देहरादून: उत्तराखंड में सितंबर के आखिरी दिनों में मौसम एक बार फिर करवट लेने जा रहा है। प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है। भारत मौसम विज्ञान विभाग की 25 सितंबर को जारी चेतावनी के मुताबिक 25 सितंबर को उत्तराखंड में भारी बारिश के साथ गरज-चमक की संभावना है, जबकि 26 सितंबर को अत्यंत भारी बारिश और 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है। 28 सितंबर को भी प्रदेश में भारी बारिश का अलर्ट है।
मौसम विभाग के इस पूर्वानुमान को देखते हुए पर्वतीय क्षेत्रों में विशेष सतर्कता बरतने की जरूरत है। बारिश के दौरान भूस्खलन, चट्टान गिरने, सड़क मार्ग बाधित होने, नदी-नालों के जलस्तर में बढ़ोतरी और निचले इलाकों में जलभराव जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। वहीं, प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना भी मौसम को और बदल सकती है।
मौसम विभाग के अनुसार देहरादून समेत कई इलाकों में अगले कुछ दिनों तक बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने की संभावना है। देहरादून के लिए जारी पूर्वानुमान में 26 सितंबर को सामान्यतः बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछारों की संभावना बताई गई है, जबकि 27 सितंबर को भी बारिश के कुछ दौर रहने का अनुमान है।
26 सितंबर को सबसे ज्यादा सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग के ताजा उपखंडीय चेतावनी बुलेटिन में 26 सितंबर को उत्तराखंड के लिए Extremely Heavy Rain यानी अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी दी गई है। इसके साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी हो सकती हैं। 27 सितंबर को बहुत भारी बारिश और 28 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी जारी की गई है।
इसका मतलब यह है कि आने वाले दिनों में खासतौर पर पर्वतीय क्षेत्रों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ना चाहिए। पहाड़ी सड़कों पर बारिश के कारण फिसलन बढ़ सकती है और कहीं-कहीं मलबा आने से यातायात प्रभावित हो सकता है।
बारिश के दौरान छोटी नदियों, बरसाती नालों और गदेरों में अचानक पानी बढ़ने की स्थिति भी बन सकती है। ऐसे में स्थानीय लोगों के साथ-साथ पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को नदी-नालों के आसपास अनावश्यक रूप से जाने से बचने की जरूरत होगी।
25 सितंबर से शुरू हुआ मौसम में बदलाव
25 सितंबर से प्रदेश के मौसम में बदलाव का दौर शुरू हो गया है। मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार इस दिन उत्तराखंड में भारी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां हो सकती हैं। इसके बाद 26 सितंबर को बारिश की तीव्रता बढ़ने की संभावना है।
देहरादून के लिए जारी IMD के तीर्थयात्री मौसम पूर्वानुमान में 25 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना है। 26 सितंबर को सामान्यतः बादल छाए रहने तथा बारिश या गरज के साथ बौछारें पड़ने का अनुमान है। 27 सितंबर को भी कुछ दौर में बारिश या गरज के साथ बौछारें हो सकती हैं।
ऐसे में मैदानी क्षेत्रों में भले ही बारिश का असर अलग-अलग स्थानों पर देखने को मिले, लेकिन पर्वतीय जिलों में मौसम का प्रभाव अधिक गंभीर हो सकता है।
27 सितंबर को भी रहेगी बारिश की संभावना
26 सितंबर के बाद 27 सितंबर को भी बारिश से राहत मिलने के आसार कम हैं। IMD के अनुसार इस दिन उत्तराखंड में बहुत भारी बारिश की चेतावनी है। इसके साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी हो सकती हैं।
पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार बारिश होने पर पहले से कमजोर ढलानों पर दबाव बढ़ सकता है। इससे भूस्खलन और चट्टान गिरने की घटनाओं का खतरा बढ़ जाता है। सड़क मार्गों पर मलबा आने से यातायात कुछ समय के लिए बाधित हो सकता है।
चारधाम और अन्य पर्वतीय धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की ओर जाने वाले यात्रियों के लिए यह अवधि विशेष सावधानी वाली है। मौसम खराब होने पर यात्रा कार्यक्रम में बदलाव करना और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करना जरूरी होगा।
