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The Hill India > Blog > उत्तराखंड > माफियाओं की अब खैर नहीं! उत्तराखंड वन विभाग ने कसी कमर; आधुनिक हथियारों और राइफलों से लैस होंगे वनकर्मी
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माफियाओं की अब खैर नहीं! उत्तराखंड वन विभाग ने कसी कमर; आधुनिक हथियारों और राइफलों से लैस होंगे वनकर्मी

The Hill India News
Last updated: March 27, 2026 2:57 am
The Hill India News
Published: March 27, 2026
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देहरादून: उत्तराखंड के बेशकीमती वनों की सुरक्षा और नदियों में बेखौफ चल रहे अवैध खनन पर लगाम लगाने के लिए प्रदेश का वन विभाग अब आर-पार के मूड में है। दुर्गम जंगलों में तस्करों और मैदानी इलाकों में खनन माफियाओं के बुलंद हौसलों को पस्त करने के लिए विभाग अपने फ्रंटलाइन वॉरियर्स यानी वनकर्मियों को अत्याधुनिक हथियारों से लैस करने जा रहा है। लंबे समय से पुराने पड़ चुके हथियारों और संसाधनों की कमी से जूझ रहे वनकर्मियों के लिए शासन स्तर पर एक बड़ा प्रस्ताव भेजा गया है।

Contents
माफियाओं से सीधा टकराव: संसाधनों की कमी बनी थी बाधाशासन को भेजा 59 लाख का प्रस्ताव: ये हथियार होंगे शामिलनियमों में शिथिलता: लाइसेंस प्रक्रिया को सुगम बनाने की तैयारी“सरकार वनकर्मियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर”: सुबोध उनियालक्यों जरूरी है यह बदलाव?भविष्य की राह: मजबूत सुरक्षा तंत्र की ओर

माफियाओं से सीधा टकराव: संसाधनों की कमी बनी थी बाधा

उत्तराखंड का भौगोलिक ढांचा ऐसा है कि यहाँ वन संपदा की रक्षा करना किसी चुनौती से कम नहीं है। विशेषकर पश्चिमी वृत्त (Western Circle) जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में लकड़ी तस्करों और अवैध खनन करने वालों का नेटवर्क काफी सक्रिय रहता है। अक्सर देखा गया है कि जब वनकर्मी इन माफियाओं को रोकने की कोशिश करते हैं, तो उनका सामना संगठित गिरोहों से होता है जो आधुनिक हथियारों और वाहनों से लैस होते हैं।

इसके विपरीत, हमारे वनकर्मियों के पास या तो लाठियां होती हैं या दशकों पुरानी थ्री-नॉट-थ्री राइफल्स, जो कई बार मौके पर धोखा दे जाती हैं। संसाधनों के इसी असंतुलन के कारण वनकर्मियों की सुरक्षा हमेशा खतरे में रहती है। हाल ही में एक एसडीओ के साथ मारपीट और वनकर्मियों को बंधक बनाए जाने की घटनाओं ने विभाग के भीतर सुरक्षा को लेकर गहरी चिंता पैदा कर दी थी।

शासन को भेजा 59 लाख का प्रस्ताव: ये हथियार होंगे शामिल

मौजूदा चुनौतियों को देखते हुए वन विभाग ने शासन को एक विस्तृत प्रस्ताव भेजा है। इस योजना के तहत लगभग 59.41 लाख रुपये का बजट प्रस्तावित किया गया है, जिससे आधुनिक हथियार और सुरक्षा उपकरण खरीदे जाएंगे। विभाग की मांग में मुख्य रूप से निम्नलिखित हथियार शामिल हैं:

  1. 32 पिस्तौल MK-II: यह पिस्तौल अपनी सटीकता और त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाती है, जो क्लोज-रेंज कॉम्बैट में वनकर्मियों की रक्षा करेगी।

  2. 30.06 एसपी राइफल: लंबी दूरी तक मार करने वाली यह आधुनिक राइफल तस्करों के खिलाफ अभियान में गेम-चेंजर साबित होगी।

  3. अन्य सुरक्षा उपकरण: हथियारों के साथ-साथ संचार उपकरण और सुरक्षा जैकेटों की भी मांग की गई है।

नियमों में शिथिलता: लाइसेंस प्रक्रिया को सुगम बनाने की तैयारी

हथियार खरीदना तो एक प्रक्रिया है, लेकिन उन्हें फील्ड स्टाफ तक पहुंचाना दूसरी बड़ी चुनौती है। वर्तमान में वनकर्मियों को हथियारों के लाइसेंस लेने के लिए लंबी और जटिल कानूनी प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, जिसमें महीनों का समय लग जाता है।

इसी समस्या के समाधान के लिए वन विभाग अब नियमों में संशोधन की मांग कर रहा है। विभाग की कोशिश है कि पुलिस विभाग की तर्ज पर वन विभाग को भी अपने कर्मचारियों के लिए हथियार लाइसेंस जारी करने या उनके नवीनीकरण के संबंध में कुछ विशेष अधिकार दिए जाएं। इससे जरूरत के समय त्वरित रूप से हथियारों का वितरण सुनिश्चित हो सकेगा।

“सरकार वनकर्मियों की सुरक्षा के प्रति गंभीर”: सुबोध उनियाल

प्रदेश के वन मंत्री सुबोध उनियाल ने इस मामले पर स्पष्ट संदेश दिया है। उन्होंने कहा, “राज्य के वनकर्मी विषम परिस्थितियों में पूरी बहादुरी के साथ अपने कर्तव्यों का निर्वहन कर रहे हैं। हाल की कुछ घटनाएं विचलित करने वाली हैं, जहाँ खनन माफियाओं ने सरकारी कार्य में बाधा डालने का दुस्साहस किया है। सरकार उनकी सुरक्षा को लेकर पूरी तरह गंभीर है। हम न केवल उन्हें आधुनिक हथियारों से लैस कर रहे हैं, बल्कि नियमों में जरूरी बदलाव भी करेंगे ताकि वनकर्मियों का मनोबल ऊंचा रहे।”

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तराखंड की अर्थव्यवस्था और पर्यावरण के लिए ‘ग्रीन गोल्ड’ यानी वन बेहद महत्वपूर्ण हैं। अवैध खनन न केवल नदियों के पारिस्थितिकी तंत्र को बिगाड़ रहा है, बल्कि इससे राज्य के राजस्व को भी भारी चपत लग रही है। जब वनकर्मी सशक्त होंगे और उनके पास कानूनी व भौतिक सुरक्षा होगी, तभी वे प्रभावी ढंग से कार्रवाई कर पाएंगे।

एसडीओ के साथ मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद विभाग के भीतर उपजा आक्रोश अब एक ठोस नीति का रूप ले रहा है। वनकर्मियों का मानना है कि जब अपराधी आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो रक्षकों को पुराने ढर्रे पर नहीं छोड़ा जा सकता।

भविष्य की राह: मजबूत सुरक्षा तंत्र की ओर

यदि शासन इस प्रस्ताव को हरी झंडी दे देता है और नियमों में शिथिलता आती है, तो उत्तराखंड वन विभाग देश के सबसे आधुनिक वन बलों में से एक बन जाएगा। यह कदम न केवल तस्करी और अवैध खनन पर प्रभावी अंकुश लगाएगा, बल्कि वन्यजीवों के शिकार (Poaching) की घटनाओं में भी कमी लाएगा।

उत्तराखंड वन विभाग की यह नई रणनीति साफ संकेत देती है कि अब जंगलों और नदियों में माफिया राज का अंत करीब है।

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