By using this site, you agree to the Privacy Policy and Terms of Use.
Accept
The Hill IndiaThe Hill IndiaThe Hill India
Notification Show More
Font ResizerAa
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Reading: बंगाल चुनाव 2026: 91 लाख नामों की ‘सफाई’ ने कैसे पलट दिया सियासी खेल, SIR बना सबसे बड़ा फैक्टर?
Share
Font ResizerAa
The Hill IndiaThe Hill India
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Search
  • होम
  • फीचर्ड
  • उत्तराखंड
  • देश
  • विदेश
  • राजनीति
  • पर्यावरण
  • क्राइम
  • पर्यटन
  • शिक्षा
  • स्वास्थय
  • सामाजिक
  • स्पोर्ट्स
  • वीडियो
  • Contact Us
Have an existing account? Sign In
Follow US
The Hill India > Blog > देश > बंगाल चुनाव 2026: 91 लाख नामों की ‘सफाई’ ने कैसे पलट दिया सियासी खेल, SIR बना सबसे बड़ा फैक्टर?
देशफीचर्ड

बंगाल चुनाव 2026: 91 लाख नामों की ‘सफाई’ ने कैसे पलट दिया सियासी खेल, SIR बना सबसे बड़ा फैक्टर?

The Hill India News
Last updated: May 4, 2026 8:29 am
The Hill India News
Published: May 4, 2026
Share
SHARE

पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों ने राज्य की राजनीति में बड़ा भूचाल ला दिया है। करीब डेढ़ दशक से सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस (TMC) को इस बार जिस तरह कड़ी चुनौती मिली, उसने राजनीतिक विश्लेषकों को भी चौंका दिया। चुनाव परिणाम आने के बाद सबसे ज्यादा चर्चा जिस मुद्दे पर हो रही है, वह है निर्वाचन आयोग द्वारा चुनाव से पहले किया गया विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR (Special Intensive Revision)। इस प्रक्रिया के दौरान राज्य की मतदाता सूची से करीब 91 लाख नाम हटाए गए थे। अब यही दावा किया जा रहा है कि इस “सफाई अभियान” ने बंगाल की राजनीति का पूरा समीकरण बदल दिया।

निर्वाचन आयोग के अनुसार, मतदाता सूची से हटाए गए नामों में बड़ी संख्या ऐसे लोगों की थी जिनके नाम दो जगह दर्ज थे, जिनकी मृत्यु हो चुकी थी या जो लंबे समय से संबंधित क्षेत्र में रह ही नहीं रहे थे। हालांकि विपक्षी दलों ने इस कार्रवाई को लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम बताया, जबकि टीएमसी ने इसे राजनीतिक साजिश करार दिया। लेकिन चुनाव परिणामों ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

सबसे ज्यादा नाम जिन जिलों से हटाए गए, उनमें मुर्शिदाबाद, मालदा, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना और नदिया शामिल हैं। ये वही इलाके हैं जिन्हें लंबे समय से टीएमसी का मजबूत गढ़ माना जाता रहा है। दिलचस्प बात यह रही कि इन क्षेत्रों में इस बार बीजेपी और उसके सहयोगी दलों को अप्रत्याशित बढ़त मिली। कई सीटों पर जीत-हार का अंतर बेहद कम रहा, जबकि मतदाता सूची से हटाए गए नामों की संख्या हजारों में थी। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यही बदलाव चुनावी परिणामों का निर्णायक कारण बना।

विश्लेषकों के मुताबिक बंगाल की कई विधानसभा सीटों पर हार-जीत का अंतर सामान्य तौर पर 2 हजार से 5 हजार वोटों के बीच रहता है। ऐसे में अगर किसी सीट पर 20 से 25 हजार नाम हटते हैं, तो उसका सीधा असर चुनाव परिणाम पर पड़ना तय है। यही कारण है कि इस बार कई ऐसी सीटें, जहां टीएमसी लगातार जीतती रही थी, वहां विपक्ष ने बढ़त बना ली।

बीजेपी का आरोप लंबे समय से रहा है कि बंगाल में “फर्जी वोटिंग” और “डुप्लीकेट वोटर” चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करते रहे हैं। पार्टी नेताओं का कहना है कि SIR ने पहली बार वोटर लिस्ट को पारदर्शी बनाया और असली मतदाताओं की पहचान सुनिश्चित की। उनका दावा है कि जैसे ही कथित फर्जी नाम हटे, कई सीटों पर वास्तविक जनादेश सामने आ गया। बीजेपी इसे “लोकतंत्र की सफाई” और “जनादेश की वापसी” बता रही है।

दूसरी ओर, टीएमसी ने इस पूरे अभियान पर सवाल उठाए हैं। पार्टी का कहना है कि बड़ी संख्या में गरीब, प्रवासी और अल्पसंख्यक समुदाय के वैध मतदाताओं के नाम सूची से हटाए गए, जिससे चुनाव प्रभावित हुआ। टीएमसी नेताओं का आरोप है कि निर्वाचन आयोग ने निष्पक्षता नहीं बरती और विपक्ष के दबाव में काम किया। हालांकि आयोग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि पूरी प्रक्रिया तय नियमों और दस्तावेजी सत्यापन के आधार पर की गई थी।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बंगाल चुनाव 2026 केवल सत्ता परिवर्तन की कहानी नहीं है, बल्कि यह चुनावी प्रबंधन और मतदाता सूची की शुद्धता के महत्व को भी दर्शाता है। कई दशकों से जिन क्षेत्रों में एकतरफा वोटिंग पैटर्न देखने को मिलता था, वहां इस बार बड़ा बदलाव दर्ज किया गया। बूथ स्तर पर वोटिंग प्रतिशत और परिणामों के आंकड़े बताते हैं कि जहां ज्यादा नाम हटे, वहां सत्ता पक्ष को अधिक नुकसान हुआ।

