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NEET-UG 2026 पेपर लीक में बड़ा खुलासा! NTA के तीन एक्सपर्ट्स पर CBI का शिकंजा, होटल के कमरे में दोबारा तैयार किया गया प्रश्नपत्र

The Hill India News
Last updated: August 7, 2026 5:11 am
The Hill India News
Published: August 7, 2026
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नई दिल्ली: देश की सबसे बड़ी मेडिकल प्रवेश परीक्षा NEET-UG 2026 के कथित पेपर लीक मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की चार्जशीट ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। 94 पन्नों की चार्जशीट में दावा किया गया है कि नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) के तीन विषय विशेषज्ञों ने परीक्षा की गोपनीयता को भंग करते हुए प्रश्नपत्र लीक करने में अहम भूमिका निभाई। जांच एजेंसी का आरोप है कि इन विशेषज्ञों ने मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान प्रश्नों को याद किया, हाथ से पर्चियों पर नोट किया और बाद में होटल के कमरों में बैठकर पूरा प्रश्नपत्र दोबारा तैयार किया। इसके बाद यह प्रश्नपत्र कथित तौर पर बिचौलियों के माध्यम से कुछ चुनिंदा अभ्यर्थियों तक पहुंचाया गया।

Contents
तीन विशेषज्ञों के नाम आए सामनेहोटल के कमरे में तैयार हुआ कथित प्रश्नपत्र‘तीन दिनों में 135 सवाल’ का दावाहाथ से लिखी पर्चियों का किया गया इस्तेमालबिचौलियों तक कैसे पहुंचा प्रश्नपत्र?NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवालअभी कोर्ट में होगी सच्चाई की अंतिम परीक्षा

CBI के अनुसार, इस पूरे षड्यंत्र का मुख्य उद्देश्य अवैध रूप से धन कमाना और कुछ विशेष उम्मीदवारों को अनुचित लाभ पहुंचाना था। हालांकि, एजेंसी द्वारा लगाए गए इन आरोपों की अंतिम पुष्टि अभी न्यायालय में सुनवाई और साक्ष्यों की जांच के बाद ही होगी।

तीन विशेषज्ञों के नाम आए सामने

CBI की चार्जशीट में जिन तीन विशेषज्ञों का नाम सामने आया है, उनमें पी. वी. कुलकर्णी, मनीषा मंधारे और मनीषा हवलदार शामिल हैं। ये तीनों NEET-UG 2026 के प्रश्नपत्र की मॉडरेशन प्रक्रिया से जुड़े हुए थे। जांच एजेंसी का कहना है कि इन्हीं विशेषज्ञों ने परीक्षा की गोपनीय जानकारी बाहर पहुंचाने के लिए सुनियोजित तरीके से काम किया।

चार्जशीट के अनुसार, मॉडरेशन के दौरान विशेषज्ञों ने आसान प्रश्नों को याद किया, महत्वपूर्ण सवालों को छोटी-छोटी पर्चियों पर लिख लिया और NCERT की संबंधित पुस्तकों के पैराग्राफ भी चिन्हित किए, ताकि बाद में प्रश्नों को हूबहू दोबारा तैयार किया जा सके।

होटल के कमरे में तैयार हुआ कथित प्रश्नपत्र

CBI का दावा है कि विशेषज्ञों ने सीधे प्रश्नपत्र बाहर ले जाने की बजाय एक ऐसा तरीका अपनाया जिससे उन पर तत्काल संदेह न हो। जांच के अनुसार, वे दिनभर मॉडरेशन प्रक्रिया में शामिल रहते थे और शाम को होटल लौटने के बाद याद किए गए प्रश्नों तथा पर्चियों में लिखे गए नोट्स की मदद से पूरा प्रश्नपत्र दोबारा तैयार करते थे।

एजेंसी का कहना है कि यह तरीका इसलिए अपनाया गया ताकि वास्तविक प्रश्नपत्र की कोई प्रतिलिपि बाहर न जाए और जांच के दौरान प्रत्यक्ष सबूत मिलना कठिन हो।

