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उत्तराखंडफीचर्ड

चमोली: चारधाम यात्रा के फेर में थराली-देवाल रूट की बसें गायब, ‘लाइफलाइन’ ठप होने से ग्रामीणों और बीमार बुजुर्गों की बढ़ी मुश्किलें

The Hill India News
Last updated: May 7, 2026 2:50 pm
The Hill India News
Published: May 7, 2026
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थराली (चमोली): उत्तराखंड में चारधाम यात्रा का आगाज होते ही जहाँ एक ओर श्रद्धालुओं का तांता लगा हुआ है, वहीं दूसरी ओर सीमांत क्षेत्रों की ग्रामीण जनता के लिए यह यात्रा भारी दुश्वारियों का सबब बन गई है। चमोली जनपद के थराली-देवाल क्षेत्र में पिछले डेढ़ महीने से उत्तराखंड परिवहन निगम (UTC) की नियमित बसों का संचालन बंद है। जानकारी के अनुसार, इन बसों को चारधाम यात्रा रूट पर तैनात कर दिया गया है, जिसके कारण स्थानीय यात्रियों, विशेषकर बुजुर्गों और बीमारों को भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा है।

Contents
जीवनरेखा साबित होने वाली बसें रूट से नदारदबुजुर्गों और बीमारों पर दोहरी मारग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा: उपेक्षा का आरोपप्रशासन और परिवहन निगम से तत्काल बहाली की मांग

जीवनरेखा साबित होने वाली बसें रूट से नदारद

थराली और देवाल ब्लॉक के दूर-दराज के गांवों के लिए परिवहन निगम की बसें किसी जीवनरेखा से कम नहीं हैं। देहरादून से देवाल तक संचालित होने वाली यह बस सेवा मध्यम वर्गीय परिवारों और पहाड़ की गरीब जनता के लिए सबसे सस्ता और सुलभ साधन रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि परिवहन निगम ने बिना किसी वैकल्पिक व्यवस्था के इन बसों को यात्रा मार्ग पर भेज दिया।

अब स्थिति यह है कि ग्रामीणों को जिला मुख्यालय या राजधानी देहरादून जाने के लिए निजी वाहनों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जो न केवल महंगे हैं बल्कि समय पर उपलब्ध भी नहीं होते। घंटों सड़क किनारे इंतजार करने के बाद भी कई बार यात्रियों को खाली हाथ घर लौटना पड़ता है।

बुजुर्गों और बीमारों पर दोहरी मार

थराली क्षेत्र के स्थानीय निवासियों ने बताया कि देहरादून-देवाल रूट की बस बंद होने से सबसे अधिक परेशानी उन लोगों को हो रही है जिन्हें इलाज के लिए ऋषिकेश या देहरादून के बड़े अस्पतालों में जाना पड़ता है। निजी टैक्सियों का किराया वहन करना हर किसी के बस की बात नहीं है।

क्षेत्र के यमुना प्रसाद उनियाल और कमलेश देवराड़ी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा, “सरकार एक तरफ सुगम पहाड़ की बात करती है, लेकिन हकीकत यह है कि स्थानीय जनता की जरूरतों को नजरअंदाज कर सारा ध्यान केवल यात्रा रूटों पर लगा दिया गया है। क्या सीमांत गांवों में रहने वाले बीमार और बुजुर्गों के लिए परिवहन की सुविधा जरूरी नहीं है?”

ग्रामीण जनप्रतिनिधियों ने खोला मोर्चा: उपेक्षा का आरोप

इस समस्या को लेकर क्षेत्र के कई ग्राम प्रधानों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सरकार और परिवहन विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। ग्राम प्रधान सुनला भगवती प्रसाद और ग्राम प्रधान चेपड़ो देवी जोशी समेत अनिल जोशी, गंभीर रावत और मुकेश रावत जैसे स्थानीय लोगों ने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही नियमित बस सेवा बहाल नहीं की गई तो वे आंदोलन के लिए बाध्य होंगे।

स्थानीय महिलाओं, जिनमें कमला देवी और पुष्पा देवी शामिल हैं, ने बताया कि पहाड़ी रास्तों पर बस सेवा न होने से बच्चों की पढ़ाई और दैनिक जरूरतों के काम भी प्रभावित हो रहे हैं। पहाड़ में पहले ही वाहनों की भारी कमी है, ऐसे में सरकारी बसों का हट जाना जनता के साथ अन्याय है।

प्रशासन और परिवहन निगम से तत्काल बहाली की मांग

थराली क्षेत्र के प्रबुद्ध नागरिकों ने मुख्यमंत्री और परिवहन मंत्री से मांग की है कि देहरादून-देवाल मार्ग पर चलने वाली परिवहन निगम की बस को उसके नियमित मार्ग पर तत्काल वापस भेजा जाए। ग्रामीणों का कहना है कि चारधाम यात्रा के लिए अतिरिक्त बसों की व्यवस्था की जानी चाहिए थी, न कि पहले से चल रही जन सुविधाओं को बंद करके।

फिलहाल, थराली और देवाल के गांवों में सरकार के इस फैसले के खिलाफ गहरा रोष व्याप्त है। अब देखना यह होगा कि जनहित की इस पुकार पर विभाग कब तक संज्ञान लेता है और कब चमोली के इन सीमांत क्षेत्रों में बसों के हॉर्न की गूंज दोबारा सुनाई देती है।

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