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उत्तराखंड में ‘महक क्रांति’ को नई उड़ान: दालचीनी की खेती और नवाचार पर अंतरराष्ट्रीय मंथन आज से, 91 हजार किसानों को मिलेगा लाभ

The Hill India News
Last updated: June 10, 2026 10:08 am
The Hill India News
Published: June 10, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड में सुगंधित खेती को नई दिशा देने और किसानों की आय बढ़ाने के उद्देश्य से राज्य सरकार लगातार प्रयासरत है। इसी कड़ी में सेलाकुई, देहरादून स्थित परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान (पूर्व नाम सगन्ध पौधा केन्द्र) में 11 और 12 जून 2026 को दालचीनी (सिनेमन) विषयक दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार एवं कार्यशाला का आयोजन किया जा रहा है। “दालचीनीः प्रवर्धन, सतत खेती एवं कटाई उपरांत प्रौद्योगिकियों में नवाचार” विषय पर आयोजित होने वाला यह सेमिनार उत्तराखंड को दालचीनी उत्पादन के राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

बुधवार को सचिवालय स्थित मीडिया सेंटर में आयोजित प्रेस वार्ता के दौरान कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने इस आयोजन की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को देश के सबसे अधिक कार्यकाल वाले निर्वाचित प्रधानमंत्री बनने पर बधाई और शुभकामनाएं भी दीं।

कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने बताया कि सेलाकुई स्थित सगन्ध पौधा केन्द्र का नाम बदलकर अब परफ्यूमरी एवं सगन्ध अनुसंधान एवं विकास संस्थान कर दिया गया है। यह संस्थान सुगंधित पौधों की खेती, अनुसंधान, प्रशिक्षण, प्रसंस्करण, गुणवत्ता परीक्षण और व्यवसायीकरण के क्षेत्र में अग्रणी भूमिका निभा रहा है। पिछले दो दशकों में संस्थान ने शोध और तकनीकी सहयोग के माध्यम से राज्य में सुगंधित खेती का व्यापक विस्तार किया है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में उत्तराखंड में लगभग 10 हजार हेक्टेयर भूमि पर सगंधित फसलों की खेती की जा रही है। इसके अंतर्गत 109 एरोमा क्लस्टरों में करीब 29 हजार किसान जुड़े हुए हैं। किसानों को बेहतर उत्पादन और प्रसंस्करण सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए राज्यभर में 200 से अधिक फील्ड डिस्टिलेशन यूनिट भी स्थापित की गई हैं। इसका परिणाम यह रहा कि वर्ष 2003 में जहां एरोमैटिक सेक्टर का कारोबार मात्र दो करोड़ रुपये था, वहीं वर्ष 2025 तक यह बढ़कर 100 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच गया है।

मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार ने सुगंधित खेती के क्षेत्र में संभावनाओं को देखते हुए “उत्तराखंड महक क्रांति नीति 2026-36” लागू की है। इस महत्वाकांक्षी नीति के तहत आगामी वर्षों में 23 हजार हेक्टेयर भूमि को सगंधित खेती के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे लगभग 91 हजार किसानों को प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा। साथ ही राज्य में सात एरोमा वैलियों का विकास भी किया जाएगा, जिससे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।

उन्होंने बताया कि महक क्रांति नीति के अंतर्गत चम्पावत और नैनीताल जिलों में लगभग 5,200 हेक्टेयर क्षेत्रफल में “सिनेमन वैली” विकसित की जा रही है। यह परियोजना दालचीनी उत्पादन को बढ़ावा देने के साथ-साथ किसानों, उद्यमियों और उद्योगों के लिए नए अवसरों के द्वार खोलेगी। दालचीनी की बढ़ती राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय मांग को देखते हुए यह पहल उत्तराखंड के कृषि क्षेत्र के लिए मील का पत्थर साबित हो सकती है।

दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सेमिनार का मुख्य उद्देश्य दालचीनी की व्यावसायिक खेती को प्रोत्साहित करना, किसानों को आधुनिक तकनीकों और वैश्विक अनुभवों से जोड़ना तथा अनुसंधान संस्थानों, उद्योगों और किसानों के बीच समन्वय स्थापित करना है। इसके साथ ही गुणवत्ता आधारित उत्पादन, मूल्य संवर्धन, खाद्य सुरक्षा, अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों और निर्यात संबंधी आवश्यकताओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा।

सेमिनार में दालचीनी आधारित उद्यमिता और निवेश के अवसरों पर भी चर्चा होगी। विशेषज्ञ किसानों को कटाई के बाद की आधुनिक तकनीकों, प्रसंस्करण, पैकेजिंग और विपणन से जुड़ी जानकारियां देंगे, जिससे वे अपने उत्पादों का बेहतर मूल्य प्राप्त कर सकें।

इस अंतरराष्ट्रीय आयोजन में श्रीलंका के नेशनल सिनेमन रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर के विशेषज्ञ, प्योर सिनेमन एक्सपोर्ट्स के निदेशक तथा इंडोनेशिया के रिसर्च सेंटर फॉर एस्टेट क्रॉप्स के विशेषज्ञ विशेष रूप से भाग ले रहे हैं। इनके अलावा देश के विभिन्न प्रतिष्ठित संस्थानों के वैज्ञानिक और विशेषज्ञ भी अपने अनुभव साझा करेंगे। सेमिनार में 40 से अधिक प्रतिनिधियों, 50 दालचीनी उत्पादक किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों की भागीदारी सुनिश्चित की गई है।

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की जलवायु और भौगोलिक परिस्थितियां दालचीनी की खेती के लिए बेहद अनुकूल हैं। ऐसे में यदि वैज्ञानिक तकनीकों और आधुनिक प्रबंधन को अपनाया जाए तो राज्य देश का प्रमुख दालचीनी उत्पादक क्षेत्र बन सकता है। इससे किसानों की आय में वृद्धि होने के साथ-साथ कृषि आधारित उद्योगों को भी नई गति मिलेगी।

प्रेस वार्ता के दौरान सगन्ध पौधा केन्द्र (कैप) सेलाकुई के निदेशक डॉ. नृपेन्द्र चौहान भी उपस्थित रहे। उन्होंने कहा कि यह सेमिनार न केवल किसानों और शोधकर्ताओं के लिए लाभदायक होगा, बल्कि उत्तराखंड को वैश्विक स्तर पर दालचीनी उत्पादन और सुगंधित खेती के प्रमुख केंद्र के रूप में पहचान दिलाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

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