उत्तराखंड की राजनीति में विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हरिद्वार को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हरीश रावत ने हरिद्वार की किसी विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा जाहिर की है। इसके बाद प्रदेश की राजनीति में इस संभावित फैसले को लेकर चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने हरीश रावत को राज्य का सम्मानित नेता बताते हुए उनके सामाजिक जीवन की सराहना की, जबकि दिनेश अग्रवाल ने उनके पुराने चुनावी अनुभवों का जिक्र करते हुए राजनीतिक तंज कसा है।
पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने हाल ही में सोशल मीडिया के माध्यम से आगामी विधानसभा चुनाव में हरिद्वार से प्रतिनिधित्व करने की इच्छा जाहिर की थी। उनकी इस पोस्ट के बाद राजनीतिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गईं। खास बात यह है कि हरीश रावत इससे पहले भी 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी सक्रियता के संकेत दे चुके हैं। हाल ही में उन्होंने कहा था कि पार्टी जो जिम्मेदारी देगी, वह उसके अनुसार काम करेंगे।
हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा ने बढ़ाई चर्चाएं
हरीश रावत की हरिद्वार से चुनाव लड़ने की इच्छा ऐसे समय सामने आई है, जब उत्तराखंड में अगले विधानसभा चुनाव की तैयारियों को लेकर राजनीतिक गतिविधियां बढ़ रही हैं। लंबे समय बाद उत्तराखंड लौटने के बाद हरीश रावत ने हरिद्वार और देहरादून में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ मुलाकात की और विभिन्न कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। उनके हरिद्वार पहुंचने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्वागत भी किया था।
हरीश रावत की राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए अब यह सवाल उठने लगा है कि क्या वह वास्तव में हरिद्वार जिले की किसी विधानसभा सीट से चुनावी मैदान में उतरने की तैयारी कर रहे हैं या उनकी सोशल मीडिया पोस्ट केवल राजनीतिक सक्रियता का संकेत है। फिलहाल कांग्रेस की ओर से उनके लिए किसी विधानसभा सीट की आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है।
CM धामी ने की हरीश रावत की तारीफ
हरीश रावत के हरिद्वार से चुनाव लड़ने की चर्चाओं पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की प्रतिक्रिया भी सामने आई। मुख्यमंत्री ने हरीश रावत को राज्य का सम्मानित नेता बताया और कहा कि उनका पूरा जीवन समाज के लिए समर्पित रहा है।
मुख्यमंत्री की इस टिप्पणी को लेकर भी राजनीतिक चर्चाएं शुरू हो गई हैं। हालांकि, मुख्यमंत्री की ओर से हरीश रावत के चुनाव लड़ने को लेकर कोई राजनीतिक समर्थन या चुनावी भविष्यवाणी नहीं की गई, लेकिन एक वरिष्ठ विपक्षी नेता के तौर पर उनके योगदान की प्रशंसा जरूर की गई।
इस बीच, हरीश रावत की सक्रियता को लेकर कांग्रेस के भीतर भी चर्चाएं तेज होना स्वाभाविक है। वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव नजदीक आने के साथ ही पार्टी के भीतर संभावित उम्मीदवारों और विधानसभा सीटों को लेकर मंथन का दौर भी बढ़ने की संभावना है।
दिनेश अग्रवाल ने पुराने चुनावों का किया जिक्र
मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया के बाद दिनेश अग्रवाल ने हरीश रावत को लेकर अलग रुख अपनाया। हरिद्वार स्थित डामकोठी में बातचीत के दौरान उन्होंने हरीश रावत के पुराने चुनावी अनुभवों का जिक्र करते हुए कहा कि हरिद्वार में उनका क्या हाल हुआ है, यह उनसे बेहतर कोई नहीं जान सकता।
दिनेश अग्रवाल ने 2009, 2014 और 2017 के चुनावों का उल्लेख करते हुए कहा कि हरीश रावत को इन चुनावों में किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा, यह सभी के सामने है। उन्होंने कहा कि चुनाव का समय नजदीक आने पर तस्वीर और स्पष्ट हो जाएगी।
उनका कहना था कि हरीश रावत को पहले भी राजनीति करने से किसी ने नहीं रोका था और हरिद्वार की जनता पहले हुए चुनावों में अपना फैसला सुना चुकी है। हालांकि, आगामी चुनाव में मतदाता किसे समर्थन देंगे, इसका निर्णय चुनाव के दौरान ही होगा।
BJP की वापसी का भी किया दावा
दिनेश अग्रवाल ने आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर भारतीय जनता पार्टी के प्रदर्शन पर भी दावा किया। उन्होंने कहा कि भाजपा का संगठन जमीनी स्तर पर मजबूत है और पार्टी के नेतृत्व, नीतियों और कार्यक्रमों के कारण जनता का विश्वास उसके साथ बना हुआ है।
उन्होंने हालिया सर्वे और जनमत का हवाला देते हुए दावा किया कि जनता का रुझान भाजपा के पक्ष में है और आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी एक बार फिर सरकार बनाने की दिशा में आगे बढ़ेगी।
हालांकि, ऐसे राजनीतिक दावे किसी भी दल या नेता के आकलन के रूप में देखे जाने चाहिए। चुनावी परिणाम का वास्तविक फैसला मतदाताओं के मतदान और चुनाव प्रक्रिया के बाद ही होगा।
हरिद्वार क्यों बना सियासत का केंद्र?
