
नई दिल्ली: घरेलू वायदा बाजार Multi Commodity Exchange of India (MCX) में मंगलवार को सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे बाजार में हलचल तेज हो गई है। वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी नीतियों की सख्ती और हाजिर बाजार में कमजोर मांग के चलते कीमती धातुओं पर दबाव बना हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह गिरावट फिलहाल जारी रह सकती है, हालांकि खुदरा खरीदारों के लिए यह एक अवसर के रूप में भी देखा जा रहा है।
MCX पर सोना-चांदी के ताजा भाव
MCX पर 5 जून के सोने के वायदा अनुबंध में 0.34 प्रतिशत यानी करीब 528 रुपये की गिरावट दर्ज की गई, जिसके बाद कीमतें 1,53,415 रुपये प्रति 10 ग्राम के स्तर पर आ गईं। वहीं, चांदी की बात करें तो इसमें और अधिक कमजोरी देखने को मिली। 5 मई के चांदी वायदा अनुबंध में करीब 0.92 प्रतिशत यानी 2,335 रुपये की गिरावट आई, जिससे इसका भाव 2,50,210 रुपये प्रति किलोग्राम तक फिसल गया।
इस गिरावट ने खासकर उन निवेशकों को सतर्क कर दिया है जो हाल के दिनों में तेजी की उम्मीद में बाजार में सक्रिय थे। हालांकि, कुछ निवेशक इसे खरीदारी के अच्छे मौके के रूप में भी देख रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय बाजार का दबाव
वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी की कीमतों में कमजोरी देखने को मिल रही है। न्यूयॉर्क बाजार में सोने का वायदा भाव 0.55 प्रतिशत गिरकर 4,794.27 डॉलर प्रति औंस पर पहुंच गया। वहीं, चांदी भी 0.55 प्रतिशत की गिरावट के साथ 79.29 डॉलर प्रति औंस पर कारोबार कर रही है।
इस गिरावट के पीछे प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और Federal Reserve (फेडरल रिजर्व) की सख्त मौद्रिक नीति को माना जा रहा है। जब ब्याज दरें ऊंची रहती हैं, तो निवेशक सोने जैसे गैर-ब्याज देने वाले निवेश विकल्पों से दूरी बनाने लगते हैं, जिससे कीमतों पर दबाव बनता है।
हाजिर मांग में कमी का असर
विशेषज्ञों का कहना है कि घरेलू स्तर पर भी हाजिर बाजार में मांग कमजोर बनी हुई है। शादी-ब्याह के सीजन में भी अपेक्षित खरीदारी नहीं होने से कीमतों को सहारा नहीं मिल पा रहा है। ज्वेलर्स और ट्रेडर्स के अनुसार, ऊंचे दामों के कारण उपभोक्ता फिलहाल खरीदारी टाल रहे हैं और कीमतों में और गिरावट का इंतजार कर रहे हैं।
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, फिलहाल सोने-चांदी में बड़ी तेजी की संभावना कम नजर आ रही है। जब तक वैश्विक स्तर पर आर्थिक संकेत मजबूत नहीं होते या हाजिर मांग में सुधार नहीं आता, तब तक कीमतों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है।
बड़े निवेशकों के लिए यह समय ‘वेट एंड वॉच’ यानी इंतजार करने का है, जबकि छोटे और रिटेल खरीदारों के लिए यह गिरावट धीरे-धीरे खरीदारी का अवसर हो सकती है। हालांकि, किसी भी निवेश से पहले बाजार की स्थिति और विशेषज्ञों की राय लेना जरूरी है।
कच्चे तेल में भी गिरावट
कीमती धातुओं के साथ-साथ ऊर्जा बाजार में भी कमजोरी देखने को मिली है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में Brent Crude Oil की कीमत 1.71 प्रतिशत गिरकर 93.84 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई, जबकि West Texas Intermediate (WTI) में करीब 2 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई और यह 85.5 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार करता नजर आया।
तेल की कीमतों में गिरावट का असर भी वैश्विक बाजार की धारणा पर पड़ता है, जिससे निवेशक सतर्क हो जाते हैं और सुरक्षित निवेश विकल्पों में भी अस्थिरता देखने को मिलती है।
आगे क्या रह सकता है रुख?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतें काफी हद तक वैश्विक संकेतों, अमेरिकी आर्थिक आंकड़ों और डॉलर की चाल पर निर्भर करेंगी। यदि वैश्विक तनाव बढ़ता है या आर्थिक अनिश्चितता गहराती है, तो सोने में फिर से तेजी आ सकती है। वहीं, यदि ब्याज दरें ऊंची बनी रहती हैं, तो कीमतों पर दबाव जारी रह सकता है।
कुल मिलाकर, मौजूदा गिरावट ने बाजार में नई बहस छेड़ दी है—क्या यह खरीदारी का सही समय है या अभी और गिरावट का इंतजार करना चाहिए? निवेशकों और खरीदारों को फिलहाल सावधानी बरतते हुए सोच-समझकर कदम उठाने की जरूरत है।



