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Rajasthan Mayor Election 2026: जयपुर, जोधपुर और कोटा में BJP की जीत, 10 में से 9 नगर निगमों में भाजपा के मेयर; गहलोत के गृह क्षेत्र जोधपुर में भी कांग्रेस हारी

The Hill India News
Last updated: September 25, 2026 9:53 am
The Hill India News
Published: September 25, 2026
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राजस्थान नगर निगम मेयर चुनाव में भाजपा ने जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर पद अपने नाम कर लिए हैं। जयपुर में सुनील कोठारी, कोटा में अनुसुईया गोस्वामी और जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता निर्वाचित हुए। इसके साथ ही राज्य के 10 नगर निगमों में से 9 में भाजपा के मेयर हो गए हैं, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला महापौर चुने गए हैं।

जयपुर: राजस्थान के शहरी निकाय चुनाव में शुक्रवार को जयपुर, जोधपुर और कोटा नगर निगम के महापौर चुनाव के नतीजे सामने आ गए। तीनों ही बड़े नगर निगमों में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इसके साथ ही राजस्थान के सभी 10 नगर निगमों के महापौर पदों का चुनाव पूरा हो गया है और भाजपा ने इनमें से 9 नगर निगमों में महापौर पद हासिल किया है। कांग्रेस के खाते में केवल बीकानेर नगर निगम का महापौर पद गया है।

Contents
राजस्थान नगर निगम मेयर चुनाव में भाजपा ने जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर पद अपने नाम कर लिए हैं। जयपुर में सुनील कोठारी, कोटा में अनुसुईया गोस्वामी और जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता निर्वाचित हुए। इसके साथ ही राज्य के 10 नगर निगमों में से 9 में भाजपा के मेयर हो गए हैं, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के अनिल कल्ला महापौर चुने गए हैं।जोधपुर में सबसे करीबी मुकाबला, BJP के प्रसन्नचंद मेहता बने मेयरजयपुर में सुनील कोठारी ने हासिल की जीतकोटा में अनुसुईया गोस्वामी की बड़ी जीतबीकानेर में कांग्रेस ने बचाई अपनी स्थिति10 नगर निगमों में अब किसका मेयर?वार्ड नतीजों और मेयर चुनाव में दिखा अंतरराजस्थान की शहरी राजनीति में क्या बदली तस्वीर?इस तरह जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर चुनाव के परिणामों के साथ राजस्थान के सभी 10 नगर निगमों की तस्वीर पूरी हो गई है। भाजपा के 9 महापौर और कांग्रेस के एक महापौर चुने गए हैं। अब इन नगर निगमों के सामने शहरों की सफाई, सड़क, यातायात, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, शहरी विकास और विरासत संरक्षण जैसी स्थानीय चुनौतियों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।

जयपुर में भाजपा के सुनील कोठारी, कोटा में अनुसुईया गोस्वामी और जोधपुर में प्रसन्नचंद मेहता विजयी रहे। खास तौर पर जोधपुर का मुकाबला इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यहां वार्ड स्तर के चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच अंतर बेहद कम था।

जोधपुर में सबसे करीबी मुकाबला, BJP के प्रसन्नचंद मेहता बने मेयर

जोधपुर नगर निगम के महापौर चुनाव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला देखने को मिला। 100 सदस्यीय सदन के वार्ड चुनाव परिणाम में भाजपा के पास 45 पार्षद, कांग्रेस के पास 44 पार्षद, जबकि 10 निर्दलीय और एक अन्य पार्षद थे।

इसके बावजूद महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी प्रसन्नचंद मेहता ने कांग्रेस प्रत्याशी को 53-47 के अंतर से हरा दिया। यानी मेहता को कुल 53 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी के पक्ष में 47 वोट पड़े।

जोधपुर राजस्थान के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के राजनीतिक गृह क्षेत्र के तौर पर जाना जाता है। ऐसे में यहां भाजपा की जीत स्थानीय राजनीति के लिहाज से खास तौर पर चर्चा में रही। हालांकि, नतीजे का सीधा आधार महापौर चुनाव में पड़े वोट हैं और इस मुकाबले में भाजपा प्रत्याशी को 53 पार्षदों का समर्थन मिला।

