ग्वालियर/शिवपुरी/मिर्जापुर। सरकारी तंत्र में भ्रष्टाचार की जड़ें कितनी गहरी हैं, इसकी एक बानगी मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश से सामने आई दो बड़ी गिरफ्तारियों ने पेश की है। मध्य प्रदेश में जहां ‘कौन बनेगा करोड़पति’ (KBC) जैसे प्रतिष्ठित मंच पर अपनी मेधा का लोहा मनवा चुकी एक महिला तहसीलदार को करोड़ों के घोटाले में जेल की सलाखों के पीछे भेज दिया गया है, वहीं उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक जूनियर इंजीनियर को रंगे हाथों रिश्वत लेते हुए दबोचा गया है।
केबीसी की ‘स्टार’ तहसीलदार पर करोड़ों का दाग
मध्य प्रदेश के प्रशासनिक हलकों में उस वक्त हड़कंप मच गया जब पुलिस ने ग्वालियर से तहसीलदार अमृता सिंह तोमर को गिरफ्तार किया। अमृता सिंह तोमर केवल एक प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि एक राष्ट्रीय स्तर की पहचान रखने वाली शख्सियत हैं। उन्होंने मशहूर टीवी शो ‘कौन बनेगा करोड़पति’ में प्रतिभागी के तौर पर हिस्सा लिया था और अपनी बुद्धिमत्ता के दम पर 50 लाख रुपये की बड़ी राशि जीती थी।
अमृता सिंह तोमर पर साल 2021 में श्योपुर जिले की बड़ौदा तहसील में तैनाती के दौरान 2.5 करोड़ रुपये के ‘बाढ़ राहत घोटाले’ में संलिप्त होने का गंभीर आरोप है। जांच में सामने आया कि आपदा के समय प्रभावितों के लिए आई राहत राशि के वितरण में भारी अनियमितताएं बरती गईं। अदालत में पेशी के बाद उन्हें शिवपुरी जेल भेज दिया गया है। एक समय में करोड़ों देशवासियों के लिए प्रेरणा बनीं अमृता का इस तरह भ्रष्टाचार के दलदल में फंसना प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है।
बाढ़ पीड़ितों के हक पर ‘डाका’: क्या है पूरा मामला?
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला उस समय का है जब मध्य प्रदेश के कई हिस्से भीषण बाढ़ की चपेट में थे। शासन द्वारा पीड़ितों की मदद के लिए करोड़ों रुपये का फंड जारी किया गया था। आरोप है कि तहसीलदार अमृता सिंह तोमर और उनके सहयोगियों ने कागजों में फर्जीवाड़ा कर राहत राशि का बंदरबांट किया।
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आरोप: अपात्र लोगों को लाभ पहुंचाना और सरकारी धन का गबन।
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कार्रवाई: लंबे समय से चल रही जांच के बाद पर्याप्त साक्ष्य मिलने पर ग्वालियर से गिरफ्तारी।
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वर्तमान स्थिति: फिलहाल आरोपी महिला अधिकारी शिवपुरी जेल में न्यायिक हिरासत में हैं और मामले की गहनता से पड़ताल की जा रही है।
मिर्जापुर: 1 लाख की रिश्वत लेते जूनियर इंजीनियर गिरफ्तार
भ्रष्टाचार के खिलाफ दूसरी बड़ी कार्रवाई उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में हुई। यहां भ्रष्टाचार रोधी दल (Anti-Corruption Team) ने देहात कोतवाली क्षेत्र में जाल बिछाकर सिंचाई विभाग के एक जूनियर इंजीनियर (JE) को रंगे हाथों गिरफ्तार किया।
बाणसागर परियोजना में भ्रष्टाचार का खेल सिंचाई विभाग की ‘बाणसागर परियोजना’ में तैनात कनिष्ठ अभियंता मुसाफिर सिंह यादव पर एक ठेकेदार ने गंभीर आरोप लगाए थे। ठेकेदार का कहना था कि उसके द्वारा पूर्ण किए गए कार्यों के बिल स्वीकृत करने के बदले जेई मुसाफिर सिंह एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहे थे।
भ्रष्टाचार रोधी दल ने बुधवार को योजनाबद्ध तरीके से छापेमारी की और जेई को एक लाख रुपये की नकदी स्वीकार करते हुए गिरफ्तार कर लिया। आरोपी के खिलाफ ‘भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम’ की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
सिस्टम की साख पर सवाल
इन दोनों मामलों ने एक बार फिर यह साबित कर दिया है कि भ्रष्टाचार किसी खास पद या पहचान का मोहताज नहीं है। एक ओर जहां केबीसी फेम अधिकारी अपनी छवि को बरकरार रखने में नाकाम रहीं, वहीं दूसरी ओर बुनियादी विकास कार्यों से जुड़े इंजीनियर भी कमीशनखोरी के मोह से बच नहीं पा रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे हाई-प्रोफाइल मामलों में सख्त कार्रवाई न केवल दोषियों को सजा दिलाने के लिए जरूरी है, बल्कि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक कड़ा संदेश है कि कानून से ऊपर कोई नहीं है।



