रुड़की (हरिद्वार): उत्तराखंड के हरिद्वार जनपद से एक ऐसा हृदयविदारक मामला सामने आया है, जिसने सुरक्षा और सतर्कता को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मंगलौर कोतवाली क्षेत्र के घोसीपुरा गांव में रविवार की दोपहर उस समय चीख-पुकार मच गई, जब बच्चों के खेल-खेल में हुई एक चूक ने 8 साल की मासूम आयशा की जिंदगी छीन ली। घर के बाहर खड़े ट्रैक्टर को खेल के दौरान बच्चों ने अनजाने में स्टार्ट कर दिया, जिसकी चपेट में आने से आयशा गंभीर रूप से घायल हो गई और बाद में इलाज के दौरान उसने दम तोड़ दिया।
खेल का मैदान बना मातम का मंजर
रविवार (26 अप्रैल) की दोपहर घोसीपुरा गांव में आम दिनों की तरह ही बच्चे घर के बाहर खेल रहे थे। घर के आंगन या बाहर के अहाते में एक ट्रैक्टर खड़ा था। अमूमन ग्रामीण क्षेत्रों में यह सामान्य बात है, लेकिन सबसे बड़ी लापरवाही यह रही कि ट्रैक्टर में चाबी लगी हुई थी। जानकारी के अनुसार, खेलते-खेलते कुछ बच्चे ट्रैक्टर पर चढ़ गए। बचपन की जिज्ञासा और अनजानेपन में किसी बच्चे ने ट्रैक्टर की चाबी घुमा दी।
चूंकि ट्रैक्टर गियर में रहा होगा, चाबी घूमते ही इंजन गरज उठा और वाहन अचानक आगे की ओर बढ़ गया। ट्रैक्टर के ठीक आगे 8 वर्षीय आयशा (पुत्री शाहरुख) खड़ी थी। इससे पहले कि कोई कुछ समझ पाता या मासूम वहां से हट पाती, वह भारी-भरकम ट्रैक्टर की चपेट में आ गई। घटना के बाद मौके पर कोहराम मच गया।
अस्पताल में टूटी सांसों की डोर
हादसे के तुरंत बाद परिजन और ग्रामीण लहूलुहान आयशा को लेकर बदहवास हालत में स्थानीय अस्पताल पहुंचे। प्राथमिक उपचार के बाद उसकी गंभीर स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे तुरंत देहरादून के उच्च केंद्र (Higher Center) रेफर कर दिया। देहरादून के अस्पताल में विशेषज्ञों की टीम ने घंटों तक आयशा की जान बचाने का संघर्ष किया, लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि तमाम कोशिशों के बावजूद रविवार देर रात मासूम ने अंतिम सांस ली।
रुड़की मंगलौर ट्रैक्टर हादसा की इस खबर ने न केवल परिवार को बल्कि पूरे गांव को स्तब्ध कर दिया है। बताया जा रहा है कि मृतका आयशा की एक जुड़वां बहन भी है, जिसका अपनी हमशक्ल बहन के बिछड़ने पर रो-रोकर बुरा हाल है।
ग्राम प्रधान और पुलिस का पक्ष
घोसीपुरा गांव के प्रधान जावेद ने घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए बताया, “बच्चे आपस में खेल रहे थे। ट्रैक्टर खड़ा था और उसमें चाबी लगी छोड़ना सबसे बड़ी भूल साबित हुई। खेलते समय बच्चे ऊपर चढ़े और चाबी घुमा दी, जिससे इंजन स्टार्ट होकर आगे बढ़ गया। नीचे खड़ी बच्ची उसकी चपेट में आ गई। यह पूरे गांव के लिए एक बड़ी क्षति और सबक है।”
वहीं, कानूनी प्रक्रिया को लेकर मंगलौर कोतवाली के प्रभारी निरीक्षक भगवान सिंह मेहर ने बताया कि मामला पुलिस के संज्ञान में है। उन्होंने कहा, “पुलिस अपनी प्रारंभिक जांच कर रही है, हालांकि अभी तक परिजनों की ओर से कोई लिखित तहरीर प्राप्त नहीं हुई है। जानकारी मिली है कि ट्रैक्टर परिवार का ही था। तहरीर मिलने के बाद नियमानुसार आगे की विधिक कार्रवाई अमल में लाई जाएगी।”
विशेष विश्लेषण: छोटी सी भूल और बड़ी त्रासदी
हरिद्वार जनपद में आए दिन होने वाले सड़क हादसों के बीच यह घटना एक अलग तरह की चेतावनी है। अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण इलाकों में कृषि यंत्रों और वाहनों को असुरक्षित तरीके से छोड़ दिया जाता है। रुड़की मंगलौर ट्रैक्टर हादसा इस बात का प्रमाण है कि बच्चों के आसपास खतरनाक मशीनों के प्रति बरती गई लापरवाही कितनी घातक हो सकती है।
सुरक्षा पर उठते सवाल:
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वाहनों में चाबी छोड़ना: क्या हम अपने वाहनों को पार्क करते समय यह सुनिश्चित करते हैं कि वह बच्चों की पहुंच से बाहर हों?
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बच्चों की निगरानी: खेलते समय बच्चों पर बड़ों की नजर न होना अक्सर ऐसी दुर्घटनाओं को निमंत्रण देता है।
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कृषि यंत्रों का रखरखाव: ट्रैक्टर जैसे भारी वाहनों को हमेशा न्यूट्रल और हैंडब्रेक के साथ चाबी निकालकर सुरक्षित स्थान पर खड़ा करना चाहिए।
गांव में पसरा सन्नाटा
आयशा की मौत के बाद घोसीपुरा गांव की गलियों में सन्नाटा पसरा हुआ है। जिस घर से बच्चों की हंसी गूंज रही थी, वहां अब केवल सिसकियां सुनाई दे रही हैं। पड़ोसियों का कहना है कि आयशा बहुत ही मिलनसार और चंचल बच्ची थी। इस घटना ने एक बार फिर समाज को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि आधुनिक मशीनों का उपयोग करते समय सुरक्षा मानकों की अनदेखी कितनी महंगी पड़ सकती है।
फिलहाल, पुलिस मामले की तहकीकात में जुटी है कि आखिर इतनी बड़ी लापरवाही किसके स्तर पर हुई। लेकिन कानूनी कार्रवाई से इतर, एक पिता ने अपनी बेटी और एक बहन ने अपनी परछाई को हमेशा के लिए खो दिया है।



