By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: छोटी दिवाली पर ही जहरीली होने लगी देवभूमि की हवा, देहरादून में AQI 290 तक पहुंचा; बड़ी दिवाली के पटाखे बढ़ाएंगे प्रदूषण की चिंता!
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > उत्तराखंड > छोटी दिवाली पर ही जहरीली होने लगी देवभूमि की हवा, देहरादून में AQI 290 तक पहुंचा; बड़ी दिवाली के पटाखे बढ़ाएंगे प्रदूषण की चिंता!
उत्तराखंडपर्यावरणफीचर्ड

छोटी दिवाली पर ही जहरीली होने लगी देवभूमि की हवा, देहरादून में AQI 290 तक पहुंचा; बड़ी दिवाली के पटाखे बढ़ाएंगे प्रदूषण की चिंता!

The Hill India News
Last updated: November 8, 2026 10:46 am
The Hill India News
Published: November 8, 2026
Share
SHARE

मैदानी शहरों में प्रदूषण का सबसे ज्यादा असर, पहाड़ी शहर भी नहीं रहे अछूते; रुड़की में 152, ऋषिकेश में 150 और काशीपुर में 140 पहुंचा AQI, टिहरी और नैनीताल की हवा भी प्रभावित

देहरादून: देवभूमि उत्तराखंड की पहचान अपनी स्वच्छ आबोहवा, हरे-भरे जंगलों, पहाड़ों और प्राकृतिक सुंदरता के लिए होती है। यहां की खुली वादियां और शुद्ध हवा हमेशा से लोगों को आकर्षित करती रही हैं, लेकिन त्योहारों के दौरान बढ़ती आतिशबाजी और पटाखों का शोर अब इसी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए चिंता का कारण बनता जा रहा है। दीपावली के त्योहार की शुरुआत के साथ ही उत्तराखंड के कई शहरों की हवा प्रदूषित होने लगी है। छोटी दिवाली पर हुई जमकर आतिशबाजी का असर वायु गुणवत्ता पर साफ दिखाई दिया। राजधानी देहरादून में वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 290 तक पहुंच गया, जो खराब श्रेणी में आता है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि त्योहार के दौरान पटाखों का इस्तेमाल किस तरह पर्यावरण और लोगों की सेहत को प्रभावित कर रहा है।

सबसे ज्यादा चिंता की बात यह है कि अभी छोटी दिवाली के आंकड़े ही सामने आए हैं। बड़ी दिवाली पर भी आतिशबाजी का सिलसिला जारी रहने की आशंका है। ऐसे में आने वाले समय में हवा की गुणवत्ता और खराब हो सकती है। पटाखों से निकलने वाला धुआं, जहरीली गैसें और बारीक धूल के कण वातावरण में मिलकर प्रदूषण का स्तर बढ़ाते हैं। इसका असर केवल शहरों की आबोहवा पर ही नहीं, बल्कि लोगों के स्वास्थ्य पर भी पड़ता है।

देहरादून की हवा सबसे ज्यादा प्रभावित, AQI 290 तक पहुंचा

दीपावली से पहले ही राजधानी देहरादून में वायु प्रदूषण का स्तर बढ़ने लगा है। छोटी दिवाली की रात देर तक हुई आतिशबाजी के बाद यहां AQI 290 दर्ज किया गया। वायु गुणवत्ता सूचकांक का यह स्तर खराब श्रेणी में आता है। इसका मतलब है कि वातावरण में प्रदूषण की मात्रा काफी बढ़ चुकी है और इसका असर विशेष रूप से सांस संबंधी परेशानी से जूझ रहे लोगों, बुजुर्गों और बच्चों पर पड़ सकता है।

देहरादून में लगातार बढ़ता प्रदूषण यह संकेत दे रहा है कि त्योहारों के दौरान पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जाने वाले प्रयासों के साथ आम लोगों की भागीदारी भी बेहद जरूरी है। शहर में वाहनों की बढ़ती संख्या, निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल और अन्य प्रदूषणकारी गतिविधियों के बीच आतिशबाजी ने स्थिति को और चुनौतीपूर्ण बना दिया है।

मैदानी शहरों में ज्यादा प्रदूषण, पहाड़ों की हवा भी बिगड़ने लगी

उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार छोटी दिवाली पर प्रदेश के कई शहरों में वायु गुणवत्ता प्रभावित हुई। देहरादून के अलावा रुड़की, ऋषिकेश, काशीपुर और हल्द्वानी जैसे शहरों में भी प्रदूषण का स्तर बढ़ा हुआ दर्ज किया गया। आंकड़ों के मुताबिक इन शहरों की स्थिति इस प्रकार रही।

शहर AQI स्तर
देहरादून 290
रुड़की 152
ऋषिकेश 150
काशीपुर 140
हल्द्वानी 115
नैनीताल 74
टिहरी 51

