
देश के पांच राज्यों — तमिलनाडु, केरल, पश्चिम बंगाल, असम और पुडुचेरी — में हुए विधानसभा चुनावों की मतगणना जारी है और शुरुआती रुझानों ने भारतीय राजनीति की तस्वीर बदलने के संकेत दे दिए हैं। कहीं सत्ता बदलती दिखाई दे रही है तो कहीं सत्ताधारी दलों को कड़ी चुनौती मिल रही है। सबसे बड़ा राजनीतिक सरप्राइज तमिलनाडु में अभिनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (TVK) के रूप में सामने आया है, जिसने शुरुआती रुझानों में ही डीएमके और एआईएडीएमके जैसी दिग्गज पार्टियों को चुनौती दे दी है। दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में बीजेपी पहली बार टीएमसी को कड़ी टक्कर देती दिखाई दे रही है। असम में बीजेपी गठबंधन बहुमत के आंकड़े को पार करता नजर आ रहा है, जबकि केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूडीएफ ने सत्ता में वापसी के मजबूत संकेत दिए हैं।
सुबह 8 बजे से शुरू हुई मतगणना के साथ ही देशभर की नजरें इन पांच राज्यों पर टिक गईं। करीब 25 करोड़ मतदाताओं वाले इन चुनावों को 2029 लोकसभा चुनाव से पहले का सबसे बड़ा राजनीतिक सेमीफाइनल माना जा रहा है। जैसे-जैसे वोटों की गिनती आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे राजनीतिक समीकरण भी बदलते दिखाई दे रहे हैं।
पश्चिम बंगाल में बीजेपी का ऐतिहासिक प्रदर्शन
पश्चिम बंगाल के शुरुआती रुझानों ने सबसे ज्यादा राजनीतिक हलचल मचाई है। लंबे समय से राज्य की सत्ता पर काबिज तृणमूल कांग्रेस को इस बार बीजेपी से सीधी और कड़ी चुनौती मिलती दिखाई दे रही है। शुरुआती राउंड में कभी टीएमसी आगे रही तो कभी बीजेपी, लेकिन बाद के रुझानों में बीजेपी ने बहुमत का आंकड़ा पार करते हुए 148 सीटों पर बढ़त बना ली।
राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के लिए भी यह चुनाव आसान नहीं दिख रहा है। भवानीपुर सीट से बीजेपी उम्मीदवार सुवेंदु अधिकारी शुरुआती राउंड में ममता बनर्जी से 1558 वोटों से आगे बताए गए। यह वही सीट है जिसे ममता बनर्जी का गढ़ माना जाता रहा है। इस बढ़त ने बंगाल की राजनीति में बड़ा संदेश दिया है।
कोलकाता स्थित बीजेपी कार्यालय के बाहर कार्यकर्ताओं ने जश्न मनाना शुरू कर दिया। ढोल-नगाड़ों और मिठाइयों के बीच कार्यकर्ता “जय श्री राम” के नारे लगाते दिखाई दिए। बीजेपी नेताओं ने इसे “बंगाल में बदलाव की शुरुआत” बताया।
बीजेपी नेता और अभिनेता रवि किशन ने कहा कि “आज बंगाल आजाद होगा। लोग खुलकर जय श्री राम बोल सकेंगे और बिना डर के दुर्गा पूजा मना सकेंगे।” उनके इस बयान ने राजनीतिक माहौल को और गर्म कर दिया।
वहीं पश्चिम बंगाल बीजेपी अध्यक्ष समिक भट्टाचार्य ने कहा कि “गंगोत्री से गंगा सागर तक सरकार बनाने का सपना आज पूरा होने जा रहा है।” उन्होंने दावा किया कि राज्य में बीजेपी की सरकार बनेगी और स्थिर सरकार बनेगी।
हालांकि टीएमसी भी लगातार संघर्ष करती दिखाई दे रही है। कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी बताया जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अंतिम नतीजे आने तक तस्वीर कई बार बदल सकती है।
