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उत्तराखंडफीचर्ड

उत्तराखंड के चारधाम मॉनिटरिंग मॉडल से प्रभावित हुआ हिमाचल, आपदा प्रबंधन में बनेगी साझा रणनीति

The Hill India News
Last updated: April 30, 2026 2:35 pm
The Hill India News
Published: April 30, 2026
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देहरादून, उत्तराखंड: प्राकृतिक आपदाओं के प्रति संवेदनशील पर्वतीय राज्यों के बीच अब आपसी सहयोग और तकनीकी साझाकरण का एक नया अध्याय शुरू हो गया है। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (USDMA) द्वारा विकसित चारधाम यात्रा मॉनिटरिंग मॉडल और तकनीक-आधारित व्यवस्था से प्रभावित होकर अब हिमाचल प्रदेश भी इसे अपने राज्य में लागू करने की तैयारी कर रहा है। दोनों राज्यों के बीच आपदा प्रबंधन की रणनीतियों को साझा करने और अंतरराज्यीय समन्वय को मजबूत करने की दिशा में गुरुवार का दिन बेहद महत्वपूर्ण रहा।

Contents
हिमाचल के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री का दौराचारधाम यात्रा मॉनिटरिंग सिस्टम की सफलतातकनीकी नवाचार: ‘भूदेव’ एप और त्वरित प्रतिक्रियाविशिष्ट अतिथियों की उपस्थितिअंतरराज्यीय समन्वय की दिशा में मील का पत्थर

हिमाचल के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री का दौरा

हिमाचल प्रदेश के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री जगत सिंह नेगी ने गुरुवार को देहरादून स्थित यूएसडीएमए का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने उत्तराखंड सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और विकसित की गई तकनीकी प्रणालियों की विस्तृत जानकारी प्राप्त की।

मुलाकात के दौरान मंत्री ने कहा कि उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की भौगोलिक परिस्थितियां लगभग एक समान हैं। दोनों ही राज्य भूस्खलन, अतिवृष्टि और अन्य प्राकृतिक आपदाओं के दृष्टिकोण से बेहद संवेदनशील हैं। ऐसे में दोनों राज्यों के बीच समन्वित रणनीति का होना एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। इस पहल से न केवल आपदाओं के समय त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित होगी, बल्कि जान-माल के नुकसान को भी काफी हद तक कम किया जा सकेगा।


चारधाम यात्रा मॉनिटरिंग सिस्टम की सफलता

यूएसडीएमए के अधिकारियों ने मंत्री को राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र (SEOC) की कार्यप्रणाली से अवगत कराया। उन्हें केदारनाथ यात्रा की लाइव मॉनिटरिंग, रियल-टाइम अलर्ट सिस्टम, भीड़ प्रबंधन, मौसम व मार्गों की सतत निगरानी की व्यवस्था दिखाई गई।

जगत सिंह नेगी ने यूएसडीएमए के इस तकनीक-आधारित मॉडल की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की तर्ज पर हिमाचल प्रदेश में भी इस प्रणाली को लागू किया जाएगा। हिमाचल में होने वाली प्रमुख यात्राओं जैसे कि मणिमहेश, किन्नर कैलाश और श्रीखंड महादेव के दौरान इसी तरह की तकनीक का उपयोग करके श्रद्धालुओं की सुरक्षा और आवागमन को सुगम बनाया जा सकेगा।


तकनीकी नवाचार: ‘भूदेव’ एप और त्वरित प्रतिक्रिया

बैठक में आपदा प्रबंधन एवं पुनर्वास के सचिव विनोद कुमार सुमन ने यूएसडीएमए की विभिन्न गतिविधियों और नवाचारों पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि प्राधिकरण तकनीकी नवाचारों के जरिए आपदा प्रबंधन के तंत्र को लगातार सुदृढ़ कर रहा है।

इस दौरान मंत्री ने तहसील स्तर पर गठित की जा रही क्विक रिस्पांस टीम (QRT) की सराहना की। उन्होंने कहा कि ये टीमें आपदा के प्रारंभिक चरण में त्वरित राहत और बचाव कार्य शुरू करने में अत्यंत महत्वपूर्ण साबित होंगी। इसके साथ ही, यूएसडीएमए द्वारा विकसित ‘भूदेव’ एप और मानक संचालन प्रक्रियाओं (SOP) को भी काफी सराहा गया। मंत्री ने घोषणा की कि सीमावर्ती क्षेत्रों में ‘भूदेव’ एप का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाएगा, ताकि आपदा संबंधी सूचनाओं का आदान-प्रदान बिना किसी देरी के हो सके।


विशिष्ट अतिथियों की उपस्थिति

इस महत्वपूर्ण बैठक और अवलोकन के दौरान कई प्रमुख अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे:

  • आनंद स्वरूप (परियोजना निदेशक, यूप्रिपेयर)

  • महावीर सिंह चैहान (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, प्रशासन)

  • राजकुमार नेगी (अपर मुख्य कार्यकारी अधिकारी, डीआईजी)

  • निशांत ठाकुर (अपर सचिव, हिमाचल प्रदेश)

  • मो0 ओबैदुल्लाह अंसारी (संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी)

  • डाॅ. शांतनु सरकार (निदेशक, यूएलएमएमसी)


अंतरराज्यीय समन्वय की दिशा में मील का पत्थर

आपदा प्रबंधन के क्षेत्र में उत्तराखंड का यह मॉडल देश के अन्य पर्वतीय राज्यों के लिए एक नजीर बन गया है। जिस तरह से यूएसडीएमए ने तकनीक और मानव संसाधन का बेहतरीन तालमेल बिठाकर चारधाम यात्रा का सफल प्रबंधन किया है, वह अपने आप में एक मिसाल है। हिमाचल प्रदेश का इस मॉडल को अपनाने का निर्णय दर्शाता है कि भविष्य में हिमालयी राज्यों की सुरक्षा के लिए साझा तकनीकी प्लेटफॉर्म का उपयोग किया जाएगा।

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