28 सितंबर को भी भारी बारिश का अलर्ट
28 सितंबर को भी मौसम पूरी तरह सामान्य होने की उम्मीद नहीं है। IMD ने इस दिन उत्तराखंड के लिए भारी बारिश और गरज-चमक की चेतावनी जारी की है।
लगातार चार दिनों तक मौसम सक्रिय रहने के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में इसका असर केवल बारिश तक सीमित नहीं रह सकता। सड़कों पर मलबा, पेड़ों के गिरने, बिजली आपूर्ति में व्यवधान और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि जैसी परिस्थितियां स्थानीय स्तर पर सामने आ सकती हैं।
इस दौरान प्रशासन और संबंधित विभागों को संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बनाए रखने की जरूरत होगी। सड़क निर्माण, पुल, सुरंग और अन्य निर्माण गतिविधियों वाले स्थानों पर भी विशेष सावधानी जरूरी होगी।
29 और 30 सितंबर को कुछ राहत के संकेत
मौसम विभाग की सात दिन की चेतावनी में 29 सितंबर से भारी बारिश संबंधी चेतावनी नहीं दी गई है। इसी तरह 30 सितंबर को भी उत्तराखंड के लिए इस स्तर की बारिश की चेतावनी नहीं है। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि पूरे प्रदेश में मौसम पूरी तरह शुष्क रहेगा।
देहरादून के पूर्वानुमान के मुताबिक 29 सितंबर को आंशिक रूप से बादल छाए रहने और बारिश या गरज के साथ बौछार की संभावना बनी रहेगी। 30 सितंबर को भी गरज-चमक विकसित होने की संभावना बताई गई है।
इसलिए 29 और 30 सितंबर को बारिश की तीव्रता में कमी आने की स्थिति में भी स्थानीय स्तर पर मौसम में अचानक बदलाव से इनकार नहीं किया जा सकता।
1 अक्टूबर को इन जिलों में हो सकती है बारिश
अक्टूबर की शुरुआत भी पूरी तरह शुष्क रहने की संभावना नहीं है। उपलब्ध पूर्वानुमान के मुताबिक 1 अक्टूबर को कुछ पर्वतीय जिलों में हल्की बारिश और गरज के साथ बौछारें पड़ सकती हैं।
इससे साफ है कि सितंबर के अंतिम सप्ताह में उत्तराखंड का मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहने वाला है। हालांकि 29 सितंबर के बाद IMD की उपखंडीय चेतावनी में उत्तराखंड के लिए भारी बारिश संबंधी कोई चेतावनी नहीं दी गई है।
यानी अगले कुछ दिनों में सबसे संवेदनशील अवधि 25 से 28 सितंबर के बीच रहने की संभावना है, जबकि उसके बाद बारिश की तीव्रता में कमी आने के संकेत हैं।
ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी से बदलेगा मौसम का रंग
उत्तराखंड के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम का अलग प्रभाव देखने को मिल सकता है। सितंबर के आखिरी सप्ताह में अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में बारिश के साथ बर्फबारी की संभावना रहती है। 4000 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मौसम खराब होने पर बारिश के स्थान पर बर्फ गिर सकती है।
ऐसे क्षेत्रों में तापमान तेजी से गिर सकता है। पर्वतारोहण, ट्रेकिंग और ऊंचाई वाले पर्यटन स्थलों पर जाने वाले लोगों के लिए मौसम की स्थिति को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है।
हेमकुंड साहिब सहित प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हाल के दिनों में भी बर्फबारी देखने को मिली है। ऐसे में आने वाले दिनों में बारिश और बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले क्षेत्रों में ठंड बढ़ने की संभावना है।
बारिश से भूस्खलन और सड़कें बाधित होने का खतरा
उत्तराखंड की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए भारी बारिश का सीधा असर सड़क नेटवर्क पर पड़ता है। पहाड़ों में कई सड़कें खड़ी ढलानों और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से होकर गुजरती हैं। लगातार बारिश के दौरान मिट्टी और चट्टानों के खिसकने की घटनाएं सामने आ सकती हैं।
कहीं-कहीं मलबा आने से सड़कें बंद हो सकती हैं। कुछ स्थानों पर सड़क का हिस्सा कटने या क्षतिग्रस्त होने की भी आशंका रहती है। ऐसे में यात्रियों को मौसम और सड़क की स्थिति की जानकारी लेकर ही यात्रा करनी चाहिए।
