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देहरादून में आधी रात खूनी संघर्ष: लूट के बाद पुलिस और बदमाशों में मुठभेड़, थाना प्रभारी को लगी गोली; जवाबी फायरिंग में एक अपराधी ढेर

देहरादून: उत्तराखंड की राजधानी देहरादून बुधवार देर रात गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठी। प्रेमनगर थाना क्षेत्र में लूट की वारदात को अंजाम देकर भाग रहे बदमाशों और पुलिस के बीच हुई सीधी मुठभेड़ में एक बदमाश मारा गया है। इस दुस्साहसिक घटना में प्रेमनगर थाना प्रभारी (SO) नरेश राठौर बदमाशों की गोली लगने से गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। वहीं, बदमाशों के हमले का शिकार हुए एक स्थानीय ठेकेदार का भी अस्पताल में उपचार चल रहा है। एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने खुद कमान संभालते हुए पूरे जिले में हाई अलर्ट जारी कर दिया है।

वारदात की शुरुआत: ठेकेदार से ₹2 लाख की लूट और फायरिंग

घटनाक्रम के अनुसार, पौंधा निवासी ठेकेदार देवराज बुधवार रात करीब 10:30 बजे अपना कामकाज निपटाकर घर की ओर लौट रहे थे। तभी पौंधा के सुनसान रास्ते पर काले रंग की गुजरात नंबर (GJ) की कार में सवार तीन बदमाशों ने उन्हें घेर लिया। बदमाशों ने तमंचा दिखाकर देवराज से नकदी और कीमती सामान देने की मांग की।

जब देवराज ने विरोध किया, तो बेखौफ बदमाशों ने उन पर फायर झोंक दिया। गोलीबारी के बाद बदमाश देवराज से नीले रंग का बैग छीनकर फरार हो गए, जिसमें ₹2 लाख नकद, मोबाइल फोन, हिसाब-किताब की डायरी और जरूरी दस्तावेज मौजूद थे। घायल अवस्था में देवराज ने किसी तरह पुलिस को सूचना दी।

थाना प्रभारी ने दिखाया साहस, जंगल में घेराबंदी

लूट और फायरिंग की सूचना मिलते ही प्रेमनगर थाना प्रभारी नरेश राठौर पुलिस बल के साथ तत्काल मौके पर पहुंचे। घायल देवराज से बदमाशों की लोकेशन और गाड़ी का हुलिया मिलते ही पुलिस ने पीछा शुरू किया। पीछा करने के दौरान पुलिस को जंगल की ओर जाती एक संदिग्ध काली कार दिखाई दी।

पुलिस को करीब आते देख बदमाशों ने गाड़ी छोड़ दी और जंगल के घने अंधेरे का फायदा उठाकर भागने लगे। जब पुलिस ने उन्हें सरेंडर करने की चेतावनी दी, तो अपराधियों ने पुलिस टीम पर ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। इस दौरान बदमाशों की दो गोलियां थाना प्रभारी नरेश राठौर के हाथ में लगीं, जिससे वे लहूलुहान हो गए।

जवाबी फायरिंग में ढेर हुआ बदमाश

अपने घायल साथी और अपनी रक्षा के लिए पुलिस टीम ने भी जवाबी कार्रवाई की। पुलिस की ओर से की गई सटीक फायरिंग में एक बदमाश गंभीर रूप से घायल होकर वहीं गिर पड़ा, जबकि उसके अन्य साथी अंधेरे का लाभ उठाकर जंगल के भीतर भागने में सफल रहे।

पुलिस ने तत्काल घायल बदमाश, पीड़ित ठेकेदार देवराज और घायल थाना प्रभारी नरेश राठौर को अस्पताल पहुंचाया। गंभीर रूप से घायल बदमाश को हायर सेंटर कोरोनेशन अस्पताल रेफर किया गया, जहाँ डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। मारे गए बदमाश के सीने और पेट में कुल तीन गोलियां लगी थीं। फिलहाल मृतक बदमाश की शिनाख्त की कोशिश की जा रही है।

एसएसपी और एसपी सिटी ने संभाला मोर्चा

मुठभेड़ की सूचना मिलते ही एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल और एसपी सिटी प्रमोद कुमार दलबल के साथ घटनास्थल और अस्पताल पहुंचे। एसएसपी ने घायल थाना प्रभारी का हालचाल जाना और उनके साहस की सराहना की। उन्होंने बताया कि बदमाशों के खिलाफ देहरादून पुलिस एनकाउंटर की यह कार्रवाई आत्मरक्षा में की गई है।

एसएसपी प्रमेंद्र डोबाल ने मीडिया को बताया:

“बदमाशों ने पहले एक नागरिक को निशाना बनाया और फिर पुलिस टीम पर जानलेवा हमला किया। हमारी टीम ने बहादुरी का परिचय दिया है। एक अपराधी मारा गया है, जबकि फरार अन्य बदमाशों की तलाश के लिए पूरे जिले की घेराबंदी कर दी गई है। सभी बॉर्डर चेकपोस्ट पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।”

फरार बदमाशों के लिए कॉम्बिंग ऑपरेशन जारी

प्रेमनगर के जंगलों में फरार बदमाशों की तलाश के लिए पुलिस ने बड़े पैमाने पर सर्च ऑपरेशन (कॉम्बिंग) शुरू किया है। ड्रोन कैमरों और डॉग स्क्वायड की मदद ली जा रही है। चूंकि बदमाशों की कार गुजरात नंबर की है, इसलिए पुलिस अंतरराज्यीय गिरोह की संलिप्तता से भी इनकार नहीं कर रही है। जिले के सभी प्रवेश द्वारों, बैरियरों और नाकों पर संदिग्धों की तलाशी ली जा रही है।

दहशत में इलाका, पुलिस की सतर्कता बढ़ी

इस घटना के बाद प्रेमनगर और पौंधा क्षेत्र के स्थानीय निवासियों में दहशत का माहौल है। हालांकि, पुलिस की त्वरित कार्रवाई और एनकाउंटर के बाद जनता में पुलिस के प्रति विश्वास भी बढ़ा है। पुलिस ने नागरिकों से अपील की है कि यदि वे किसी भी संदिग्ध व्यक्ति या वाहन को देखें, तो तुरंत कंट्रोल रूम को सूचित करें।

देहरादून में हुई यह मुठभेड़ दर्शाती है कि अपराधियों के हौसले बुलंद हैं, लेकिन पुलिस भी मुंहतोड़ जवाब देने के लिए तैयार है। थाना प्रभारी नरेश राठौर का घायल होना और जवाबी कार्रवाई में बदमाश का मारा जाना, राजधानी में कानून व्यवस्था की चुनौतियों को उजागर करता है। अब देखना यह होगा कि फरार अपराधी कितनी जल्दी कानून के शिकंजे में आते हैं।

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