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पिथौरागढ़ में ट्रेकर्स के लिए पंजीकरण अनिवार्य, आदि कैलाश मार्ग पर फर्जीवाड़ा पकड़ने के बाद प्रशासन सख्त

पिथौरागढ़: उत्तराखंड के सीमांत और सामरिक दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील जनपद पिथौरागढ़ में साहसिक पर्यटन और पर्वतारोहण को लेकर प्रशासन ने एक बड़ा और अभूतपूर्व निर्णय लिया है। हिमालय की दुर्गम चोटियों, ग्लेशियरों और घाटियों में आने वाले देशी-विदेशी पर्यटकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए अब जिला प्रशासन ने सभी ट्रेकिंग मार्गों पर अग्रिम पंजीकरण को पूर्णतः अनिवार्य कर दिया है। यह कदम न केवल आपदा की स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्यों को गति देने के लिए उठाया गया है, बल्कि सीमांत क्षेत्रों में अनियंत्रित और अवैध पर्यटन गतिविधियों पर लगाम लगाने की दिशा में भी एक मील का पत्थर साबित होगा। हाल ही में मौसम के अप्रत्याशित मिजाज के कारण उत्पन्न हुईं चुनौतियों को देखते हुए प्रशासन अब किसी भी प्रकार की कोताही बरतने के मूड में नहीं है।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, पिथौरागढ़ जिले में विश्व प्रसिद्ध मिलम ग्लेशियर, रालम, सुंदरढूंगा, नामिक, हंसलिंग, दारमा वैली, पंचाचूली बेस कैंप, नंदा देवी ईस्ट बेस कैंप, नाभीढांग, लिपुलेख पास, स्यालो बेली और ब्योली टॉप समेत दर्जनों ऐसे ट्रेकिंग मार्ग हैं, जो साहसिक प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। अत्यधिक ऊंचाई और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों वाले इन क्षेत्रों में मौसम पलक झपकते ही बदल जाता है। भारी बर्फबारी, भूस्खलन और क्लाउड बर्स्ट जैसी प्राकृतिक आपदाओं के समय यदि ट्रेकर्स और पर्वतारोहण दलों की पूर्व सूचना प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं होती, तो उन तक समय पर सहायता पहुंचाना लगभग असंभव हो जाता है। इसी गंभीर खाई को पाटने के लिए अब पिथौरागढ़ ट्रेकिंग पंजीकरण की व्यवस्था को धरातल पर कड़ाई से लागू किया जा रहा है।

“रजिस्ट्रेशन की यह नई व्यवस्था किसी भी प्रकार की आपात या आपदा की स्थिति में ट्रेकर्स की जीवन रक्षा और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई है। यदि कोई भी टूर ऑपरेटर या ट्रेवल एजेंसी बिना पूर्व सूचना और बिना अनिवार्य पंजीकरण के किसी दल को ट्रेकिंग पर भेजती है और वहां कोई अप्रिय घटना घटित होती है, तो इसकी संपूर्ण जिम्मेदारी संबंधित टूर ऑपरेटर की तय की जाएगी।”  कीर्ती चंद्र आर्य, जिला पर्यटन विकास अधिकारी, पिथौरागढ़

कड़ी कानूनी कार्रवाई की चेतावनी और जवाबदेही तय

जिला पर्यटन प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि केवल जिम्मेदारी तय करना ही काफी नहीं है, बल्कि नियमों की अनदेखी करने वाले ऑपरेटरों के खिलाफ नियमानुसार आवश्यक और कठोर कानूनी कार्रवाई भी अमल में लाई जाएगी। नए नियमों के अंतर्गत, ट्रेकिंग या पर्वतारोहण पर जाने वाले प्रत्येक दल को भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (IMD) और राज्य आपदा प्रबंधन विभाग (SDMA) द्वारा समय-समय पर जारी की जाने वाली मौसम संबंधी चेतावनियों, बुलेटिनों और दिशा-निर्देशों का अक्षरशः पालन करना होगा। यदि मौसम विभाग किसी क्षेत्र विशेष के लिए रेड या ऑरेंज अलर्ट जारी करता है, तो उस दौरान ट्रेकिंग गतिविधियों को स्वतः ही निलंबित माना जाएगा और किसी भी दल को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी जाएगी।

प्रशासन ने इस पंजीकरण प्रक्रिया को सुगम और पारदर्शी बनाने के लिए डिजिटल माध्यम का सहारा लिया है। अब कोई भी पर्यटक, ट्रेकर या टूर ऑपरेटर आधिकारिक ई-मेल आईडी tourismpithoragarh@gmail.com पर अपने दल की विस्तृत जानकारी भेजकर एडवांस बुकिंग और रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया को पूरा कर सकता है। इस जानकारी में दल के प्रत्येक सदस्य का पूरा नाम, स्थाई और अस्थाई पता, सक्रिय मोबाइल नंबर, आपातकालीन संपर्क नंबर, आयु तथा आधिकारिक पहचान पत्र (जैसे आधार संख्या/पहचान पत्र का विवरण) शामिल होना अनिवार्य है। यह समस्त डेटा संबंधित क्षेत्र के उपजिलाधिकारी (SDM), वन विभाग और पर्यटन विभाग को यात्रा शुरू होने से पूर्व उपलब्ध कराना अनिवार्य होगा ताकि आवश्यकता पड़ने पर तत्काल अंतर-विभागीय समन्वय स्थापित किया जा सके।