इस चुनाव ने यह भी साबित कर दिया कि मतदाता सूची केवल एक प्रशासनिक दस्तावेज नहीं, बल्कि चुनावी राजनीति का सबसे अहम आधार है। 91 लाख नामों की “सफाई” ने बंगाल की राजनीति में ऐसा असर डाला, जिसकी कल्पना शायद किसी ने नहीं की थी। अब आने वाले दिनों में यह बहस और तेज होने वाली है कि क्या SIR वास्तव में लोकतंत्र को मजबूत करने वाला कदम था या फिर यह केवल एक राजनीतिक हथियार बन गया। लेकिन इतना तय है कि बंगाल चुनाव 2026 में SIR सबसे बड़ा और सबसे चर्चित फैक्टर बनकर उभरा है।

You Might Also Like

उत्तराखण्ड : बीजेपी ने जारी की मेयर कैंडिडेट्स की पहली लिस्ट 6 महानगरों के प्रत्याशी घोषित,
बीजेपी के गढ़ चंडीगढ़ नगर निगम में मेयर का चुनाव होगा आज, क्या इसे भेद पाएगा आप और कांग्रेस गठबंधन
निजी स्कूलों की मनमानी फीस वसूली पर नैनीताल जिला प्रशासन का बड़ा प्रहार; डीएम का सख्त आदेश- अतिरिक्त शुल्क लौटाएं या एडजस्ट करें, उल्लंघन पर 5 लाख तक जुर्माना
नई दिल्ली :कपास उत्पादन में वृद्धि और इसकी उत्पादकता देश में रोजगार वृद्धि के लिए महत्वपूर्ण: नरेंद्र सिंह तोमर
ऑपरेशन सिंदूर पर संसद में 25 घंटे की चर्चा तय, विपक्ष ने करी प्रधानमंत्री की उपस्थिति की मांग
TAGGED:BJPElection CommissionMamata BanerjeeSIRSuvendu AdhikariTMCvoter listWest Bengal
Share This Article
Facebook Email Print
Leave a Comment

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Follow US

Find US on Social Medias
FacebookLike
XFollow
YoutubeSubscribe
TelegramFollow
Popular News
देशफीचर्डराजनीति

मांजलपुर उपचुनाव में BJP की शानदार जीत: सतीश पटेल ने 30 हजार से अधिक वोटों से कांग्रेस को हराया, गुजरात में कमल फिर खिला

The Hill India News
The Hill India News
August 3, 2026
ITR Refund का इंतजार खत्म कब होगा? जानिए इनकम टैक्स रिफंड की पूरी प्रक्रिया, कितने दिनों में मिलेगा पैसा और किन वजहों से हो सकती है देरी
पप्पू यादव के भगवा प्रदर्शन पर INDIA गठबंधन में दरार! सपा ने किया किनारा, राम मंदिर मुद्दे पर विपक्ष के अलग-अलग सुर आए सामने
NEET पेपर लीक आंदोलन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: ‘छात्रों को मिलेगा न्याय, लेकिन अपराधियों को नहीं मिलेगी कोई राहत’; FIR, पुलिस कार्रवाई और जांच पर कोर्ट की बड़ी टिप्पणी
JPSC परीक्षा विवाद ने पकड़ा तूल: हजारों अभ्यर्थी सड़कों पर, परीक्षा रद्द करने से लेकर CBI जांच तक उठीं बड़ी मांगें
जंतर-मंतर पर प्रदर्शन को लेकर सुप्रीम कोर्ट गंभीर: क्या बदलेगा विरोध प्रदर्शन का केंद्र? केंद्र सरकार से मांगा जवाब
बृज भूषण शरण सिंह को बड़ी राहत: कोर्ट से बरी होने के बाद बोले— “अगर एक भी आरोप साबित होता तो खुद फांसी पर लटक जाता”
ऐतिहासिक फैसला! राष्ट्रपति मुर्मू ने एंटी-पेपर लीक कानून को दी मंजूरी, अब 2 महीने में जांच, 3 महीने में फैसला और 10 साल तक की जेल
गलत नंबर पर हो गया मोबाइल रिचार्ज? घबराएं नहीं! Airtel और Jio यूजर्स ऐसे वापस पा सकते हैं अपने पैसे, जानिए पूरा प्रोसेस
संसद के ‘भगवा प्रदर्शन’ पर कानूनी शिकंजा: राहुल गांधी, पप्पू यादव और अवधेश प्रसाद के खिलाफ केस दर्ज, धार्मिक भावनाएं आहत करने का आरोप
© The Hill India. All Rights Reserved | Developed By: Tech Yard Labs
Welcome Back!

Sign in to your account

Username or Email Address
Password

Lost your password?