बारिश के दौरान वाहन चालकों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। पहाड़ी सड़कों पर तेज गति से वाहन चलाने से बचना चाहिए और सामने से आने वाले वाहनों को पर्याप्त दूरी देनी चाहिए।
नदी-नालों के पास जाने से बचें
भारी बारिश के दौरान उत्तराखंड की नदियों और बरसाती नालों में अचानक जलस्तर बढ़ सकता है। कई बार ऊंचाई वाले क्षेत्रों में हुई बारिश का असर कुछ समय बाद निचले क्षेत्रों में दिखाई देता है।
इसलिए केवल अपने आसपास बारिश नहीं होने का मतलब यह नहीं है कि नदी या नाले का जलस्तर सुरक्षित है। नदी किनारे रहने वाले लोगों और वहां घूमने जाने वाले पर्यटकों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए।
उफनती नदियों, गदेरों और बरसाती धाराओं में उतरना या उनके किनारे खड़े होकर फोटो खींचना भी जोखिम भरा हो सकता है।
फ्लैश फ्लड का भी खतरा
लगातार या बहुत तेज बारिश होने पर अचानक बाढ़ यानी फ्लैश फ्लड की स्थिति बन सकती है। पहाड़ी क्षेत्रों में इसका प्रभाव विशेष रूप से तेजी से दिखाई दे सकता है। छोटी धाराएं और नाले कुछ ही समय में तेज बहाव वाले जलस्रोत में बदल सकते हैं।
निचले इलाकों में जलभराव हो सकता है। यदि भारी बारिश का पानी तेजी से नीचे की ओर आता है तो सड़क, पुल और आसपास के निर्माण प्रभावित हो सकते हैं।
इसलिए प्रशासन द्वारा जारी चेतावनियों को गंभीरता से लेना और खतरे वाले क्षेत्रों से समय रहते सुरक्षित स्थानों की ओर जाना जरूरी है।
बिजली गिरने की घटनाओं से भी रहें सावधान
बारिश के साथ गरज-चमक और आकाशीय बिजली की गतिविधियां भी हो सकती हैं। ऐसे में खुले स्थानों, ऊंचे पेड़ों और अकेली खड़ी संरचनाओं के पास खड़े होने से बचना चाहिए।
खेतों, खुले मैदानों और पहाड़ी क्षेत्रों में काम कर रहे लोगों को गरज-चमक शुरू होते ही सुरक्षित स्थान पर जाने की सलाह दी जाती है।
बारिश के दौरान बिजली के उपकरणों और खुले विद्युत तारों से भी दूरी बनाए रखना जरूरी है।
बांध और जलाशयों के लिए भी सतर्कता जरूरी
लगातार भारी बारिश का असर बांधों और जलाशयों पर भी पड़ सकता है। जलाशयों में पानी की मात्रा बढ़ने पर नियंत्रित तरीके से पानी छोड़ने की जरूरत पड़ सकती है।
इससे नदियों का जलस्तर बढ़ सकता है। नदी किनारे बसे क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को स्थानीय प्रशासन और संबंधित विभागों की सूचनाओं पर ध्यान देना चाहिए।
नदियों के जलस्तर में अचानक बढ़ोतरी की स्थिति में नदी किनारे जाने से बचना और सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के निर्देशों का पालन करना जरूरी है।
चारधाम यात्रियों और पर्यटकों के लिए खास सलाह
उत्तराखंड में बारिश का मौसम यात्रियों के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है। चारधाम, हेमकुंड साहिब और अन्य ऊंचाई वाले धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों की यात्रा करने वाले लोगों को मौसम की ताजा जानकारी लेकर ही यात्रा करनी चाहिए।
विशेष रूप से 26 से 28 सितंबर के बीच मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी चाहिए।
यदि किसी मार्ग पर प्रशासन की ओर से यात्रा रोकने या डायवर्ट करने की सूचना जारी होती है तो उसका पालन करना चाहिए। खराब मौसम के दौरान अनावश्यक जोखिम लेकर यात्रा करना उचित नहीं होगा।
किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है मौसम का पूर्वानुमान
बारिश का असर कृषि और बागवानी पर भी पड़ सकता है। जिन किसानों की फसल खेत में तैयार है, उन्हें मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए आवश्यक प्रबंध करने चाहिए।
लगातार बारिश होने पर खेतों में पानी जमा हो सकता है। ऐसे में अतिरिक्त पानी की निकासी की व्यवस्था करना जरूरी होगा। कटी हुई फसल को खुले में छोड़ने के बजाय सुरक्षित और सूखे स्थान पर रखना उपयोगी होगा।
बागवानी क्षेत्रों में भी तेज बारिश और हवा से फलों, पौधों और अन्य फसलों को नुकसान पहुंच सकता है। किसानों को स्थानीय कृषि विभाग की सलाह के अनुसार कदम उठाने चाहिए।
स्कूल, अस्पताल और जरूरी सेवाओं पर भी पड़ सकता है असर
