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तिरुपति में भक्तों के लिए निःशुल्क ‘तिरुनामधारण सेवा’ फिर शुरू, बढ़ी आध्यात्मिक आस्था की चमक

आंध्र प्रदेश के प्रसिद्ध तीर्थस्थल तिरुपति में आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण और सुखद खबर सामने आई है। लंबे समय के अंतराल के बाद तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने भक्तों के लिए निःशुल्क ‘तिरुनामधारण सेवा’ को फिर से शुरू कर दिया है। कोविड-19 महामारी के दौरान सुरक्षा कारणों से इस सेवा को अस्थायी रूप से बंद कर दिया गया था, लेकिन अब परिस्थितियों के सामान्य होने के बाद इसे पुनः बहाल कर दिया गया है।

यह सेवा श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं से गहराई से जुड़ी हुई है। ‘तिरुनामधारण’ के तहत भक्तों के माथे पर पारंपरिक ‘तिरुनामम’ तिलक लगाया जाता है, जो भगवान के प्रति आस्था, समर्पण और पवित्रता का प्रतीक माना जाता है। यह तिलक विशेष रूप से तीन धारियों वाला होता है, जिसे लाल सिंदूर और अन्य पारंपरिक सामग्री से तैयार किया जाता है।

TTD के इस निर्णय से न केवल श्रद्धालुओं की सुविधा बढ़ी है, बल्कि उनकी आध्यात्मिक यात्रा भी और अधिक अर्थपूर्ण हो गई है। भक्त अब मंदिर में दर्शन के लिए कतार में लगने से पहले ही इस पवित्र तिलक को धारण कर भगवान के दर्शन के लिए तैयार होते हैं। यह प्रक्रिया उनके मन में भक्ति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार करती है।

इस सेवा को सुचारु रूप से संचालित करने के लिए करीब 168 ‘श्रीवारी सेवक’ प्रतिदिन तैनात किए गए हैं। ये सेवक दो पालियों में काम करते हुए विभिन्न प्रमुख स्थानों पर श्रद्धालुओं को तिलक लगाते हैं। इन स्थानों में वैकुंठम कतार परिसर I और II, गोल्ला मंडपम, बेदी अंजनेय स्वामी मंदिर, कल्याणकट्टा, वराहस्वामी मंदिर, सुपथम, राम बगीचा, अन्नप्रसादम केंद्र और चार माडा गलियां शामिल हैं। इन सभी स्थानों पर भक्तों की भारी भीड़ रहती है, जहां इस सेवा का लाभ बड़ी संख्या में लोग उठा रहे हैं।

तिरुनामम लगाने के लिए विशेष प्रकार के सांचों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें ‘नामाकोपुस’ कहा जाता है। इससे तिलक की एकरूपता और पारंपरिक स्वरूप को बनाए रखना संभव हो पाता है। यह तिलक शैली मंदिर में भगवान की साप्ताहिक ‘तिरुमानिकापु’ सजावट से भी मेल खाती है, जिससे भक्तों को धार्मिक परंपराओं का साक्षात अनुभव मिलता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माथे के बीच स्थित ‘आज्ञा चक्र’ पर तिलक लगाने से ध्यान केंद्रित करने की क्षमता बढ़ती है और व्यक्ति को मानसिक शांति मिलती है। इसके साथ ही यह नकारात्मक ऊर्जा और बुरी नजर से भी सुरक्षा प्रदान करता है। यही कारण है कि श्रद्धालु इस सेवा को अत्यंत श्रद्धा और उत्साह के साथ स्वीकार कर रहे हैं।

भक्तों की प्रतिक्रिया भी काफी सकारात्मक रही है। कई श्रद्धालुओं ने इस सेवा की पुनः शुरुआत पर खुशी जताई है और इसे अपनी आध्यात्मिक यात्रा का अहम हिस्सा बताया है। वहीं, सेवा में लगे स्वयंसेवकों का कहना है कि उन्हें इस पवित्र कार्य में शामिल होकर अपार संतोष और आनंद की अनुभूति होती है।

तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम का यह कदम न केवल धार्मिक परंपराओं को सहेजने का प्रयास है, बल्कि आधुनिक समय में भी आस्था और संस्कृति को जीवंत बनाए रखने की दिशा में एक सराहनीय पहल है। इससे यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि तिरुमाला मंदिर की यात्रा हर श्रद्धालु के लिए केवल एक दर्शन न होकर, एक गहन आध्यात्मिक अनुभव बन सके।

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