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कोटा अस्पताल में मातम की रात: सिजेरियन के बाद बिगड़ी 6 प्रसूताओं की हालत, 2 मौतों ने खड़े किए बड़े सवाल

The Hill India News
Last updated: May 7, 2026 9:41 am
The Hill India News
Published: May 7, 2026
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राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में हुई दो प्रसूताओं की मौत ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। एक तरफ अस्पताल प्रशासन इसे सामान्य मेडिकल कॉम्प्लिकेशन बता रहा है, वहीं दूसरी ओर परिजन गंभीर लापरवाही, गलत इंजेक्शन और फाइलें गायब किए जाने जैसे आरोप लगा रहे हैं। यह मामला अब केवल एक अस्पताल की घटना नहीं रह गया, बल्कि सरकारी स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी बड़े सवाल खड़े कर रहा है।

Contents
ऑपरेशन के बाद अचानक बिगड़ने लगी हालत“गलत इंजेक्शन ने सब बर्बाद कर दिया”फाइल गायब होने के आरोप से बढ़ा विवादमहिलाओं में दिखे गंभीर लक्षणजयपुर से पहुंची विशेषज्ञों की टीमकलेक्टर और बड़े नेताओं ने किया दौराअस्पताल के बाहर प्रदर्शन और बढ़ता आक्रोशसरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसाअब रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

सोमवार रात और मंगलवार सुबह के बीच अस्पताल में सिजेरियन डिलीवरी के लिए भर्ती हुई 6 महिलाओं की तबीयत अचानक बिगड़ गई। इनमें से दो महिलाओं की मौत हो चुकी है, जबकि बाकी चार का इलाज अब भी जारी है। इनमें भी दो महिलाओं की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है और उन्हें जयपुर के एसएमएस अस्पताल रेफर करने की तैयारी की जा रही है।

ऑपरेशन के बाद अचानक बिगड़ने लगी हालत

परिजनों के अनुसार, सभी महिलाएं सामान्य रूप से सिजेरियन ऑपरेशन के लिए अस्पताल पहुंची थीं। ऑपरेशन के बाद जब उन्हें पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया, तब अस्पताल स्टाफ ने उन्हें कुछ इंजेक्शन लगाए। आरोप है कि इंजेक्शन लगते ही महिलाओं की हालत तेजी से बिगड़ने लगी।

परिजनों का दावा है कि महिलाओं को तेज बेचैनी, ब्लड प्रेशर गिरना, शरीर में सूजन और पेशाब बंद होने जैसी समस्याएं शुरू हो गईं। कुछ ही घंटों में हालात इतने गंभीर हो गए कि उन्हें आईसीयू में शिफ्ट करना पड़ा।

सबसे पहले पायल नाम की महिला की मौत हुई। इसके बाद ज्योति नाम की दूसरी प्रसूता ने भी दम तोड़ दिया। दोनों मौतों के बाद अस्पताल परिसर में हड़कंप मच गया और परिजनों का गुस्सा फूट पड़ा।

“गलत इंजेक्शन ने सब बर्बाद कर दिया”

मृतका ज्योति के परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि डॉक्टरों ने उन्हें स्पष्ट जानकारी देने के बजाय केवल इतना कहा कि मरीज की हालत खराब है और बाद में मौत की सूचना दे दी।

परिजनों का आरोप है कि ऑपरेशन के बाद गलत दवा या गलत डोज का इंजेक्शन लगाया गया, जिसके कारण यह हादसा हुआ। उनका कहना है कि यदि सही समय पर पारदर्शिता बरती जाती तो शायद जान बचाई जा सकती थी।

ज्योति के परिवार ने कहा कि उन्हें अब नई पर्ची बनवाने के लिए कहा जा रहा है, जबकि पुरानी मेडिकल फाइल गायब कर दी गई है। परिवार का दावा है कि उसी फाइल में दवाओं और इंजेक्शन की पूरी जानकारी थी और सच्चाई उसी से सामने आ सकती थी।

परिजनों ने साफ कहा कि जब तक उन्हें पुरानी फाइल नहीं दी जाती और निष्पक्ष जांच नहीं होती, तब तक वे शव नहीं उठाएंगे।

फाइल गायब होने के आरोप से बढ़ा विवाद

इस पूरे मामले में सबसे बड़ा विवाद मरीजों की फाइलों को लेकर खड़ा हुआ है। परिजनों का कहना है कि अस्पताल प्रशासन अब नई फाइलें बनवाने का दबाव डाल रहा है, ताकि पुरानी दवाओं और इलाज से जुड़ी जानकारी छिपाई जा सके।

हालांकि मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन ने इन आरोपों को खारिज किया है। उनका कहना है कि शुरुआती जांच में किसी कर्मचारी की लापरवाही सामने नहीं आई है और फाइल गायब होने जैसी कोई बात अभी तक साबित नहीं हुई है।

