कई दिनों से पुलिस और एसआईटी को दे रहे थे चकमा, गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद तेज हुई थी तलाश; झांसी में गिरफ्तारी के बाद अब एसआईटी करेगी पूरे मामले का खुलासा
देहरादून। उत्तराखंड की राजनीति और प्रशासनिक गलियारों में इन दिनों चर्चा का विषय बने कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू से जुड़े विवाद में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। लंबे समय से फरार चल रहे गिरधारी लाल साहू उर्फ पप्पू को उत्तराखंड पुलिस की विशेष जांच टीम (एसआईटी) ने गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरधारी लाल को उत्तर प्रदेश के झांसी से पकड़ा गया है। बताया जा रहा है कि वह पुलिस की गिरफ्त से बचने के लिए लगातार अपना ठिकाना बदल रहा था और उत्तर प्रदेश के रास्ते नेपाल भागने की फिराक में था। हालांकि, नेपाल पहुंचने से पहले ही एसआईटी ने उसे गिरफ्तार कर लिया।
गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी को इस पूरे मामले में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। उनके खिलाफ उत्तराखंड में गंभीर आरोपों के तहत मुकदमा दर्ज है। मामले की जांच के लिए गठित एसआईटी लंबे समय से उनकी तलाश कर रही थी। पुलिस की कई टीमें उत्तराखंड के साथ-साथ उत्तर प्रदेश में भी संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थीं। आखिरकार एसआईटी को झांसी में सफलता मिली। जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर एसआईटी की ओर से प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर गिरफ्तारी और अब तक की जांच से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियां साझा की जाएंगी।
झांसी में एसआईटी के हत्थे चढ़े गिरधारी लाल, नेपाल भागने की थी तैयारी
गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी के लिए उत्तराखंड पुलिस लगातार प्रयास कर रही थी। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद उनकी तलाश और तेज कर दी गई थी। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एसआईटी को जानकारी मिली थी कि गिरधारी लाल उत्तर प्रदेश में छिपा हुआ है। इसके बाद पुलिस की टीमों ने उत्तर प्रदेश के अलग-अलग संभावित ठिकानों पर निगरानी और दबिश बढ़ा दी।
बताया जा रहा है कि गिरधारी लाल झांसी से गोरखपुर होते हुए नेपाल जाने की योजना बना रहा था। पुलिस को आशंका थी कि वह देश छोड़कर नेपाल पहुंचने की कोशिश कर सकता है। इसी बीच एसआईटी ने कार्रवाई करते हुए उसे झांसी से गिरफ्तार कर लिया। हालांकि, गिरफ्तारी के दौरान पुलिस को किन परिस्थितियों का सामना करना पड़ा और किस तरह गिरधारी लाल की लोकेशन ट्रेस की गई, इसका विस्तृत खुलासा एसआईटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में होने की उम्मीद है।
इस पूरे ऑपरेशन की कमान एसआईटी टीम की अगुवाई कर रहीं जया बलूनी संभाल रही थीं। गिरफ्तारी के बाद अब जांच एजेंसी की प्राथमिकता आरोपी से पूछताछ कर मामले से जुड़े सभी पहलुओं की जानकारी जुटाना होगी।
रेखा आर्या की शिकायत पर दर्ज हुआ था मुकदमा, लगाए थे गंभीर आरोप
दरअसल, यह पूरा मामला उत्तराखंड की कैबिनेट मंत्री रेखा आर्या और उनके पति गिरधारी लाल साहू के बीच सामने आए विवाद से जुड़ा है। रेखा आर्या ने अपने पति के खिलाफ देहरादून की कैंट कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में उन्होंने गिरधारी लाल साहू पर मारपीट, उत्पीड़न, धोखाधड़ी, जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल करने, जान से मारने की धमकी देने और हत्या की साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे।
रेखा आर्या की शिकायत के बाद पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए मुकदमा दर्ज किया और जांच शुरू की। मामला हाई प्रोफाइल होने के कारण इसकी जांच के लिए विशेष जांच दल (एसआईटी) का गठन किया गया। इसके बाद जांच की जिम्मेदारी एसआईटी को सौंप दी गई, जिसने शिकायत में लगाए गए आरोपों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाई।
