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चारधाम यात्रा पर गणेश गोदियाल का तीखा वार— “शोबाजी में व्यस्त है सरकार, धरातल पर सब बेहाल”

देहरादून: विश्व प्रसिद्ध चारधाम यात्रा इन दिनों अपने चरम पर है। चारों धामों में श्रद्धालुओं की भारी आमद जारी है, लेकिन इस भक्ति के सैलाब के बीच अब उत्तराखंड की सियासत में जबरदस्त ‘उबाल’ आ गया है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे भीड़ और अव्यवस्थाओं के वीडियो ने विपक्षी दल कांग्रेस को सरकार पर हमला करने का एक बड़ा हथियार दे दिया है। कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने प्रदेश की भाजपा सरकार और मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पर तीखा हमला बोलते हुए चारधाम यात्रा की तैयारियों को महज एक ‘दिखावा’ करार दिया है।

“मुख्यमंत्री का ध्यान सिर्फ शोबाजी पर”: गोदियाल का सीधा हमला

देहरादून में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने आरोप लगाया कि सरकार का ध्यान कभी भी यात्रा की वास्तविक तैयारियों पर था ही नहीं। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड की जनता और देशभर से आने वाले श्रद्धालु देख रहे हैं कि सरकार का पूरा तंत्र केवल ‘ब्रांडिंग’ और ‘शोबाजी’ में केंद्रित है। गोदियाल ने तंज कसते हुए कहा, “यह स्वाभाविक है कि उत्तराखंड के मुख्यमंत्री सिर्फ शोबाजी में विश्वास रखते हैं, क्योंकि जब देश के प्रधानमंत्री ही इस संस्कृति को बढ़ावा दे रहे हैं, तो मुख्यमंत्री से इससे अलग की उम्मीद करना बेमानी है।”

समीक्षा के नाम पर केवल ‘इतिश्री’ का आरोप

हाल ही में मुख्यमंत्री द्वारा किए गए यात्रा मार्ग के दौरों पर सवाल उठाते हुए गोदियाल ने कहा कि उन्हें इस बात का अंदेशा पहले से ही था। उन्होंने मुख्यमंत्री के रुद्रप्रयाग से गुप्तकाशी तक सड़क मार्ग से जाने को केवल खानापूर्ति बताया। गोदियाल ने कहा, “मुख्यमंत्री अगर वाकई गंभीर होते, तो उन्हें यात्रा मार्गों के उन ‘कठिन पैचेज’ और डेंजर जोन का निरीक्षण करना चाहिए था, जहाँ यात्री हर पल जोखिम में होते हैं। केवल सुगम रास्तों पर गाड़ी दौड़ाकर जायजा लेने का नाटक करना यात्रा की सफलता सुनिश्चित नहीं कर सकता।”

उन्होंने आगे कहा कि पिछले वर्ष आई आपदा के दौरान जिन सड़कों और मूलभूत सुविधाओं को नुकसान पहुँचा था, उनका पुनर्निर्माण आज तक पूरा नहीं हो पाया है। सरकार उन मुख्य समस्याओं को सुलझाने के बजाय केवल इस फिराक में रहती है कि कहाँ से कितना पैसा वसूला जाए।

तानाशाही और मुकदमों की राजनीति पर प्रहार

गणेश गोदियाल ने सरकार की कार्यप्रणाली पर कड़ा प्रहार करते हुए इसे ‘तानाशाही’ की संज्ञा दी। उन्होंने चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए कहा कि चुनाव के समय झूठी लहरें पैदा करके सत्ता तो हासिल की जा सकती है, लेकिन उससे सेवा की भावना पैदा नहीं होती। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार अपनी कमियों को छिपाने के लिए दमनकारी नीति अपना रही है।

गोदियाल ने कहा, “अगर कोई सोशल मीडिया पर चारधाम यात्रा की असली स्थिति या दिक्कतों को उजागर करता है, तो सरकार उन पर मुकदमा दर्ज करके उन्हें डराने और धमकाने का काम करती है। यह अभिव्यक्ति की आजादी का गला घोटने जैसा है, ताकि कोई दोबारा सरकार की पोल न खोल सके।”

वित्तीय कुप्रबंधन और जिला पंचायत बजट का मुद्दा

कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की आर्थिक नीति पर भी गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नजर केवल श्रद्धालुओं की जेब और यात्रा से होने वाली आय पर है। गोदियाल ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा कि सरकार ने घोड़े-खच्चरों पर लगने वाले कर से होने वाली जिला पंचायत की बचत तक को खर्च कर दिया है। उन्होंने सवाल पूछा कि आखिर यह पैसा गया कहाँ? अगर यात्रियों की सुविधाओं के लिए बजट था, तो फिर धरातल पर शौचालय, पानी और रुकने की पर्याप्त व्यवस्थाएं क्यों नजर नहीं आ रही हैं?

श्रद्धालुओं को पैनिक नहीं, ‘सचेत’ रहने की सलाह

अपनी बात को स्पष्ट करते हुए गणेश गोदियाल ने कहा कि उनका उद्देश्य यात्रा में आ रहे श्रद्धालुओं को डराना या पैनिक पैदा करना कतई नहीं है, बल्कि वे चाहते हैं कि यात्री सुरक्षित रहें। उन्होंने अपील की कि जो भी श्रद्धालु उत्तराखंड आ रहे हैं, वे पर्याप्त समय लेकर आएं क्योंकि उत्तराखंड चारधाम यात्रा अव्यवस्था के कारण सड़कों पर लंबा जाम और बदइंतजामी देखने को मिल रही है। उन्होंने कहा कि बिना तैयारी और बिना बैकअप के यात्रा पर निकलना जोखिम भरा हो सकता है।

सुलगते सवालों के बीच प्रशासन की चुनौती

कांग्रेस द्वारा लगाए गए इन गंभीर आरोपों ने सरकार की ‘ऑल इज वेल’ की रिपोर्ट पर सवालिया निशान लगा दिया है। एक तरफ जहाँ सरकारी अमला यात्रा के सफल होने का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष के ये आरोप और सोशल मीडिया पर वायरल होती तस्वीरें कुछ और ही कहानी बयां कर रही हैं। अब देखना यह होगा कि मुख्यमंत्री धामी इन राजनीतिक हमलों का जवाब अपनी कार्यशैली से देते हैं या आने वाले दिनों में यात्रा मार्ग पर श्रद्धालुओं की परेशानियाँ और बढ़ती हैं।

फिलहाल, देवभूमि की ये यात्रा आस्था और राजनीति के दोराहे पर खड़ी नजर आ रही है, जहाँ एक ओर बाबा के दर्शन की अभिलाषा है और दूसरी ओर बदइंतजामी का डर।

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