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उत्तराखंड: मानसून से पहले अलर्ट मोड में सरकार, मुख्य सचिव ने दिए सख्त निर्देश, गड्ढामुक्त हों सड़कें, फर्जी वीडियो फैलाने वालों पर होगी कार्रवाई

देहरादून। उत्तराखंड में आगामी मानसून सीजन को देखते हुए राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क नजर आ रही है। गुरुवार को सचिवालय में आयोजित उच्चस्तरीय बैठक में मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने सभी विभागों और जिलाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि मानसून शुरू होने से पहले सभी तैयारियां हर हाल में पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि बारिश के दौरान आम जनता को किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं होनी चाहिए और सभी विभागों को 24×7 अलर्ट मोड में कार्य करना होगा।

मुख्य सचिव ने आगामी मानसून को अत्यंत संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण बताते हुए कहा कि इस समय चारधाम यात्रा भी जारी है, ऐसे में किसी भी प्रकार की लापरवाही भारी पड़ सकती है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आपदा प्रबंधन और जनसुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है तथा सभी विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करना होगा।

बैठक में लोक निर्माण विभाग को सबसे पहले सड़कों की स्थिति सुधारने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि मानसून शुरू होने से पहले सभी मुख्य और संपर्क मार्गों को गड्ढामुक्त किया जाए तथा जहां सड़कें क्षतिग्रस्त हैं वहां तत्काल मरम्मत कार्य पूरा किया जाए। उन्होंने कहा कि पर्वतीय क्षेत्रों में बारिश के दौरान सड़कें बंद होने से लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है, इसलिए संवेदनशील स्थानों पर पहले से मशीनरी और संसाधन उपलब्ध कराए जाएं।

उन्होंने अधिकारियों से कहा कि केवल खानापूर्ति न की जाए बल्कि गुणवत्तापूर्ण कार्य सुनिश्चित किए जाएं। बरसात के दौरान कई बार सड़कें धंसने और भूस्खलन की घटनाएं सामने आती हैं, इसलिए ऐसे इलाकों की विशेष निगरानी की जाए। मुख्य सचिव ने निर्देश दिए कि सड़क खोलने के लिए जेसीबी मशीनों की अग्रिम तैनाती की जाए और बैली ब्रिज का पर्याप्त स्टॉक भी रखा जाए ताकि किसी आपदा की स्थिति में तुरंत वैकल्पिक मार्ग तैयार किए जा सकें।

बिजली और पेयजल विभाग को भी मानसून से पहले व्यापक तैयारियां करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि विद्युत लाइनों, ट्रांसफार्मरों और पेयजल लाइनों की समय रहते मरम्मत और रखरखाव सुनिश्चित किया जाए ताकि बारिश के दौरान बिजली और पानी की आपूर्ति लंबे समय तक बाधित न रहे। उन्होंने कहा कि कई बार आपदा के दौरान बिजली और पानी की समस्या से आम लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है, इसलिए इस बार पहले से ठोस तैयारी की जाए।

शहरी विकास विभाग, नगर निगमों और जिलाधिकारियों को नालों और नालियों की नियमित सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि बरसात के दौरान जलभराव की स्थिति किसी भी कीमत पर उत्पन्न नहीं होनी चाहिए। उन्होंने साफ कहा कि शहरों में नालियों की सफाई समय पर न होने से सड़कों पर पानी भर जाता है और लोगों की आवाजाही प्रभावित होती है। इसके साथ ही नदी-नालों के प्राकृतिक प्रवाह में बाधा डालने वाले अतिक्रमणों और अवरोधों को हटाने के निर्देश भी दिए गए।

मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन ने राज्य के नदी तटीय क्षेत्रों की संवेदनशीलता को देखते हुए नदियों के चैनलाइजेशन पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि नदी मार्गों में जमा आरबीएम और मलबे को हटाया जाए ताकि पानी का प्राकृतिक प्रवाह बाधित न हो। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि समय रहते नदी मार्गों की सफाई नहीं की गई तो कटाव की घटनाओं से आबादी और आधारभूत संरचनाओं को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है।