आदि कैलाश मार्ग पर परिवहन विभाग का बड़ा एक्शन: दिल्ली की कार सीज

एक तरफ जहां पर्यटन विभाग ट्रेकिंग रूटों को सुरक्षित बनाने में जुटा है, वहीं दूसरी तरफ परिवहन विभाग ने आदि कैलाश और ओम पर्वत यात्रा मार्ग पर तीर्थयात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक व्यापक और सघन चेकिंग अभियान छेड़ दिया है। सीमांत क्षेत्र में धड़ल्ले से चल रहे अवैध वाहन संचालन और वाणिज्यिक नियमों के उल्लंघन पर अंकुश लगाने के लिए एआरटीओ (प्रवर्तन) शिवांश कांडपाल के नेतृत्व में प्रवर्तन दल ने यात्रा मार्ग के विभिन्न संवेदनशील पॉइंटों पर नाकेबंदी कर वाहनों की गहन जांच की। इस अभियान के दौरान एक ऐसा मामला सामने आया जिसने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के कान खड़े कर दिए।

परिवहन विभाग की कार्रवाई के मुख्य बिंदु:

  • अवैध व्यावसायिक उपयोग: दिल्ली पंजीकरण की एक निजी (प्राइवेट) कार को आदि कैलाश यात्रा पर सवारियां ले जाते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया।

  • भारी वित्तीय अनियमितता: यात्रियों से टूर ऑपरेटर द्वारा गाड़ी के बदले ₹32,000 की मोटी रकम वसूली गई थी, जबकि वाहन के पास कोई वैध कॉन्ट्रैक्ट कैरिज परमिट नहीं था।

  • फर्जी दस्तावेज का खेल: जांच के दौरान चालक ने टीम को भ्रमित करने के लिए फोटोशॉप से निर्मित एक फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस पेश किया।

  • सख्त आर्थिक दंड: वाहन को तत्काल प्रभाव से सीज करते हुए वाहन स्वामी और चालक पर विभिन्न गंभीर धाराओं के तहत ₹35,000 का जुर्माना लगाया गया।

एआरटीओ प्रवर्तन शिवांश कांडपाल ने मामले की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि निजी वाहनों का व्यावसायिक उपयोग न केवल राज्य के राजस्व को चूना लगाता है, बल्कि यात्रियों की सुरक्षा को भी अत्यधिक खतरे में डालता है क्योंकि इन वाहनों का कोई आधिकारिक फिटनेस टेस्ट या कमर्शियल बीमा नहीं होता है। इसके अलावा, चालक द्वारा फर्जी ड्राइविंग लाइसेंस का उपयोग करना एक गंभीर आपराधिक कृत्य है, जिसके खिलाफ परिवहन विभाग पुलिस के माध्यम से भी कानूनी शिकंजा कसने की तैयारी कर रहा है। चेकिंग के दौरान एक अन्य वाहन को भी गंभीर अनियमितताओं के चलते मौके पर ही सीज किया गया, जबकि नियमों का उल्लंघन करने वाले कुल 19 वाहनों के खिलाफ विभिन्न धाराओं में चालान की सख्त कार्रवाई की गई है।

सुरक्षित और सुव्यवस्थित पर्यटन ही उत्तराखंड का भविष्य

पिथौरागढ़ में बैक-टू-बैक हुई इन कार्रवाइयों और नए कड़े नियमों के लागू होने से स्थानीय पर्यटन व्यवसायियों और देश भर से आने वाले साहसिक पर्यटकों के बीच एक स्पष्ट संदेश गया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि उत्तराखंड के सीमांत जिलों में इको-टूरिज्म और एडवेंचर टूरिज्म की अपार संभावनाएं हैं, लेकिन इन्हें अनियंत्रित छोड़ देना किसी बड़ी मानवीय त्रासदी को आमंत्रण देने जैसा है। पिथौरागढ़ ट्रेकिंग पंजीकरण की यह अनिवार्य व्यवस्था आने वाले समय में आपदा प्रबंधन में बेहद मददगार साबित होगी, क्योंकि प्रशासन के पास हर एक पर्यटक की सटीक लोकेशन और विवरण मौजूद रहेगा।

पर्यटन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने संयुक्त रूप से अपील की है कि उत्तराखंड आने वाले सभी श्रद्धालु और साहसिक टूरिस्ट केवल सरकार द्वारा पंजीकृत टूर ऑपरेटरों, वैध कॉन्ट्रैक्ट परमिट वाले वाहनों और आधिकारिक गाइडों की ही सेवाएं लें। किसी भी सस्ते प्रलोभन या अवैध ऑपरेटरों के चक्कर में आकर अपनी जान को जोखिम में न डालें। प्रशासन का साफ कहना है कि आने वाले दिनों में यह चेकिंग अभियान और अधिक तीव्र किया जाएगा, तथा नियमों को तोड़ने वालों के प्रति ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अपनाई जाएगी।

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