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चंपावत गैंगरेप कांड: बीजेपी नेता समेत 3 पर केस, अब परिजनों ने लगाया ‘पॉलिटिकल साज़िश’ का आरोप; आईजी बोलीं- बख्शे नहीं जाएंगे दोषी

हल्द्वानी/चंपावत: उत्तराखंड के चंपावत जिले से सामने आए नाबालिग के साथ सामूहिक दुष्कर्म के मामले ने अब तूल पकड़ लिया है। जहाँ एक ओर पुलिस ने सत्ताधारी दल के पूर्व पदाधिकारी सहित तीन आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच तेज कर दी है, वहीं दूसरी ओर आरोपियों के परिजनों ने मोर्चा खोलते हुए इसे एक गहरी ‘राजनीतिक साजिश’ करार दिया है। कुमाऊं रेंज की आईजी रिधिम अग्रवाल ने मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए स्पष्ट किया है कि दोषियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।

परिजनों का भावुक बचाव: ‘सामाजिक प्रतिशोध का शिकार बनाया गया’

इस हाई-प्रोफाइल मामले में नया मोड़ तब आया जब मुख्य आरोपियों के परिजन मीडिया के सामने आए। एक आरोपी की पत्नी और बेटी ने कैमरे पर अपनी बात रखते हुए इस पूरे घटनाक्रम को राजनीति से प्रेरित बताया। रोते हुए आरोपी की पत्नी ने कहा, “जिस नाबालिग बच्ची के साथ यह घटना बताई जा रही है, मेरी अपनी बेटी भी उसी उम्र की है। मेरे पति को एक व्यक्ति विशेष के इशारे पर सामाजिक और राजनीतिक प्रतिशोध के तहत फंसाया जा रहा है।”

आरोपी की बेटी ने दावा किया कि जिस रात की यह घटना बताई जा रही है, उस समय उसके पिता घर पर ही मौजूद थे। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि उनके परिवार को जानबूझकर बदनाम किया जा रहा है। वहीं, एक अन्य आरोपी के पिता ने भी अपने बेटे को बेकसूर बताते हुए जांच एजेंसी से न्याय की गुहार लगाई है।

क्या है पूरा मामला? पिता की तहरीर ने हिलाया प्रदेश

मामले की जड़ें 5 मई की उस रात से जुड़ी हैं, जब पीड़िता के पिता ने पुलिस को आपबीती सुनाई। तहरीर के अनुसार, वह अपनी बेटी का इलाज कराने चंपावत आए थे। इलाज के बाद पिता गांव लौट गए, लेकिन बेटी अपनी सहेली की शादी में शामिल होने के लिए रुक गई थी।

पीड़िता के पिता ने बताया कि रात को करीब 1:28 बजे बेटी का एक कॉल आया, लेकिन बात नहीं हो पाई और फोन स्विच ऑफ हो गया। अनहोनी की आशंका में जब खोजबीन शुरू हुई, तो सुबह 4 बजे बेटी सहेली के गांव के एक कमरे में संदिग्ध परिस्थितियों में मिली। पीड़िता ने आरोप लगाया कि तीन युवकों ने उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया और किसी को बताने पर जान से मारने की धमकी दी।

पुलिस की कार्रवाई: आईजी रिधिम अग्रवाल का कड़ा संदेश

मामले की गंभीरता को देखते हुए कुमाऊं रेंज की आईजी रिधिम अग्रवाल ने मोर्चा संभाला है। उन्होंने कहा कि जनपद चंपावत में नाबालिग के साथ हुई इस दरिंदगी पर त्वरित संज्ञान लेते हुए तीन नामजद आरोपियों के खिलाफ प्रभावी धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

आईजी ने मीडिया को जारी बयान में कहा, उत्तराखंड पुलिस महिलाओं और बच्चों के विरुद्ध होने वाले अपराधों को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाती है। पीड़िता को सुरक्षा और हर संभव सहायता प्रदान की जा रही है। साक्ष्यों के आधार पर विवेचना जारी है और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा। साथ ही उन्होंने आम जनता से अपील की है कि सोशल मीडिया पर किसी भी प्रकार की भ्रामक जानकारी न फैलाएं, जिससे जांच प्रभावित हो।

सियासी गलियारों में हलचल

चूंकि आरोपियों में से एक बीजेपी का पूर्व पदाधिकारी बताया जा रहा है, इसलिए विपक्ष ने भी सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। देवभूमि में इस तरह की घटना ने कानून व्यवस्था पर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं। हालांकि, स्थानीय पुलिस प्रशासन का कहना है कि आरोपी किसी भी दल का हो, कानून अपना काम निष्पक्षता से करेगा।

वर्तमान में, पुलिस पीड़िता के बयान और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर साक्ष्य जुटा रही है। आरोपियों के परिजनों द्वारा लगाए गए ‘साजिश’ के आरोपों की भी परोक्ष रूप से जांच की जा रही है ताकि दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।

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