लखनऊ: उत्तर प्रदेश की सियासत के सबसे निचले लेकिन सबसे महत्वपूर्ण पायदान ‘त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव’ को लेकर चल रहा असमंजस अब खत्म होता नजर आ रहा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के कड़े रुख और चुनाव प्रक्रिया में देरी पर जताई गई नाराजगी के बाद उत्तर प्रदेश सरकार एक्शन मोड में आ गई है। प्रदेश के पंचायती राज मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने स्पष्ट कर दिया है कि राज्य में ग्राम प्रधान, क्षेत्र पंचायत और जिला पंचायत के चुनाव जुलाई 2026 तक हर हाल में संपन्न करा लिए जाएंगे।
हाईकोर्ट का कड़ा रुख और सरकार की सफाई
बीते बुधवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायत चुनाव कराने में हो रही हीलाहवाली पर सख्त नाराजगी जाहिर की थी। कोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से तीखा सवाल पूछा था कि क्या वह 26 मई की वैधानिक समय सीमा के भीतर चुनाव कराने में सक्षम है? अदालत ने इस मामले में राज्य सरकार और निर्वाचन आयोग से विस्तृत जवाब और हलफनामा मांगा है।
अदालती सख्ती के बीच मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने मीडिया से मुखातिब होते हुए कहा, “हम अदालत के हर आदेश का अक्षरशः पालन करेंगे। सरकार की मंशा चुनाव टालने की कतई नहीं है। प्रशासनिक और प्रक्रियात्मक कारणों से जो समय लग रहा है, उसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। हमारा लक्ष्य है कि जुलाई तक नई पंचायतों का गठन हो जाए।“
ओबीसी आरक्षण: 2011 की जनगणना बनेगा आधार
यूपी पंचायत चुनाव में सबसे बड़ा पेच आरक्षण (Reservation) को लेकर फंसा हुआ था। इस पर स्थिति स्पष्ट करते हुए राजभर ने कहा कि आगामी चुनाव में ओबीसी (OBC) आरक्षण का निर्धारण 2011 की जनगणना के आधार पर ही किया जाएगा। सरकार फिलहाल किसी नई प्रक्रिया में पड़कर चुनाव को और अधिक विलंबित नहीं करना चाहती।
मंत्री ने जानकारी दी कि आरक्षण की प्रक्रिया को अंतिम रूप देने के लिए पिछड़ा वर्ग आयोग (OBC Commission) का गठन किया जा रहा है, जिस पर अगली कैबिनेट बैठक में मुहर लग जाएगी। आयोग की रिपोर्ट मिलते ही आरक्षण की अंतिम सूची जारी कर दी जाएगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि आरक्षण चक्रानुक्रम (Rotation Policy) के आधार पर तय होगा, जिससे पारदर्शिता बनी रहे।
चुनावी तैयारियों का खाका: बैलेट पेपर से लेकर वोटर लिस्ट तक
उत्तर प्रदेश में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव की प्रशासनिक तैयारियां युद्ध स्तर पर चल रही हैं। पंचायती राज विभाग के अनुसार:
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बैलेट पेपर की छपाई: चुनाव के लिए आवश्यक जिलेवार बैलेट पेपर छपकर तैयार हो चुके हैं।
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वोटर लिस्ट का प्रकाशन: अंतिम मतदाता सूची (Final Voter List) का प्रकाशन 15 अप्रैल तक होने की पूरी संभावना है।
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पदों का विवरण: ग्राम प्रधान, ग्राम पंचायत सदस्य, क्षेत्र पंचायत सदस्य (BDC), ब्लॉक प्रमुख, जिला पंचायत सदस्य और जिला पंचायत अध्यक्ष के पदों के लिए श्रेणीवार विभाजन की प्रक्रिया जारी है।
मंत्री राजभर ने आश्वस्त किया कि निर्वाचन आयोग के साथ मिलकर सरकार समयबद्ध तरीके से काम कर रही है ताकि 15 अप्रैल को मतदाता सूची आने के बाद तत्काल चुनावी अधिसूचना (Notification) जारी की जा सके।
कार्यकाल विस्तार पर पूर्णविराम
विपक्ष द्वारा सरकार पर पंचायत प्रतिनिधियों का कार्यकाल बढ़ाने के प्रयासों के आरोपों पर राजभर ने कड़ा जवाब दिया। उन्होंने कहा, “ग्राम प्रधान से लेकर जिला पंचायत अध्यक्ष तक, सभी का कार्यकाल खत्म होने की समय सीमा अलग-अलग है। लेकिन सरकार किसी की भी अवधि जुलाई से आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं है। हम चाहते हैं कि जनता द्वारा चुने गए नए प्रतिनिधि जल्द से जल्द विकास कार्यों की कमान संभालें।“
हाईकोर्ट में 25 मार्च को अगली सुनवाई
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि यदि 15 अप्रैल को अंतिम सूची आती है, तो क्या महज एक महीने के भीतर चुनाव कराना मुमकिन है? इस तकनीकी पेच पर आयोग को 25 मार्च तक हलफनामा दाखिल करना है। कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आयोग और सरकार ठोस कार्ययोजना पेश करते हैं, तो कोर्ट जुलाई तक की मोहलत दे सकता है।
यूपी पंचायत चुनाव का राजनीतिक महत्व
उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों को ‘मिनी विधानसभा’ माना जाता है। यह चुनाव न केवल ग्रामीण विकास की दिशा तय करते हैं, बल्कि आगामी लोकसभा या विधानसभा चुनावों के लिए राजनीतिक दलों के जमीनी आधार की परीक्षा भी लेते हैं। सुभासपा अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर के इस बयान ने अब ग्रामीण क्षेत्रों में चुनावी सरगर्मी तेज कर दी है। संभावित उम्मीदवार अब अपने-अपने क्षेत्रों में सक्रिय हो गए हैं और आरक्षण सूची का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं।
UP Panchayat Chunav Date को लेकर मची रार अब निर्णायक मोड़ पर है। मंत्री राजभर के बयान से साफ है कि सरकार जुलाई तक हर हाल में चुनावी प्रक्रिया पूरी कर लेना चाहती है। अब सबकी निगाहें 25 मार्च को हाईकोर्ट में होने वाली सुनवाई और पिछड़ा वर्ग आयोग के गठन पर टिकी हैं।