भारी बारिश के दौरान संवेदनशील क्षेत्रों में स्कूलों, अस्पतालों, सरकारी कार्यालयों और अन्य संस्थानों तक पहुंच प्रभावित हो सकती है। सड़कें बंद होने या जलभराव की स्थिति में लोगों को आने-जाने में परेशानी हो सकती है।
जिलाधिकारी और स्थानीय प्रशासन मौसम की गंभीरता के आधार पर आवश्यक निर्णय ले सकते हैं। इसलिए अभिभावकों और विद्यार्थियों को स्थानीय प्रशासन तथा संबंधित संस्थानों की ओर से जारी आधिकारिक सूचना पर ध्यान देना चाहिए।
हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाएं भी हो सकती हैं प्रभावित
खराब मौसम का असर हवाई और हेलीकॉप्टर सेवाओं पर भी पड़ सकता है। कम दृश्यता, बादल और तेज बारिश की स्थिति में हेलीकॉप्टर संचालन प्रभावित हो सकता है।
चारधाम और दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में हेलीकॉप्टर सेवा से यात्रा करने वाले यात्रियों को संबंधित ऑपरेटर से ताजा स्थिति की जानकारी लेते रहना चाहिए।
निर्माण कार्यों में भी सावधानी जरूरी
भारी बारिश के दौरान निर्माणाधीन भवनों, पुलों, सुरंगों और अन्य ढांचों के आसपास जोखिम बढ़ सकता है। मिट्टी धंसने या जलभराव के कारण निर्माण स्थल असुरक्षित हो सकते हैं।
ऐसे स्थानों पर काम कर रहे लोगों को मौसम खराब होने पर सुरक्षा उपायों का पालन करना चाहिए। संवेदनशील स्थानों पर आवश्यक होने पर निर्माण गतिविधियों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है।
बारिश में वाहन चलाते समय इन बातों का रखें ध्यान
पहाड़ी क्षेत्रों में बारिश के दौरान वाहन चलाना सामान्य दिनों की तुलना में अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। सड़क पर फिसलन, कम दृश्यता, कोहरा और अचानक मलबा आने जैसी परिस्थितियां सामने आ सकती हैं।
वाहन चालकों को तेज गति से बचना चाहिए। पहाड़ी मोड़ों पर हॉर्न और आवश्यक सावधानी का इस्तेमाल करना चाहिए। यदि सड़क पर पानी का तेज बहाव हो तो उसे पार करने का प्रयास नहीं करना चाहिए।
किसी सड़क पर भूस्खलन या मलबा आने की स्थिति में वाहन को सुरक्षित दूरी पर रोककर प्रशासन या संबंधित विभाग की सूचना का इंतजार करना चाहिए।
प्रशासन और आम लोगों दोनों को सतर्क रहने की जरूरत
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए भी यह अवधि महत्वपूर्ण है। संवेदनशील स्थानों की निगरानी, सड़क मार्गों की स्थिति पर नजर, आपदा प्रबंधन टीमों की तैयारी और आवश्यक संसाधनों की उपलब्धता बनाए रखना जरूरी होगा।
वहीं आम लोगों की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। मौसम खराब होने पर अफवाहों पर भरोसा करने के बजाय केवल आधिकारिक स्रोतों से जानकारी लेनी चाहिए। IMD और स्थानीय प्रशासन के अपडेट पर नजर रखनी चाहिए।
मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून अपनी वेबसाइट और मौसम संबंधी सेवाओं के माध्यम से अपडेट जारी करता है। IMD की ओर से मौसम की लाइव जानकारी के लिए MAUSAM ऐप सहित विभिन्न सेवाओं की जानकारी भी उपलब्ध कराई जाती है।
सबसे अहम बात—अगले चार दिन रहें बेहद सतर्क
उत्तराखंड में 25 सितंबर से मौसम सक्रिय हो चुका है और 26 सितंबर सबसे महत्वपूर्ण दिन रहने वाला है, क्योंकि IMD ने इस दिन अत्यंत भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। इसके बाद 27 सितंबर को बहुत भारी और 28 सितंबर को भारी बारिश का अलर्ट है।
29 और 30 सितंबर को भारी बारिश की चेतावनी नहीं है, लेकिन स्थानीय स्तर पर बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी रह सकती है। 1 अक्टूबर को भी कुछ क्षेत्रों में हल्की बारिश हो सकती है।
ऐसे में उत्तराखंड के लोगों, पर्यटकों, तीर्थयात्रियों, वाहन चालकों और किसानों को आने वाले दिनों में मौसम की जानकारी लेते रहने की जरूरत है। खासकर पहाड़ी, नदी किनारे और भूस्खलन संभावित क्षेत्रों में अनावश्यक जोखिम से बचना ही सबसे जरूरी है।
मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए फिलहाल सबसे ज्यादा सावधानी 26 से 28 सितंबर के बीच बरतने की जरूरत है। बारिश के दौरान सुरक्षित स्थान पर रहें, नदी-नालों से दूरी बनाए रखें, संवेदनशील पहाड़ी मार्गों पर यात्रा से बचें और प्रशासन की ओर से जारी किसी भी एडवाइजरी का पालन करें।
