
देहरादून के निरंजनपुर में आयोजित एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम में उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्यभर से आए पशुपालकों, दुग्ध उत्पादकों और मत्स्य पालकों के साथ संवाद किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने मत्स्य पालन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से रेफ्रिजरेटेड फिशरीज वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना भी किया। कार्यक्रम में मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार पशुपालकों, डेयरी संचालकों और मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ कार्य कर रही है और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए अनेक योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की ग्रामीण जीवनशैली में पशुपालन सदियों से महत्वपूर्ण भूमिका निभाता आया है। राज्य के लाखों परिवारों की आजीविका आज भी पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन पर आधारित है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में गांव, किसान और पशुपालकों को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया है। इसी सोच के तहत केंद्र सरकार द्वारा “प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना”, “राष्ट्रीय पशुधन मिशन”, “राष्ट्रीय गोकुल मिशन”, “पशुपालन अवसंरचना विकास कोष” और “किसान क्रेडिट कार्ड” जैसी कई महत्वाकांक्षी योजनाएं संचालित की जा रही हैं।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राज्य सरकार भी इन योजनाओं को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का काम तेजी से कर रही है। उन्होंने बताया कि “मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन” के अंतर्गत प्रदेश में पशुधन इकाइयों की स्थापना की जा रही है, जिसमें पात्र लाभार्थियों को 90 प्रतिशत तक ऋण अनुदान दिया जा रहा है। इसके अलावा “गोट वैली” और “पोल्ट्री वैली” जैसी योजनाओं के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि पिछले चार वर्षों में गौ पालन, बकरी पालन और भेड़ पालन के जरिए राज्य में साढ़े 11 हजार से अधिक लोगों को स्वरोजगार मिला है। वहीं मुख्यमंत्री राज्य पशुधन मिशन के तहत लगभग 4 हजार युवाओं और महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ा जा चुका है।
उन्होंने कहा कि सरकार पशु स्वास्थ्य सेवाओं को भी मजबूत कर रही है। प्रदेश के 60 विकासखंडों में मोबाइल वेटरनरी यूनिट्स संचालित की जा रही हैं ताकि दूरस्थ क्षेत्रों के पशुपालकों को समय पर चिकित्सा सुविधा मिल सके। इसके साथ ही प्रत्येक जिले में मॉडल पशु चिकित्सालय बनाए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सीमांत क्षेत्रों में रहने वाले पशुपालकों को “वाइब्रेंट विलेज योजना” के तहत लाभ पहुंचाया जा रहा है। इस योजना के माध्यम से भारत-तिब्बत सीमा पुलिस यानी आईटीबीपी के जरिए सीमावर्ती क्षेत्रों के पशुपालकों को सीधा बाजार उपलब्ध कराया जा रहा है, जिससे उनकी आय में वृद्धि हो रही है।
मुख्यमंत्री धामी ने यह भी बताया कि केंद्र सरकार ने उत्तराखंड को वर्ष 2030 तक खुरपका-मुंहपका रोग मुक्त राज्य बनाने के लिए चयनित किया है। उन्होंने कहा कि इससे पशुधन को होने वाले नुकसान में भारी कमी आएगी और पशुपालकों की आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले चार वर्षों में राज्य के दुग्ध उत्पादन में हर साल लगभग 10 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। उन्होंने बताया कि पिछले वर्ष सहकारी समितियों के माध्यम से दुग्ध उत्पादकों को करीब 380 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया।
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने उत्तराखंड की पारंपरिक “बद्री गाय” का विशेष उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि बद्री गाय के घी यानी “बद्री घी” को देश का पहला जीआई टैग प्राप्त हुआ है। यह उत्तराखंड के लिए गर्व की बात है। जीआई टैग मिलने से बद्री घी की गुणवत्ता और उसकी विशिष्ट पहचान को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता मिली है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे राज्य के दुग्ध उत्पादकों को बड़ा आर्थिक लाभ मिलेगा और स्थानीय उत्पादों को नया बाजार प्राप्त होगा।
मत्स्य पालन के क्षेत्र में हो रहे विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि ट्राउट फार्मिंग आज उत्तराखंड में स्वरोजगार का बड़ा माध्यम बनकर उभरी है। उन्होंने बताया कि ट्राउट फार्मिंग को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार ने पिछले वित्तीय वर्ष में 170 करोड़ रुपये की ट्राउट प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसके तहत उत्तरकाशी, पिथौरागढ़ और बागेश्वर जिलों में ट्राउट हैचरी स्थापित की जा रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार उत्तराखंड को हाई वैल्यू फिश प्रोडक्शन और एक्सपोर्ट हब के रूप में विकसित करने की दिशा में तेजी से काम कर रही है। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों के कारण राज्य का मत्स्य क्षेत्र 9 प्रतिशत से अधिक की दर से विकास कर रहा है। मुख्यमंत्री ने यह भी बताया कि पिछले वर्ष भारत सरकार द्वारा उत्तराखंड को हिमालयी राज्यों की श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ मत्स्य राज्य का सम्मान प्राप्त हुआ।
संवाद कार्यक्रम के दौरान विभिन्न क्षेत्रों से आए लाभार्थियों ने भी अपने अनुभव साझा किए। हरिद्वार के पशुपालक हरिकिशन लखेड़ा ने बताया कि उन्होंने ब्रीड मल्टीप्लीकेशन फार्म योजना के तहत 50 गायें खरीदी थीं। योजना का लाभ मिलने के बाद वे साहिवाल नस्ल की गायों से प्रतिदिन लगभग 300 लीटर दूध का उत्पादन कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस कार्य से आठ लोगों को रोजगार मिला है और उन्हें प्रतिमाह लगभग 1 लाख 15 हजार रुपये की शुद्ध आय प्राप्त हो रही है।
वहीं डोईवाला के अमित सिंह ने बताया कि उन्होंने गायों के चारे के लिए एक एफपीओ यानी फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गनाइजेशन की स्थापना की। इस एफपीओ से 386 लोग जुड़े हुए हैं और पिछले तीन वर्षों में इसका कारोबार 10 करोड़ रुपये से अधिक पहुंच चुका है। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं और सहयोग से ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के नए अवसर तेजी से बढ़ रहे हैं।
कार्यक्रम में मौजूद कैबिनेट मंत्री सौरभ बहुगुणा ने कहा कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में पिछले चार वर्षों में पशुपालन, डेयरी और मत्स्य पालन के क्षेत्र में कई नवाचार किए गए हैं। उन्होंने बताया कि राज्य में मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना लागू की गई है और गोट वैली प्रोजेक्ट से 5 हजार 827 लाभार्थी जुड़े हैं। इसके अलावा अनेक योजनाओं में सब्सिडी दी जा रही है, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों को सीधा लाभ मिल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि आज राज्य के सभी दुग्ध संघ लाभ की स्थिति में हैं, जो सरकार की योजनाओं की सफलता को दर्शाता है।
इस अवसर पर गौ सेवा आयोग के अध्यक्ष राजेंद्र प्रसाद अंथवाल, उत्तराखंड पशु कल्याण बोर्ड के उपाध्यक्ष सुरेंद्र मोघा, उत्तराखंड मत्स्य पालक विकास अभिकरण के उपाध्यक्ष उत्तम दत्ता, श्रीमती सीमा चौहान और अपर सचिव संतोष बडोनी सहित अनेक अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पशुपालकों, डेयरी संचालकों और मत्स्य पालकों ने भाग लिया और सरकार की योजनाओं के प्रति उत्साह व्यक्त किया।