‘तीन दिनों में 135 सवाल’ का दावा

चार्जशीट का सबसे अहम खुलासा यह है कि आरोपी पी. वी. कुलकर्णी ने 31 मार्च 2026 से 2 अप्रैल 2026 के बीच मात्र तीन दिनों में तीन सेटों के कुल 135 प्रश्नों का बैक-ट्रांसलेशन किया।

CBI के अनुसार, NTA के गोपनीय अनुभाग में आने-जाने वाले विशेषज्ञों की नियमित तलाशी या जांच की कोई व्यवस्था नहीं थी। इसी कमजोरी का फायदा उठाते हुए प्रश्नों को याद रखा गया और बाद में होटल में लिख लिया गया।

जांच एजेंसी का मानना है कि यदि गोपनीय अनुभाग में सख्त सुरक्षा व्यवस्था और नियमित जांच होती, तो इस तरह की गतिविधियों को रोका जा सकता था।

हाथ से लिखी पर्चियों का किया गया इस्तेमाल

CBI ने चार्जशीट में बताया है कि विशेषज्ञों ने प्रश्नों को बाहर ले जाने के लिए किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का उपयोग नहीं किया। इसके बजाय उन्होंने हाथ से लिखी छोटी-छोटी पर्चियों का सहारा लिया।

इन पर्चियों पर प्रश्नों के साथ-साथ NCERT के संबंधित अध्याय और पैराग्राफ भी लिखे गए, जिससे बाद में पूरे प्रश्नपत्र को दोबारा तैयार करना आसान हो गया। एजेंसी का आरोप है कि यह प्रक्रिया बेहद गोपनीय तरीके से अपनाई गई ताकि किसी को संदेह न हो।

बिचौलियों तक कैसे पहुंचा प्रश्नपत्र?

चार्जशीट के अनुसार, होटल में तैयार किए गए प्रश्नपत्र को बाद में कथित रूप से बिचौलियों के माध्यम से आगे भेजा गया। इन बिचौलियों ने इसे परीक्षा से पहले कुछ चुनिंदा उम्मीदवारों तक पहुंचाया।

CBI का आरोप है कि इस नेटवर्क का उद्देश्य मोटी रकम वसूलना और कुछ अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ दिलाना था। एजेंसी इस पूरे नेटवर्क में शामिल अन्य लोगों की भूमिका की भी जांच कर रही है।

NTA की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल

इस मामले के सामने आने के बाद NTA की परीक्षा सुरक्षा प्रणाली पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि प्रश्नपत्र तैयार करने और मॉडरेशन प्रक्रिया के दौरान निगरानी, तलाशी और डिजिटल सुरक्षा के कड़े इंतजाम होते, तो इतनी संवेदनशील जानकारी बाहर नहीं जा सकती थी।

शिक्षा जगत से जुड़े लोगों ने भी मांग की है कि भविष्य में राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं के लिए अधिक मजबूत सुरक्षा व्यवस्था लागू की जाए, ताकि लाखों विद्यार्थियों का भरोसा बना रहे।

अभी कोर्ट में होगी सच्चाई की अंतिम परीक्षा

CBI द्वारा दायर चार्जशीट में लगाए गए सभी आरोप फिलहाल जांच एजेंसी के दावे हैं। मामले की सुनवाई अब अदालत में होगी, जहां उपलब्ध साक्ष्यों, गवाहों और कानूनी प्रक्रिया के आधार पर यह तय होगा कि आरोप कितने सही हैं और दोषियों की जिम्मेदारी क्या है।

फिलहाल इतना तय है कि NEET-UG 2026 पेपर लीक मामला देश की सबसे चर्चित परीक्षा विवादों में शामिल हो चुका है। इस मामले ने न केवल परीक्षा प्रणाली की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि यह भी स्पष्ट कर दिया है कि राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगी परीक्षाओं की सुरक्षा व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाने की आवश्यकता है, ताकि मेहनत करने वाले लाखों छात्रों का भविष्य किसी भी प्रकार की अनियमितता से प्रभावित न हो।

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