चुनाव से पहले दोनों प्रमुख दलों ने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की कोशिश की थी। निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जा रही थी। अंततः महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी बहुमत हासिल करने में सफल रहे।

जयपुर में सुनील कोठारी ने हासिल की जीत

राजस्थान की राजधानी जयपुर में भी भाजपा ने महापौर पद पर कब्जा बरकरार रखा। भाजपा प्रत्याशी सुनील कोठारी को 89 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी को 60 वोट मिले। एक वोट NOTA के खाते में गया।

इस परिणाम के बाद सुनील कोठारी जयपुर नगर निगम के नए महापौर चुने गए। उन्होंने शहर में स्वच्छता, विकास और जयपुर की ऐतिहासिक विरासत के संरक्षण को प्राथमिकता देने की बात कही।

जयपुर नगर निगम का चुनाव इसलिए भी महत्वपूर्ण रहा क्योंकि यह राज्य का सबसे प्रमुख शहरी निकाय है और राजधानी की स्थानीय सरकार से जुड़े फैसलों का असर शहर की विकास योजनाओं, सफाई व्यवस्था, यातायात, शहरी ढांचे और विरासत संरक्षण जैसे मुद्दों पर पड़ता है।

राज्य निर्वाचन प्रक्रिया के अनुसार जयपुर, जोधपुर और कोटा में महापौर चुनाव 25 सितंबर को कराया गया। इन तीनों नगर निगमों में महापौर पद के लिए मतदान और परिणाम एक ही दिन निर्धारित किए गए थे।

कोटा में अनुसुईया गोस्वामी की बड़ी जीत

कोटा नगर निगम में भाजपा की अनुसुईया गोस्वामी महापौर निर्वाचित हुई हैं। वह वार्ड संख्या 98 से पार्षद हैं। महापौर चुनाव में उन्हें 65 वोट मिले, जबकि कांग्रेस प्रत्याशी सुनीता सुमन को 35 वोट मिले।

इस तरह अनुसुईया गोस्वामी ने 30 वोट के अंतर से चुनाव जीता।

कोटा नगर निगम में कुल 100 पार्षद हैं। उपलब्ध चुनावी आंकड़ों के मुताबिक चुनाव से पहले भाजपा के पास 57, कांग्रेस के पास 39 और चार निर्दलीय पार्षद थे। इनमें से दो निर्दलीयों के भाजपा को समर्थन देने की बात सामने आई थी। इसके बाद भाजपा के पास 59 पार्षदों का समर्थन माना जा रहा था।

लेकिन महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को 65 वोट मिले। दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी को पार्टी की मूल संख्या 39 से भी कम 35 वोट मिले। इस अंतर के बाद स्थानीय स्तर पर क्रॉस-वोटिंग को लेकर चर्चा शुरू हुई है। हालांकि, किसी विशेष पार्षद के क्रॉस-वोट करने की पुष्टि बिना आधिकारिक मतदान विवरण के नहीं की जा सकती।

बीकानेर में कांग्रेस ने बचाई अपनी स्थिति

राजस्थान के 10 नगर निगमों में भाजपा को 9 महापौर पद मिलने के बीच बीकानेर में कांग्रेस ने जीत दर्ज की। यहां कांग्रेस के अनिल कल्ला महापौर निर्वाचित हुए।

बीकानेर नगर निगम में 80 सदस्य हैं। महापौर चुनाव में अनिल कल्ला को 50 वोट, जबकि भाजपा प्रत्याशी सुरेंद्र सिंह शेखावत को 30 वोट मिले। कांग्रेस के पास नगर निगम में 42 पार्षद थे और बहुमत के लिए 41 वोट जरूरी थे। कल्ला को पार्टी की मूल संख्या से आठ अधिक वोट मिले, जिससे यह संकेत मिला कि उन्हें पार्टी के बाहर से भी समर्थन मिला।

इससे पहले राजस्थान के अन्य नगर निगमों में हुए महापौर चुनावों में भी भाजपा ने कई जगह जीत दर्ज की थी। अलवर, अजमेर, पाली और उदयपुर में भाजपा के उम्मीदवार विजयी हुए थे, जबकि भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा उम्मीदवार निर्विरोध चुने गए थे। बीकानेर में कांग्रेस को सफलता मिली थी।

10 नगर निगमों में अब किसका मेयर?