बैठक में खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को भी आवश्यक वस्तुओं का पर्याप्त भंडारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि गैस, राशन, खाद्यान्न, डीजल और पेट्रोल जैसी आवश्यक वस्तुओं की किसी प्रकार की कमी नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि आपदा की स्थिति में राहत सामग्री दूरस्थ इलाकों तक समय पर पहुंचाने के लिए पहले से रणनीति तैयार की जाए। विशेष रूप से पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क बंद होने की स्थिति में वैकल्पिक आपूर्ति व्यवस्था भी तैयार रखने को कहा गया।

स्वास्थ्य विभाग को मानसून के दौरान फैलने वाली संक्रामक और जलजनित बीमारियों को लेकर अलर्ट रहने के निर्देश दिए गए। मुख्य सचिव ने कहा कि अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों में पर्याप्त दवाइयों और चिकित्सकीय संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। उन्होंने अभी से फॉगिंग अभियान चलाने तथा डेंगू, मलेरिया और अन्य बीमारियों की रोकथाम के लिए विशेष अभियान शुरू करने को कहा। साथ ही हेली एम्बुलेंस सेवाओं को भी तैयार रखने के निर्देश दिए गए ताकि दुर्गम क्षेत्रों में आपात स्थिति के दौरान तत्काल चिकित्सा सहायता पहुंचाई जा सके।

बैठक में आपदा प्रबंधन और पुनर्वास विभाग की तैयारियों की भी समीक्षा की गई। सचिव विनोद कुमार सुमन ने जानकारी दी कि राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र में विभिन्न विभागों के नोडल अधिकारियों की तैनाती की जा चुकी है और मानसून अवधि के लिए समन्वित कार्ययोजना तैयार कर ली गई है। उन्होंने बताया कि राज्य में वर्तमान समय में 525 हाइड्रोमेट सेंसर सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं, जिनके माध्यम से संवेदनशील क्षेत्रों की लगातार निगरानी की जा रही है।

मुख्य सचिव ने हाइड्रोमेट सिस्टम, सेंसर और सैटेलाइट फोन की नियमित टेस्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मौसम संबंधी चेतावनियां और अलर्ट समय पर आम लोगों तक पहुंचना बेहद जरूरी है ताकि लोग पहले से सतर्क हो सकें। उन्होंने ‘सचेत एप’ और सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक के अधिकतम उपयोग पर विशेष जोर दिया ताकि किसी भी आपदा की सूचना तुरंत लोगों तक पहुंचाई जा सके।

बैठक में डॉप्लर वेदर रडार प्रणाली को और मजबूत बनाने पर भी चर्चा हुई। सचिव विनोद कुमार सुमन ने बताया कि राज्य में फिलहाल तीन डॉप्लर वेदर रडार संचालित हैं और तीन नए रडार स्थापित करने की योजना बनाई गई है। इसके अलावा पिथौरागढ़ में रेडियो सांडे और रेडियो विंड प्रणाली स्थापित करने का प्रस्ताव भी है, जिससे पर्वतीय क्षेत्रों में मौसम का अधिक सटीक पूर्वानुमान मिल सकेगा। इससे समय रहते चेतावनी जारी करने और जनहानि को कम करने में मदद मिलेगी।

मुख्य सचिव ने सोशल मीडिया पर आपदा संबंधी फर्जी वीडियो और भ्रामक सूचनाएं फैलाने वालों पर भी कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की झूठी सूचनाएं लोगों में अनावश्यक भय और भ्रम पैदा करती हैं, जिससे आपदा प्रबंधन कार्य प्रभावित होते हैं। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि ऐसे मामलों में आपदा प्रबंधन अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत तत्काल एफआईआर दर्ज कर सख्त कार्रवाई की जाए।

उन्होंने कहा कि मानसून के दौरान सरकार किसी भी स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी और संसाधनों की कोई कमी नहीं आने दी जाएगी। मुख्य सचिव ने सभी विभागों को निर्देश दिए कि वे अपने दायित्वों का समयबद्ध तरीके से निर्वहन करें और किसी भी आपदा की स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करें।

बैठक में विशेष सचिव पराग मुधकर धकाते, सचिव पंकज कुमार पाण्डेय, सचिव एल फैनई, सचिव सचिन कुर्वे, आयुक्त गढ़वाल विनय शंकर पाण्डेय, सूचना निदेशक बंशीधर तिवारी सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

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