
पिथौरागढ़। सीमांत जनपद पिथौरागढ़ के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में मौसम के मिजाज एक बार फिर बदल गए हैं। अप्रैल के अंतिम सप्ताह में, जहां मैदानी इलाके भीषण गर्मी की तपिश झेल रहे हैं, वहीं उत्तराखंड के इस सीमांत जिले की चोटियों ने बर्फ की सफेद चादर ओढ़ ली है। धारचूला की व्यास व दारमा घाटी से लेकर मुनस्यारी के मिलम तक बुधवार को हुई ताज़ा बर्फबारी ने न केवल तापमान में भारी गिरावट ला दी है, बल्कि आगामी पर्यटन सीजन और आदि कैलाश यात्रा को देखते हुए प्रशासन की चुनौतियों को भी बढ़ा दिया है।
व्यास और दारमा घाटी में हिमपात का दौर जारी
बुधवार की सुबह से ही उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बादलों की आवाजाही शुरू हो गई थी। दोपहर होते-होते मौसम ने करवट बदली और प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों—नाबि, कुटी, गुंजी और कालापानी सहित आदि कैलाश क्षेत्र में हल्की से मध्यम बर्फबारी दर्ज की गई। आंकड़ों की दृष्टि से देखें तो यह इस सीजन की असामान्य घटना है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, दारमा घाटी में इस साल की यह 15वीं और व्यास घाटी में 10वीं बर्फबारी है।
मुनस्यारी की बात करें तो पंचाचूली की पांचों चोटियां, राजरंभा और मिलम ग्लेशियर क्षेत्र पूरी तरह हिमपात की आगोश में हैं। इस पिथौरागढ़ उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फबारी ने समूचे जिले के तापमान को प्रभावित किया है, हालांकि जिला मुख्यालय में दिन भर धूप खिली रही और मौसम सामान्य बना रहा।
आदि कैलाश यात्रा पर मौसम का साया
महत्वपूर्ण बात यह है कि मात्र दो दिन बाद ही प्रसिद्ध ‘आदि कैलाश यात्रा’ का विधिवत शुभारंभ होने जा रहा है। ऐसे में ऐन वक्त पर हुई इस बर्फबारी ने तीर्थयात्रियों और पर्यटन व्यवसायियों के बीच चिंता और उत्साह दोनों पैदा कर दिए हैं। प्रशासन के लिए सबसे बड़ी चुनौती उच्च ऊंचाई वाले रास्तों को सुचारू रखना और यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।
“पर्यटन सीजन और आदि कैलाश यात्रा को देखते हुए आपदा प्रबंधन विभाग पूरी तरह मुस्तैद है। हमने सभी अधिकारियों को 24×7 अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं ताकि किसी भी आकस्मिक स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।” – योगेंद्र सिंह, अपर जिलाधिकारी, पिथौरागढ़
प्रशासनिक सतर्कता: अधिकारियों की छुट्टियां रद्द, मोबाइल ऑन रखने के निर्देश
बदलते मौसम और पर्यटकों की बढ़ती संख्या को देखते हुए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अख्तियार किया है। अपर जिलाधिकारी योगेंद्र सिंह ने स्पष्ट किया है कि ट्रेकिंग और भ्रमण के लिए आने वाले पर्यटकों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है। प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:
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क्षेत्रीय उपस्थिति: राजस्व, ग्राम विकास और पंचायत अधिकारियों को अपने कार्यक्षेत्र (HQ) में डटे रहने के आदेश दिए गए हैं।
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संचार व्यवस्था: सभी संबंधित कर्मचारियों और अधिकारियों को अपने मोबाइल फोन हर समय ऑन रखने को कहा गया है ताकि सूचनाओं का आदान-प्रदान निर्बाध रूप से हो सके।
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पुलिस व वायरलेस: पुलिस बल को थाना-चौकियों में आपदा प्रबंधन उपकरणों और वायरलेस सेटों को दुरुस्त रखने के निर्देश दिए गए हैं।
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सड़क प्रबंधन: बीआरओ (BRO) और लोक निर्माण विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि यदि बर्फबारी या भूस्खलन के कारण सड़कें बंद होती हैं, तो उन्हें तत्काल युद्ध स्तर पर खोला जाए।
जलवायु परिवर्तन या प्रकृति का चक्र?
इस साल मौसम का पैटर्न काफी विचित्र रहा है। जहां जनवरी और फरवरी के महीनों में पहाड़ों पर उम्मीद के मुताबिक बर्फबारी नहीं हुई थी, वहीं मार्च और अप्रैल के महीनों में कुदरत ने इसकी भरपाई कर दी है। 29 अप्रैल तक जारी इस बर्फबारी ने पर्यावरणविदों का ध्यान भी अपनी ओर खींचा है। उच्च हिमालयी क्षेत्रों में बार-बार हो रही बर्फबारी से ग्लेशियरों के स्वास्थ्य के लिए तो यह शुभ संकेत है, लेकिन कृषि और बागवानी (विशेषकर सेब की खेती) के लिए यह चुनौतीपूर्ण साबित हो सकता है।
पर्यटकों के लिए एडवाइजरी
पिथौरागढ़ और मुनस्यारी की ओर रुख कर रहे पर्यटकों को सलाह दी गई है कि वे अपनी यात्रा की योजना मौसम विभाग के पूर्वानुमान को देखकर ही बनाएं। ट्रेकिंग पर जाने वाले समूहों को अपने साथ पर्याप्त गर्म कपड़े, दवाइयां और आवश्यक रसद रखने की हिदायत दी गई है। पिथौरागढ़ उच्च हिमालयी क्षेत्र बर्फबारी के कारण ऊंचाई वाले रास्तों पर फिसलन बढ़ सकती है, इसलिए अनुभवी गाइडों के साथ ही यात्रा करें।
सीमांत जिले में कुदरत का यह रूप जितना मनमोहक है, उतना ही चुनौतीपूर्ण भी। एक ओर जहां बर्फ से लदी चोटियां पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन के कंधों पर सुरक्षा की भारी जिम्मेदारी है। अब सभी की निगाहें आदि कैलाश यात्रा के सुचारू संचालन पर टिकी हैं, जो इस क्षेत्र की आर्थिकी और धार्मिक आस्था का मुख्य केंद्र है।



