरिए मतदान केंद्रों की निगरानी की जाएगी ताकि मतदाता बिना किसी भय के अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
महत्वपूर्ण तारीखें और परिणाम का इंतजार
पश्चिम बंगाल की इस महाजंग का निर्णय अब ज्यादा दूर नहीं है।
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दूसरा चरण मतदान: 29 अप्रैल 2026
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मतगणना और परिणाम: 4 मई 2026
पश्चिम बंगाल चुनाव प्रचार के थमने के बाद अब अगले 48 घंटे ‘साइलेंस पीरियड’ के होंगे, जिसमें केवल घर-घर जाकर जनसंपर्क करने की अनुमति होगी। राज्य की जनता के मन में क्या है, इसका खुलासा 4 मई को होगा जब वोटों की गिनती शुरू होगी।
सत्ता का संग्राम अंतिम पड़ाव पर
बंगाल की राजनीति हमेशा से अपनी आक्रामकता और वैचारिक गहराई के लिए जानी जाती रही है। इस बार का चुनाव न केवल राज्य की दिशा तय करेगा, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति पर भी इसका गहरा प्रभाव पड़ेगा। क्या ममता बनर्जी अपना गढ़ बचाने में सफल होंगी या फिर भाजपा का ‘मिशन बंगाल’ फतह होगा? इन सवालों के जवाब अब केवल 29 अप्रैल के मतदान और 4 मई के परिणामों में छिपे हैं।