इन आंकड़ों से साफ है कि मैदानी इलाकों में प्रदूषण का प्रभाव अधिक दिखाई दे रहा है। हालांकि पहाड़ी शहरों की स्थिति भी पूरी तरह चिंतामुक्त नहीं है। नैनीताल में AQI 74 और टिहरी में 51 दर्ज किया गया। भले ही इन दोनों शहरों में प्रदूषण का स्तर मैदानी शहरों की तुलना में कम रहा, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों में भी वायु गुणवत्ता पर नजर रखना जरूरी है।

पहाड़ों की स्वच्छ हवा को उत्तराखंड की सबसे बड़ी प्राकृतिक संपत्तियों में गिना जाता है। ऐसे में अगर त्योहारों के दौरान यहां भी प्रदूषण बढ़ने लगेगा, तो इसका असर पर्यावरण और पर्यटन दोनों पर पड़ सकता है।

आखिर सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है वायु प्रदूषण?

सर्दियों की शुरुआत होते ही वातावरण में प्रदूषण बढ़ने की आशंका अधिक हो जाती है। इसके पीछे कई प्राकृतिक और मानवीय कारण जिम्मेदार होते हैं। तापमान में गिरावट आने से हवा की गति कम हो सकती है। ऐसे मौसम में वाहनों, निर्माण कार्यों और आतिशबाजी से निकलने वाले धुएं तथा धूल के सूक्ष्म कण वातावरण में लंबे समय तक बने रहते हैं।

दीपावली के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं इस समस्या को और गंभीर बना देता है। पटाखे जलने से वातावरण में बारीक कणों के साथ कई तरह की गैसें भी फैलती हैं। वहीं, वाहनों से निकलने वाला धुआं, सड़कों पर उड़ती धूल, निर्माण कार्य और खुले में कूड़ा जलाना भी प्रदूषण बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

पहाड़ी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां भी प्रदूषण के प्रभाव को बढ़ा सकती हैं। खासकर घाटियों में हवा का प्रवाह धीमा होने पर प्रदूषक कण एक स्थान पर जमा हो सकते हैं। यही वजह है कि सर्दियों के मौसम में पहाड़ी और मैदानी दोनों क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता की नियमित निगरानी आवश्यक हो जाती है।

बच्चों और बुजुर्गों की सेहत पर पड़ सकता है असर

वायु प्रदूषण केवल पर्यावरण से जुड़ी समस्या नहीं है, बल्कि यह सीधे लोगों के स्वास्थ्य को भी प्रभावित करता है। पटाखों से निकलने वाला धुआं और सूक्ष्म कण सांस के जरिए शरीर में प्रवेश कर सकते हैं। इससे आंखों में जलन, गले में खराश, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसी समस्याएं हो सकती हैं।

विशेष रूप से अस्थमा और सांस संबंधी बीमारियों से पीड़ित लोगों को अधिक सावधानी बरतने की जरूरत होती है। बच्चों और बुजुर्गों पर भी प्रदूषित हवा का असर जल्दी पड़ सकता है। ऐसे में जब शहरों में AQI का स्तर बढ़ रहा हो, तो लोगों को अनावश्यक रूप से धुएं और धूल वाले वातावरण में जाने से बचना चाहिए।

बड़ी दिवाली पर और बिगड़ सकती है हवा की गुणवत्ता

छोटी दिवाली के दौरान ही देहरादून समेत कई शहरों में प्रदूषण का स्तर बढ़ना चिंता का विषय है। अब बड़ी दिवाली पर आतिशबाजी का सिलसिला और तेज होने की आशंका है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब छोटी दिवाली पर ही राजधानी की हवा खराब श्रेणी में पहुंच गई, तो बड़ी दिवाली के बाद स्थिति क्या होगी?

हालांकि वास्तविक स्थिति का आकलन बड़ी दिवाली के बाद प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों से ही हो सकेगा, लेकिन मौजूदा आंकड़े पर्यावरण को लेकर सतर्क रहने का संकेत जरूर दे रहे हैं। लोगों को चाहिए कि वे त्योहार की खुशियां मनाते समय पर्यावरण और दूसरों की सेहत का भी ध्यान रखें। अनावश्यक पटाखों से बचना, कम धुआं फैलाने वाले विकल्प अपनाना और बच्चों को आतिशबाजी के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक करना समय की जरूरत है।

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने लोगों से की जागरूक रहने की अपील

उत्तराखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहरों में पर्यावरण की स्थिति बेहतर बनाए रखने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। बोर्ड की तरफ से लोगों को लंबे समय से आतिशबाजी के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया जा रहा है। इस संबंध में बोर्ड के सदस्य सचिव पराग मधुकर ने कहा कि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की ओर से शहरों में पर्यावरण को बेहतर रखने के लिए प्रयास किए गए हैं। साथ ही लोगों को भी काफी लंबे समय से आतिशबाजी को लेकर जागरूक किया गया है।

