नई दिल्ली/शिमला: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने देश के दो अलग-अलग राज्यों में मानवाधिकार उल्लंघन की गंभीर घटनाओं पर कड़ा रुख अख्तियार किया है। शिमला के एमजीएमएससी (MGMSC) नर्सिंग कॉलेज हॉस्टल में 19 छात्राओं के तपेदिक (Tuberculosis) की चपेट में आने और झारखंड के देवघर स्थित रिमांड होम में एक युवती की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के मामले ने आयोग को हिलाकर रख दिया है। आयोग ने हिमाचल प्रदेश और झारखंड, दोनों राज्यों के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
शिमला: नर्सिंग कॉलेज हॉस्टल बना ‘बीमारी का घर’, लापरवाही की इंतेहा
हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला स्थित MGMSC नर्सिंग कॉलेज के हॉस्टल से एक परेशान करने वाली खबर सामने आई है। यहाँ की 19 छात्राओं को तपेदिक (टीबी) ने अपनी चपेट में ले लिया है। NHRC ने गुरुवार को जारी एक आधिकारिक नोट में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की है कि संस्थान में हाल ही में किए गए दो निरीक्षणों के बावजूद प्रशासन ने कोई सुधारात्मक कदम नहीं उठाया।
आयोग के अनुसार, 31 मार्च और 17 अप्रैल 2026 को हुए निरीक्षणों में हॉस्टल के भीतर स्वच्छता और व्यवस्था की बेहद भयावह स्थिति पाई गई थी। छात्राएं अत्यधिक भीड़भाड़ वाले कमरों, दीवारों पर जमी सीलन और अस्वच्छ परिस्थितियों में रहने को मजबूर थीं।
छात्राओं के शोषण का आरोप: बीमारी में भी ‘मजदूरी’
मानवाधिकार आयोग ने मीडिया रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि हॉस्टल में रहने वाली छात्राओं को न केवल अस्वच्छ वातावरण में रखा जा रहा है, बल्कि उन्हें दिए जाने वाले भोजन की गुणवत्ता भी अत्यंत निम्न है, जिसमें बुनियादी पोषण का अभाव है। इससे भी अधिक चौंकाने वाला तथ्य यह है कि छात्राओं को बीमारी की स्थिति में भी आराम नहीं दिया जा रहा। आरोप है कि छुट्टियों के दौरान भी छात्राओं को अस्पताल कर्मचारी के रूप में काम करने के लिए मजबूर किया जाता है, जो सीधे तौर पर मानवाधिकारों का उल्लंघन है।
झारखंड: देवघर रिमांड होम में ‘मौत का सिलसिला’ जारी
दूसरी ओर, आयोग ने झारखंड के देवघर में स्थित एक रिमांड होम में 19 वर्षीय युवती की मौत पर भी कड़ा संज्ञान लिया है। 2 मई 2026 को हुई इस मौत के बाद आयोग ने झारखंड के मुख्य सचिव और देवघर पुलिस अधीक्षक (SP) से जवाब मांगा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, युवती की हालत अचानक बिगड़ने पर उसे देवघर सदर अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। रिपोर्टों के अनुसार, यह कोई इकलौती घटना नहीं है; 1 जनवरी 2026 से अब तक इस अकेले रिमांड होम में पाँच कैदियों की मृत्यु हो चुकी है। यह आंकड़ा रिमांड होम की सुरक्षा और वहां दी जाने वाली चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवालिया निशान खड़े करता है।
संवैधानिक दायित्व और प्रशासन की विफलता
NHRC ने स्पष्ट किया है कि यदि मीडिया रिपोर्टों में उल्लेखित तथ्य सत्य पाए जाते हैं, तो यह राज्य सरकारों और संबंधित संस्थानों की भारी विफलता है। किसी भी शिक्षण संस्थान या सुधार गृह में रहने वाले व्यक्तियों के स्वास्थ्य और जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना राज्य का संवैधानिक दायित्व है।
आयोग ने दोनों ही मामलों में “मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन” की बात कही है। अब यह देखना होगा कि हिमाचल और झारखंड की सरकारें इस पर क्या स्पष्टीकरण देती हैं और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या ठोस उपाय सुनिश्चित किए जाते हैं।