मतगणना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था बेहद कड़ी रखी गई है। कोलकाता सहित कई जिलों में केंद्रीय बलों की तैनाती की गई है। मालदा कॉलेज काउंटिंग सेंटर के बाहर बख्तरबंद गाड़ियां गश्त करती दिखाई दीं। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की गई है।
इसी बीच वीवीपैट पर्चियों को लेकर भी चर्चा तेज हो गई। पश्चिम बंगाल के मुख्य चुनाव अधिकारी मनोज कुमार अग्रवाल ने कहा कि जो पर्चियां मिली हैं वे मॉक पोल की हैं और उनका वास्तविक चुनाव से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले की जांच की जा रही है।
तमिलनाडु में विजय की TVK ने बदल दिया चुनावी समीकरण
तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सबसे बड़ा नाम अभिनेता विजय और उनकी पार्टी तमिलगा वेत्री कजगम (TVK) का रहा। पहली बार विधानसभा चुनाव लड़ रही यह पार्टी शुरुआती रुझानों में सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी।
टीवीके करीब 85 सीटों पर बढ़त बनाए हुए दिखाई दी, जबकि एआईएडीएमके 61 और डीएमके 35 सीटों पर आगे चल रही थी। इन रुझानों ने राज्य की पारंपरिक राजनीति को हिलाकर रख दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि मुख्यमंत्री एमके स्टालिन खुद अपनी कोलाथुर सीट पर पीछे चल रहे थे। चुनाव आयोग के मुताबिक टीवीके उम्मीदवार वीएस बाबू करीब 2500 से अधिक वोटों से आगे बताए गए। वहीं डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन भी चेपॉक-थिरुवल्लिकेनी सीट पर टीवीके उम्मीदवार सेल्वम डी से पीछे चल रहे थे।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि विजय की लोकप्रियता और युवाओं के बीच उनकी मजबूत पकड़ ने टीवीके को अप्रत्याशित बढ़त दिलाई है। फिल्मी दुनिया से राजनीति में आए विजय ने भ्रष्टाचार विरोध, रोजगार और क्षेत्रीय गौरव को मुख्य मुद्दा बनाया था, जिसका असर चुनावी मैदान में साफ दिखाई दे रहा है।
डीएमके के लिए यह चुनाव बेहद चुनौतीपूर्ण बन गया है। पिछले चुनाव में भारी जीत हासिल करने वाली पार्टी इस बार शुरुआती रुझानों में पिछड़ती नजर आई। हालांकि डीएमके नेताओं का कहना है कि पोस्टल बैलेट और शुरुआती राउंड के कारण तस्वीर साफ नहीं है और अंतिम नतीजों में बदलाव हो सकता है।
वहीं बीजेपी और एनडीए गठबंधन भी तमिलनाडु में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन की बात कर रहे हैं। बीजेपी उम्मीदवार तमिलिसाई सुंदरराजन ने दावा किया कि राज्य बदलाव चाहता है और जनता डीएमके को जवाब देगी।
चेन्नई सहित राज्यभर के काउंटिंग सेंटरों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। लोयोला कॉलेज और क्वीन मैरी कॉलेज जैसे प्रमुख केंद्रों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया।
केरल में यूडीएफ की वापसी के संकेत
केरल में कांग्रेस नेतृत्व वाली यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) ने शुरुआती रुझानों में बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। चुनाव आयोग के अनुसार यूडीएफ 71 से अधिक सीटों पर आगे चल रही थी, जबकि बाद के रुझानों में यह आंकड़ा 79 और फिर 90 सीटों तक पहुंचता दिखाई दिया।
