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असम चुनाव 2026: सीएम हिमंता का मास्टरस्ट्रोक, बोले- “असम की भूमि पर केवल स्वदेशी का हक, सत्ता में लौटे तो…”

गुवाहाटी/बजाली: असम विधानसभा चुनाव 2026 की आहट के साथ ही राज्य का सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है। सत्ता में वापसी के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपनी पूरी ताकत झोंक दी है। इसी कड़ी में मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने गुरुवार को बजाली में एक विशाल जनसभा को संबोधित करते हुए अब तक का सबसे बड़ा चुनावी दांव खेल दिया है। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट शब्दों में घोषणा की है कि यदि भाजपा दोबारा सत्ता में आती है, तो राज्य की 5 लाख बीघा सरकारी जमीन को अतिक्रमणकारियों के चंगुल से मुक्त कराया जाएगा।

‘अतिक्रमणकारियों को सिखाया सबक, अब होगा पूर्ण सफाया’

बजाली की रैली में उमड़ी भारी भीड़ को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सरमा ने अपने पिछले पांच वर्षों के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड पेश किया। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने पिछले पांच वर्षों में दृढ़ इच्छाशक्ति दिखाते हुए 1.5 लाख बीघा जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया है। उन्होंने दावा किया कि इस कार्रवाई से स्वदेशी समुदायों पर अतिक्रमणकारियों का प्रभुत्व ‘काफी हद तक कम’ हुआ है।

सीएम हिमंता ने कड़े लहजे में कहा, पिछले पांच वर्षों में हमने केवल ट्रेलर दिखाया है। हमारा अगला लक्ष्य 5 लाख बीघा सरकारी जमीन को पूरी तरह से अतिक्रमण मुक्त करना है। हम यह सुनिश्चित करेंगे कि असम की माटी पर केवल यहां के स्वदेशी लोगों का ही अधिकार रहे।

‘मिया’ समुदाय और घुसपैठ पर तीखा प्रहार

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान अतिक्रमणकारियों के लिए ‘मिया’ शब्द का प्रयोग करते हुए तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि अधिकांश अतिक्रमणकारी वही लोग हैं जिन्होंने अवैध तरीके से सरकारी संपत्तियों पर कब्जा किया है। उन्होंने स्वदेशी असमिया लोगों की पहचान को सर्वोपरि बताते हुए कहा कि भाजपा ‘जाति, माटी और भेटी’ (लोग, भूमि और आधार) के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है।

सरमा ने दो टूक कहा, मूल आबादी के अस्तित्व की रक्षा के लिए अवैध प्रवासियों के खिलाफ सख्ती बरतना हमारी प्राथमिकता है। इस मुद्दे पर हम किसी भी तरह का समझौता नहीं करेंगे। असम की जमीन यहां के मूल निवासियों की विरासत है और इसे किसी भी कीमत पर हड़पने नहीं दिया जाएगा।”

गौरव गोगोई और कांग्रेस पर साधा निशाना

राजनीतिक हमले को धार देते हुए मुख्यमंत्री ने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष गौरव गोगोई को भी निशाने पर लिया। उन्होंने गोगोई की ‘ग्रेटर असम’ की अवधारणा को सिरे से खारिज कर दिया। सरमा ने आरोप लगाया कि कांग्रेस और गौरव गोगोई अप्रत्यक्ष रूप से यह संदेश दे रहे हैं कि असम के लोगों को अवैध घुसपैठियों के साथ मिल-जुलकर रहना होगा, जो असम की संस्कृति के लिए खतरनाक है।

उन्होंने आरोप लगाया, कांग्रेस ने हमेशा से ही वोट बैंक की राजनीति के चलते मूल असमिया लोगों की तुलना में ‘मिया’ समुदाय को अधिक महत्व दिया है। वे नए ग्रेटर असम के नाम पर राज्य की जनसांख्यिकी से समझौता करना चाहते हैं, जिसे भाजपा कभी स्वीकार नहीं करेगी।”

गठबंधन को बताया अटूट, मतदाताओं से की अपील

चुनावी रैली के दौरान मुख्यमंत्री ने भाजपा और असम गण परिषद (अगप) के गठबंधन को ‘अविभाज्य’ करार दिया। उन्होंने मतदाताओं से बजाली में अगप उम्मीदवार धर्मेश्वर रॉय का पुरजोर समर्थन करने का आह्वान किया। इसके बाद उन्होंने पड़ोसी बारपेटा निर्वाचन क्षेत्र में भी अगप प्रत्याशी दीपक कुमार दास के लिए प्रचार किया। गौरतलब है कि बारपेटा में कांग्रेस उम्मीदवार महानंदा सरकार का नामांकन खारिज होने के बाद समीकरण काफी बदल गए हैं, जिसका लाभ भाजपा-अगप गठबंधन उठाने की कोशिश में है।

चुनाव कार्यक्रम: 9 अप्रैल को परीक्षा, 4 मई को परिणाम

असम की 126 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनावी रणभेरी बज चुकी है। राज्य में 09 अप्रैल को मतदान होना है, जिसके लिए सभी दलों ने अपनी पूरी मशीनरी सक्रिय कर दी है। चुनाव के नतीजे 04 मई को घोषित किए जाएंगे।

जानकारों का मानना है कि हिमंता बिस्वा सरमा द्वारा जमीन और पहचान (Identity) के मुद्दे को उठाना एक सोची-समझी रणनीति है, जो ध्रुवीकरण के साथ-साथ स्थानीय भावनाओं को जोड़ने का काम करेगी। ‘5 लाख बीघा जमीन’ का वादा ग्रामीण क्षेत्रों में एक बड़ा मुद्दा बन सकता है, जहां भूमि विवाद और अतिक्रमण हमेशा से संवेदनशील विषय रहे हैं।

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