लेकिन सवाल यह उठ रहा है कि यदि कोई गलती नहीं हुई, तो परिजनों को पूरी मेडिकल हिस्ट्री और रिकॉर्ड तुरंत क्यों नहीं दिए जा रहे। यही वजह है कि मामला अब और ज्यादा संवेदनशील बन गया है।

महिलाओं में दिखे गंभीर लक्षण

अस्पताल प्रशासन के अनुसार, प्रभावित महिलाओं में कई गंभीर लक्षण पाए गए हैं। इनमें प्लेटलेट्स की संख्या में कमी, ब्लड प्रेशर का अचानक गिरना और यूरिन आउटपुट बंद होना शामिल है।

डॉक्टरों ने यह भी बताया कि कुछ महिलाओं की किडनी प्रभावित हुई है और संक्रमण फैलने की आशंका है। नेफ्रोलॉजी विभाग की टीम लगातार मरीजों की निगरानी कर रही है।

विशेषज्ञ डॉक्टरों का कहना है कि एक साथ कई मरीजों में समान लक्षण दिखाई देना सामान्य स्थिति नहीं मानी जा सकती। इसी कारण दवाओं और इंजेक्शन के सैंपल जांच के लिए भेजे गए हैं।

जयपुर से पहुंची विशेषज्ञों की टीम

मामले की गंभीरता को देखते हुए जयपुर से विशेषज्ञ डॉक्टरों और तकनीकी अधिकारियों की एक टीम कोटा भेजी गई। टीम ने अस्पताल पहुंचकर देर रात तक पूरे मामले की समीक्षा की।

सूत्रों के मुताबिक, टीम ने ऑपरेशन थिएटर, पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड और इस्तेमाल की गई दवाओं की जांच की। इंजेक्शन, दवाओं और अन्य मेडिकल सामग्री के सैंपल भी लिए गए हैं, जिन्हें एफएसएल जांच के लिए भेजा गया है।

जांच टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि कहीं किसी दवा में गड़बड़ी, संक्रमण या गलत डोज तो इस घटना का कारण नहीं बना।

कलेक्टर और बड़े नेताओं ने किया दौरा

कोटा कलेक्टर पीयूष सामरिया भी अस्पताल पहुंचे और उन्होंने विशेषज्ञ टीम के साथ हालात का जायजा लिया। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वास्तविक वजह स्पष्ट हो पाएगी।

उन्होंने यह भी बताया कि सभी तकनीकी पहलुओं की गहन जांच की जा रही है और यदि किसी स्तर पर लापरवाही पाई जाती है तो सख्त कार्रवाई होगी।

मामले की गंभीरता को देखते हुए लोकसभा स्पीकर ओम बिरला ने भी अस्पताल का दौरा किया। उन्होंने भर्ती महिलाओं से मुलाकात की और डॉक्टरों को बेहतर इलाज सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

ओम बिरला ने घटना को बेहद दुखद बताते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को हर संभव मदद दी जाएगी।

अस्पताल के बाहर प्रदर्शन और बढ़ता आक्रोश

दो मौतों के बाद अस्पताल के बाहर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। मृतकों के परिजन और कांग्रेस कार्यकर्ता धरने पर बैठ गए।

प्रदर्शन के दौरान कांग्रेस नेता चेतन सोलंकी ने अस्पताल गेट पर ही मुंडन कराकर विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने दोषियों की गिरफ्तारी, निष्पक्ष जांच और पीड़ित परिवारों को 20-20 लाख रुपये मुआवजा देने की मांग की।

लोगों का कहना है कि यदि सरकारी अस्पतालों में भी मरीज सुरक्षित नहीं हैं, तो आम जनता आखिर किस पर भरोसा करे।

सरकार ने दिया सख्त कार्रवाई का भरोसा

ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर ने कहा कि सरकार इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से ले रही है। उन्होंने कहा कि हाई लेवल जांच के आदेश दिए गए हैं और दोषी पाए जाने वाले किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।

सरकार का कहना है कि डेथ ऑडिट कमेटी और एफएसएल रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

अब रिपोर्ट पर टिकी सबकी नजरें

फिलहाल पूरे मामले में कई सवाल अनुत्तरित हैं। क्या सच में गलत इंजेक्शन लगाया गया था? क्या दवाओं में कोई गड़बड़ी थी? क्या अस्पताल प्रशासन ने किसी तरह की लापरवाही छिपाने की कोशिश की? और सबसे बड़ा सवाल—क्या फाइलें वास्तव में गायब की गईं?

इन सभी सवालों के जवाब अब एफएसएल जांच और डेथ ऑडिट रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।

लेकिन इस दर्दनाक घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की व्यवस्था, मरीजों की सुरक्षा और मेडिकल जवाबदेही पर गंभीर बहस छेड़ दी है। जिन परिवारों ने खुशियों के साथ अस्पताल का रुख किया था, वे अब मातम और सवालों के बीच न्याय की मांग कर रहे हैं।

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