
हफ्ते के दूसरे कारोबारी दिन भारतीय शेयर बाजार की तेजी पर ब्रेक लग गया और बाजार गिरावट के साथ बंद हुआ। वैश्विक स्तर पर बढ़ती अनिश्चितता और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल का सीधा असर घरेलू बाजार पर देखने को मिला। दिनभर बिकवाली के दबाव में रहने के बाद BSE सेंसेक्स 416 अंकों की गिरावट के साथ 76,887 के स्तर पर बंद हुआ, जबकि NSE निफ्टी 50 भी 0.33% फिसलकर 24,013 के आसपास बंद हुआ।
मंगलवार सुबह बाजार की शुरुआत ही कमजोरी के साथ हुई थी। शुरुआती कारोबार में निवेशकों ने सतर्क रुख अपनाया और बिकवाली शुरू कर दी। सेंसेक्स करीब 265 अंक गिरकर 77,038 के स्तर पर खुला, वहीं निफ्टी भी लगभग 60 अंकों की गिरावट के साथ 24,032 के स्तर पर कारोबार करता नजर आया। बैंकिंग शेयरों में भारी दबाव देखने को मिला, जिससे निफ्टी बैंक इंडेक्स में आधे प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई।
आज के कारोबार में सेक्टरवार प्रदर्शन मिला-जुला रहा। बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विसेज, फार्मा और हेल्थकेयर सेक्टर में कमजोरी देखी गई, जिससे बाजार पर दबाव बना रहा। वहीं दूसरी ओर एनर्जी, डिफेंस, मेटल और मीडिया सेक्टर में खरीदारी का माहौल बना रहा, जिससे इन क्षेत्रों के शेयरों ने बाजार को कुछ हद तक संभालने की कोशिश की। खास बात यह रही कि मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में निवेशकों की दिलचस्पी बनी रही। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 0.26% की बढ़त के साथ 60,405 के पार पहुंच गया, जो बाजार में चुनिंदा मजबूती को दर्शाता है।
अगर टॉप गेनर्स की बात करें तो ओएनजीसी, अदाणी एंटरप्राइजेज, कोल इंडिया, रिलायंस और नेस्ले इंडिया जैसे शेयरों में अच्छी खरीदारी देखने को मिली। खासतौर पर ओएनजीसी में करीब 5% से ज्यादा की तेजी दर्ज की गई, जिसका कारण कच्चे तेल की कीमतों में उछाल माना जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ एक्सिस बैंक, मारुति, एचसीएल टेक, श्रीराम फाइनेंस और इंडिगो जैसे शेयरों में गिरावट देखने को मिली, जिसने बाजार की कमजोरी को और बढ़ाया।
इस गिरावट की सबसे बड़ी वजह वैश्विक स्तर पर बढ़ता तनाव है। अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट खोलने का प्रस्ताव दिया था, लेकिन अमेरिका ने इसे ठुकरा दिया। अमेरिका का कहना है कि परमाणु कार्यक्रम और समुद्री सुरक्षा दोनों मुद्दों का समाधान एक साथ होना चाहिए। इस कूटनीतिक टकराव के कारण वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ गई है।
इस तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है। ब्रेंट क्रूड की कीमत 109 डॉलर प्रति बैरल और WTI क्रूड 97 डॉलर प्रति बैरल के आसपास पहुंच गया है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारत जैसे आयातक देश के लिए चिंता का विषय हैं, क्योंकि इससे महंगाई बढ़ने और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ने की आशंका रहती है।
एशियाई बाजारों में भी आज मिला-जुला रुख देखने को मिला। टोक्यो, शंघाई और हांगकांग के बाजार गिरावट के साथ बंद हुए, जबकि सोल और बैंकॉक के बाजारों में तेजी दर्ज की गई। वहीं अमेरिकी बाजारों की बात करें तो सोमवार को डाओ जोन्स में गिरावट रही, जबकि नैस्डैक हल्की बढ़त के साथ बंद हुआ था।
कुल मिलाकर, वैश्विक संकेतों और कच्चे तेल की कीमतों में उछाल ने भारतीय शेयर बाजार की दिशा तय की। आने वाले दिनों में बाजार की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम और कच्चे तेल की कीमतों पर निर्भर करेगी। निवेशकों को फिलहाल सतर्क रहने और सोच-समझकर निवेश करने की सलाह दी जा रही है।



