
रुद्रपुर/काशीपुर: उत्तराखंड के उधम सिंह नगर जिले के काशीपुर क्षेत्र में मानवता को शर्मसार करने वाली घटना का पुलिस ने महज कुछ ही दिनों में पर्दाफाश कर दिया है। चैती मेले के दौरान एक नाबालिग लड़की को बहला-फुसलाकर अगवा करने और उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म करने वाले दो मुख्य आरोपियों को पुलिस और एसओजी (SOG) की संयुक्त टीम ने दबोच लिया है। तकनीकी साक्ष्यों और डिजिटल फुटप्रिंट्स के जाल में उलझे इन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद क्षेत्र के लोगों ने राहत की सांस ली है, हालांकि इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर कई गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।
चैती मेले की भीड़ का उठाया फायदा
घटनाक्रम के अनुसार, बीते 3 अप्रैल को पीड़ित नाबालिग लड़की प्रसिद्ध चैती मेला देखने गई थी। मेले की भारी भीड़ और शोर-शराबे के बीच आरोपियों ने मासूम को अपनी बातों के जाल में फंसाया और बाइक पर बैठाकर अज्ञात स्थान की ओर ले गए। पुलिस के अनुसार, आरोपी पीड़िता को बांसखेड़ा के पास स्थित एक सुनसान ओवरब्रिज के नीचे ले गए, जहाँ उसके साथ इस जघन्य अपराध को अंजाम दिया गया।
घटना के बाद डरी-सहमी पीड़िता ने जब आपबीती सुनाई, तो परिजनों के पैरों तले जमीन खिसक गई। 10 अप्रैल को पीड़िता की मां ने आईटीआई कोतवाली में नामजद तहरीर दी, जिसके बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया।
ऑपरेशन ‘क्लीन स्वीप’: 270 कैमरों और 100 नंबरों की सर्विलांस
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी उधम सिंह नगर के निर्देश पर एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने आरोपियों की धरपकड़ के लिए एक विशेष रणनीति तैयार की। काशीपुर नाबालिग दुष्कर्म मामला इतना संवेदनशील था कि आईटीआई पुलिस और स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) की एक संयुक्त टीम का गठन किया गया।
जांच टीम के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान करना थी, क्योंकि वे पीड़िता के लिए पूरी तरह अनजान थे। पुलिस ने जांच का दायरा बढ़ाते हुए डिजिटल साक्ष्यों का सहारा लिया:
-
CCTV मैपिंग: चैती मेला परिसर में लगे 120 कैमरों के साथ-साथ आईटीआई कोतवाली, काशीपुर कोतवाली और यूपी-उत्तराखंड सीमा पर लगे 150 से अधिक कैमरों की फुटेज खंगाली गई।
-
तकनीकी जांच: घटना के समय सक्रिय सैकड़ों मोबाइल नंबरों को डंप डेटा के जरिए सर्विलांस पर लिया गया।
-
मूवमेंट ट्रैकिंग: पुलिस ने बाइक के हुलिए और सीसीटीवी में कैद धुंधली तस्वीरों के आधार पर आरोपियों के भागने के रूट को मैप किया।
मुरादाबाद के रहने वाले हैं दोनों आरोपी
लगातार 72 घंटों की गहन छानबीन के बाद पुलिस ने दो संदिग्धों को चिन्हित किया। सटीक सूचना के आधार पर पुलिस ने दबिश देकर दोनों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान पंकज कुमार (निवासी मुरादाबाद, हाल निवासी कृष्णा कॉलोनी, काशीपुर) और अरविंद (निवासी ग्राम बोहरनपुर कला, मुरादाबाद) के रूप में हुई है।
प्रेस वार्ता के दौरान एसपी काशीपुर स्वप्न किशोर सिंह ने बताया, “आरोपियों ने अपना जुर्म कबूल कर लिया है। उनके कब्जे से घटना में प्रयुक्त बाइक और अन्य साक्ष्य भी बरामद किए गए हैं। पुलिस अब यह सुनिश्चित कर रही है कि इनके खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में पैरवी की जाए ताकि पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिल सके।”
आपराधिक इतिहास की पड़ताल जारी
पुलिस अब इन दोनों आरोपियों के पुराने रिकॉर्ड खंगालने में जुटी है। चूंकि दोनों आरोपी उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के रहने वाले हैं, इसलिए उत्तराखंड पुलिस ने यूपी पुलिस से भी संपर्क साधा है। जांच का मुख्य बिंदु यह है कि क्या ये आरोपी पहले भी इस तरह की वारदातों में शामिल रहे हैं या किसी अंतर्राज्यीय गिरोह का हिस्सा हैं।
समाज में आक्रोश और सुरक्षा के सवाल
इस घटना ने देवभूमि में महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है। चैती मेला जैसे प्रतिष्ठित आयोजन में, जहाँ भारी पुलिस बल तैनात रहता है, वहां से एक नाबालिग का अपहरण हो जाना सुरक्षा घेरे में बड़ी चूक माना जा रहा है। स्थानीय संगठनों ने मांग की है कि मेलों और सार्वजनिक स्थलों पर महिला पुलिस कर्मियों की सादे कपड़ों में तैनाती बढ़ाई जानी चाहिए।
काशीपुर नाबालिग दुष्कर्म मामला पुलिस की तकनीकी कार्यकुशलता की जीत तो है, लेकिन समाज के चेहरे पर लगा एक गहरा घाव भी है। हालांकि, पुलिस की मुस्तैदी और पॉक्सो एक्ट के तहत की गई त्वरित कार्रवाई ने यह संदेश जरूर दिया है कि अपराधियों के लिए देवभूमि में कोई जगह नहीं है। अब सबकी निगाहें न्यायालय की कार्रवाई पर टिकी हैं, जहाँ इन दरिंदों को उनके किए की सख्त सजा मिलना तय माना जा रहा है।