शिकायत में रेखा आर्या ने अपने पति पर शादी से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारी छिपाने का आरोप भी लगाया था। उनका कहना था कि गिरधारी लाल साहू ने अपनी पहली शादी की जानकारी छिपाकर उनसे विवाह किया। इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया था कि कथित तौर पर फर्जी हस्ताक्षरों का इस्तेमाल कर उन्हें कंपनियों के निदेशक पद से हटाया गया। इन सभी आरोपों की जांच पुलिस कर रही है। हालांकि, इन आरोपों की पुष्टि जांच और न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही हो सकेगी।
तीन नोटिस के बावजूद जांच में नहीं हुए शामिल, जारी हुआ था गैर जमानती वारंट
इस मामले में गिरधारी लाल साहू की मुश्किलें उस समय और बढ़ गई थीं, जब पुलिस के अनुसार पूछताछ के लिए भेजे गए तीन नोटिस के बावजूद वह जांच में शामिल नहीं हुए। जांच एजेंसी लगातार उनसे पूछताछ करना चाहती थी, लेकिन उनके उपस्थित नहीं होने के बाद एसआईटी ने न्यायालय का रुख किया।
इसके बाद न्यायालय से गिरधारी लाल साहू के खिलाफ गैर जमानती वारंट (NBW) हासिल किया गया। गैर जमानती वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उनकी गिरफ्तारी के प्रयास तेज कर दिए थे। उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश तक पुलिस की टीमें उनकी तलाश में जुटी थीं। उनके संभावित ठिकानों पर निगरानी रखी जा रही थी और लगातार दबिश दी जा रही थी।
इस बीच गिरधारी लाल साहू की ओर से अग्रिम जमानत के लिए भी प्रयास किए गए थे, लेकिन उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज हो चुकी थी। इससे उनकी कानूनी मुश्किलें और बढ़ गई थीं।
हाईकोर्ट से भी नहीं मिली थी राहत, मुकदमा रद्द करने की याचिका खारिज
गिरधारी लाल साहू ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे को चुनौती देते हुए उत्तराखंड हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था। उन्होंने अदालत से मुकदमा रद्द करने और गिरफ्तारी से राहत देने की मांग की थी। हालांकि, हाईकोर्ट से भी उन्हें राहत नहीं मिली। अदालत ने उनके खिलाफ दर्ज एफआईआर को निरस्त करने से इनकार कर दिया था।
हाईकोर्ट के इस रुख के बाद मामले में उनकी मुश्किलें लगातार बढ़ती चली गईं। एक ओर पुलिस और एसआईटी उनकी तलाश में जुटी थीं, तो दूसरी ओर कानूनी मोर्चे पर भी उन्हें राहत नहीं मिल पा रही थी। गैर जमानती वारंट जारी होने और अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद गिरफ्तारी की आशंका और मजबूत हो गई थी।
गिरफ्तारी के बाद अब एसआईटी की पूछताछ पर टिकी नजरें
गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी के बाद अब इस पूरे मामले में एसआईटी की पूछताछ महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच एजेंसी उनसे शिकायत में लगाए गए आरोपों, कथित धोखाधड़ी, कंपनियों के निदेशक पद से हटाने के मामले और अन्य विवादित बिंदुओं पर सवाल कर सकती है।
इसके साथ ही पुलिस यह भी जानने का प्रयास करेगी कि वह गिरफ्तारी से बचने के लिए किन-किन स्थानों पर छिपे रहे और क्या वास्तव में नेपाल भागने की तैयारी कर रहे थे। उनके फरार रहने के दौरान किन लोगों ने उन्हें मदद पहुंचाई, इस पहलू की भी जांच की जा सकती है।
फिलहाल, गिरधारी लाल साहू की गिरफ्तारी ने उत्तराखंड के इस चर्चित मामले को एक नया मोड़ दे दिया है। अब सबकी निगाहें एसआईटी की प्रेस कॉन्फ्रेंस और पूछताछ के दौरान सामने आने वाले तथ्यों पर टिकी हैं। जांच एजेंसी की ओर से आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही गिरफ्तारी के पूरे घटनाक्रम और आगे की कानूनी कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि एसआईटी की पूछताछ में कौन-कौन से नए तथ्य सामने आते हैं और रेखा आर्या की शिकायत से जुड़े इस हाई प्रोफाइल मामले में जांच किस दिशा में आगे बढ़ती है।