देवभूमि की पहचान बचाने की जिम्मेदारी सबकी

उत्तराखंड को देवभूमि कहा जाता है और इसकी पहचान यहां के स्वच्छ वातावरण, प्राकृतिक सुंदरता और शांत पहाड़ी जीवन से जुड़ी हुई है। त्योहार खुशियां बांटने और एक-दूसरे के साथ समय बिताने का अवसर होते हैं, लेकिन इन खुशियों की कीमत पर्यावरण और लोगों की सेहत को चुकानी पड़े, यह उचित नहीं है।

छोटी दिवाली के आंकड़े पहले ही चेतावनी दे रहे हैं कि पटाखों का बढ़ता इस्तेमाल प्रदेश के शहरों की हवा को प्रभावित कर रहा है। ऐसे में बड़ी दिवाली पर लोगों को जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने की जरूरत है। आखिरकार स्वच्छ हवा केवल किसी एक शहर या व्यक्ति की जरूरत नहीं, बल्कि हर नागरिक का अधिकार है। देवभूमि की प्राकृतिक सुंदरता और आने वाली पीढ़ियों के बेहतर भविष्य के लिए जरूरी है कि हम त्योहार मनाने के साथ-साथ पर्यावरण को बचाने का संकल्प भी लें।

You Might Also Like

1988 के बाद सबसे भीषण बाढ़ में डूबा पंजाब, अरविंद केजरीवाल ने किया प्रभावित इलाकों का दौरा
दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का ऐतिहासिक आगाज़: वेस्ट यूपी की बदलेगी तस्वीर, सफर होगा सुपरफास्ट
मैं जो देखकर लौटा, उसे कभी नहीं भूलूंगा’: जंतर-मंतर प्रदर्शन में शामिल हुए अभिनेता अमोल पराशर, छात्रों की उम्मीद और संघर्ष की सुनाई आंखोंदेखी
बीमार लोगों का झाड़-फूंक के नाम पर करवाता था धर्म परिवर्तन, मौलवी को पुलिस ने किया गिरफ्तार
उत्तराखण्डवासियों की एक बड़ी उपलब्धि-मुख्यमंत्री धामी, CM ने किया फलैग ऑफ
TAGGED:Air PollutionAQIChhoti DiwaliDehradunDiwaliEnvironmental PollutionFirecrackersUttarakhand
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्ड

सरहद पर जवानों के बीच पहुंचे रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, चीन सीमा पर मनाई दिवाली; बोले- आधुनिक तकनीक से बड़ी सैनिकों की हिम्मत और अनुशासन की ताकत!

The Hill India News
The Hill India News
November 8, 2026
छोटी दिवाली पर ही जहरीली होने लगी देवभूमि की हवा, देहरादून में AQI 290 तक पहुंचा; बड़ी दिवाली के पटाखे बढ़ाएंगे प्रदूषण की चिंता!
रामायण में मंदोदरी बनकर छाईं काजल अग्रवाल, कभी अजय देवगन के साथ किया रोमांस तो कभी साउथ में मचाया धमाल; बिजनेसमैन गौतम किचलू से की है शादी
राइजिंग स्टार्स एशिया कप से रजत पाटीदार ने वापस लिया नाम, BCCI का बड़ा फैसला; रिंकू सिंह बने इंडिया A के नए उपकप्तान
बदरीनाथ धाम की पहाड़ियों पर फिर भड़की आग, स्काई शॉट पटाखे से लगी लपटें; वन विभाग की टीम ने रातभर की मशक्कत के बाद पाया काबू
सीएम धामी ने प्रदेशवासियों को दी दीपावली की शुभकामनाएं, बोले- हर घर-आंगन में खुशियों का उजाला हो; वीर जवानों के साथ मनाया दीपोत्सव
23 साल बाद जेनी का बड़ा खुलासा! हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म के गंभीर आरोप, DGP से मिलकर मांगी दोबारा CBI जांच, बोलीं- मेरे बेटे को चाहिए पिता का नाम
अमित शाह की देहरादून रैली पर कांग्रेस का बड़ा हमला! बीजेपी की जनसभा को बताया ‘फ्लॉप शो’, धस्माना बोले- जनता अब कुशासन से छुटकारा चाहती है
23 साल पुराने मामले ने फिर मचाया उत्तराखंड में सियासी तूफान! हरक सिंह रावत पर दुष्कर्म का आरोप लगाने वाली महिला देहरादून पहुंची, CBI जांच और DNA टेस्ट की उठाई मांग
उत्तराखंड की सियासत में बड़ा भूचाल! कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या के पति गिरधारी लाल साहू झांसी से गिरफ्तार, नेपाल भागने की थी तैयारी
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?