जयपुर, जोधपुर और कोटा के नतीजों के बाद राजस्थान के सभी 10 नगर निगमों की तस्वीर साफ हो गई है। इनमें जयपुर, जोधपुर, कोटा, अजमेर, अलवर, उदयपुर, पाली, भरतपुर और भीलवाड़ा में भाजपा के महापौर हैं, जबकि बीकानेर में कांग्रेस के महापौर हैं।

इससे राजस्थान के शहरी स्थानीय निकायों में भाजपा की स्थिति मजबूत हुई है। इससे पहले 10 नगर निगमों में से सात के महापौर चुनाव के परिणाम घोषित होने तक भाजपा छह और कांग्रेस एक महापौर पद जीत चुकी थी। जयपुर, जोधपुर और कोटा के परिणाम बाकी थे।

वार्ड नतीजों और मेयर चुनाव में दिखा अंतर

राजस्थान के नगर निगम चुनावों में एक महत्वपूर्ण पहलू यह भी रहा कि कई जगह वार्ड चुनाव में सबसे ज्यादा पार्षद जीतने वाली पार्टी ही महापौर पद हासिल नहीं कर सकी। अजमेर और पाली इसके उदाहरण रहे, जहां भाजपा ने महापौर पद हासिल किया जबकि वार्ड स्तर पर कांग्रेस की संख्या अधिक थी। पाली में भाजपा की नमिता बुबकिया ने 33 वोट हासिल कर जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस की आधिकारिक प्रत्याशी को केवल तीन वोट मिले।

जोधपुर में भी वार्ड स्तर पर भाजपा और कांग्रेस के बीच केवल एक पार्षद का अंतर था, लेकिन महापौर चुनाव में भाजपा प्रत्याशी 53 वोट हासिल करने में सफल रहे। इससे साफ है कि महापौर चुनाव में पार्षदों का समर्थन और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका कई नगर निगमों में महत्वपूर्ण रही।

राजस्थान की शहरी राजनीति में क्या बदली तस्वीर?

राजस्थान के 10 नगर निगमों के महापौर चुनाव पूरे होने के बाद अब राज्य के प्रमुख शहरों की स्थानीय सरकारों में भाजपा का प्रतिनिधित्व व्यापक हो गया है। दूसरी ओर, बीकानेर में कांग्रेस ने महापौर पद बरकरार रखा है।

इन चुनावों में केवल पार्टी की संख्या ही निर्णायक नहीं रही, बल्कि कई जगह निर्दलीय पार्षदों के समर्थन और मतदान के दौरान बने राजनीतिक समीकरणों ने भी परिणाम को प्रभावित किया। राजस्थान के 309 शहरी निकायों में चुनाव हुए थे और 301 निकायों के बोर्ड/अध्यक्ष पदों के परिणाम घोषित होने तक भाजपा ने 197, जबकि कांग्रेस ने 94 निकायों में बोर्ड बनाए थे।

इस तरह जयपुर, जोधपुर और कोटा के महापौर चुनाव के परिणामों के साथ राजस्थान के सभी 10 नगर निगमों की तस्वीर पूरी हो गई है। भाजपा के 9 महापौर और कांग्रेस के एक महापौर चुने गए हैं। अब इन नगर निगमों के सामने शहरों की सफाई, सड़क, यातायात, जल निकासी, कचरा प्रबंधन, शहरी विकास और विरासत संरक्षण जैसी स्थानीय चुनौतियों पर काम करने की जिम्मेदारी होगी।

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