हरिद्वार उत्तराखंड की राजनीति में लंबे समय से महत्वपूर्ण स्थान रखता है। जिले में कई विधानसभा क्षेत्र हैं और यहां का सामाजिक, धार्मिक तथा राजनीतिक प्रभाव प्रदेश की चुनावी राजनीति पर भी दिखाई देता है। यही वजह है कि किसी बड़े नेता के हरिद्वार से चुनाव लड़ने की चर्चा सामने आते ही राजनीतिक हलकों में उसका असर देखने को मिलता है।
हरीश रावत का हरिद्वार से पुराना राजनीतिक जुड़ाव भी रहा है। 2024 के लोकसभा चुनाव में उन्होंने हरिद्वार सीट से कांग्रेस प्रत्याशी के तौर पर चुनाव लड़ा था। चुनावी राजनीति में उनका हरिद्वार से जुड़ाव नया नहीं है, इसलिए विधानसभा चुनाव के लिए इस क्षेत्र का नाम सामने आने से राजनीतिक चर्चा और बढ़ गई है।
हरीश रावत के लिए अगली चुनौती क्या होगी?
अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या हरीश रावत वास्तव में विधानसभा चुनाव लड़ेंगे और अगर लड़ेंगे तो किस सीट से मैदान में उतरेंगे। उनकी हालिया सोशल मीडिया पोस्ट ने चुनाव लड़ने की इच्छा जरूर स्पष्ट की है, लेकिन उम्मीदवार के तौर पर अंतिम निर्णय कांग्रेस संगठन और पार्टी की चुनावी रणनीति पर निर्भर करेगा।
हरीश रावत ने हाल में यह भी कहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी जो आदेश देगी, वह उसके अनुसार काम करेंगे। इससे संकेत मिलता है कि अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और संगठन की प्रक्रिया के बाद ही सामने आएगा।
वहीं, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही आने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी राजनीतिक गतिविधियां बढ़ा रही हैं। ऐसे में हरीश रावत की हरिद्वार से चुनाव लड़ने की संभावित दावेदारी आने वाले समय में क्षेत्र की राजनीति का एक महत्वपूर्ण मुद्दा बन सकती है।
फिलहाल हरीश रावत की सोशल मीडिया पोस्ट ने इतना जरूर साफ कर दिया है कि हरिद्वार एक बार फिर उत्तराखंड की चुनावी राजनीति के केंद्र में आ गया है। एक तरफ मुख्यमंत्री धामी ने पूर्व मुख्यमंत्री की राजनीतिक और सामाजिक भूमिका की सराहना की है, तो दूसरी तरफ दिनेश अग्रवाल ने उनके पुराने चुनावी रिकॉर्ड का हवाला देते हुए सवाल खड़े किए हैं। अब निगाहें इस बात पर हैं कि कांग्रेस नेतृत्व हरिद्वार को लेकर क्या फैसला करता है और क्या हरीश रावत वास्तव में विधानसभा चुनाव के मैदान में उतरते हैं।