केरल विधानसभा में कुल 140 सीटें हैं और सरकार बनाने के लिए 71 सीटों की जरूरत होती है। ऐसे में यूडीएफ की बढ़त ने साफ संकेत दिया कि राज्य में सत्ता परिवर्तन संभव है।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा कि “केरल को फिर से खड़ा करने की जरूरत है। राज्य की आर्थिक स्थिति खराब है और नई सरकार को निवेश और विकास पर ध्यान देना होगा।” उन्होंने कहा कि राज्य को नई दिशा देने की आवश्यकता है।
केरल कांग्रेस अध्यक्ष सनी जोसेफ ने भी जीत का दावा किया और कहा कि पार्टी को जनता का पूरा समर्थन मिला है।
वहीं सत्ताधारी एलडीएफ शुरुआती रुझानों में आगे थी, लेकिन धीरे-धीरे यूडीएफ ने बढ़त बना ली। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक मुद्दों ने इस बार चुनाव में बड़ी भूमिका निभाई।
राज्य के सभी मतगणना केंद्रों पर भारी सुरक्षा व्यवस्था की गई है। तिरुवनंतपुरम के मार इवानियोस कॉलेज कैंपस सहित कई केंद्रों पर पुलिस और सुरक्षा बल तैनात किए गए।
असम में बीजेपी गठबंधन की मजबूत पकड़
असम में बीजेपी और उसके सहयोगी दलों ने शुरुआती रुझानों में ही बहुमत का आंकड़ा पार कर लिया। 126 सीटों वाली विधानसभा में सरकार बनाने के लिए 64 सीटों की जरूरत होती है और बीजेपी अकेले 66 सीटों पर आगे चल रही थी, जबकि एनडीए गठबंधन 80 से अधिक सीटों पर बढ़त बनाए हुए था।
मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में बीजेपी ने राज्य में विकास, कानून व्यवस्था और बुनियादी ढांचे को चुनावी मुद्दा बनाया था। शुरुआती रुझानों ने संकेत दिया कि जनता ने एक बार फिर बीजेपी पर भरोसा जताया है।
दिल्ली स्थित बीजेपी मुख्यालय में भी जश्न का माहौल दिखाई दिया। पार्टी कार्यालय में सुबह से ही मिठाइयां और पूरी बनाई जा रही थीं। कार्यकर्ताओं ने ढोल बजाकर जीत का उत्सव मनाना शुरू कर दिया।
रवि किशन ने असम में बीजेपी की बढ़त को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीतियों और हिमंत बिस्वा सरमा के काम का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि गरीबों और महिलाओं के लिए सरकार की योजनाओं का जनता पर सकारात्मक असर पड़ा है।
असम में भी सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। विभिन्न राजनीतिक दलों के एजेंट सुबह से ही काउंटिंग सेंटरों पर पहुंचने लगे थे। प्रशासन ने शांतिपूर्ण मतगणना सुनिश्चित करने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था लागू की।
पुडुचेरी में एनआरसी की बढ़त
पुडुचेरी में भी शुरुआती रुझानों में एनआरसी गठबंधन बढ़त बनाए हुए दिखाई दिया। कई सीटों पर पार्टी उम्मीदवार आगे चल रहे थे। महिला इंजीनियरिंग कॉलेज स्थित मतगणना केंद्र में सुबह से ही वोटों की गिनती जारी रही।
पुडुचेरी में मुकाबला अपेक्षाकृत शांत रहा, लेकिन राजनीतिक दलों की नजर यहां के परिणामों पर भी बनी हुई है क्योंकि छोटे राज्यों के नतीजे राष्ट्रीय राजनीति में बड़ा संदेश देते हैं।
शुरुआती रुझानों से बदलते राजनीतिक संकेत
इन चुनावों के शुरुआती रुझानों ने साफ कर दिया है कि देश की राजनीति में बड़ा बदलाव हो रहा है। पश्चिम बंगाल में बीजेपी का उभार, तमिलनाडु में विजय की TVK का धमाकेदार प्रदर्शन और केरल में यूडीएफ की वापसी के संकेत राष्ट्रीय राजनीति को नई दिशा दे सकते हैं।
तमिलनाडु में विजय की एंट्री ने यह साबित किया है कि दक्षिण भारतीय राजनीति में फिल्मी सितारों का प्रभाव अभी भी बेहद मजबूत है। दूसरी तरफ बंगाल में बीजेपी का प्रदर्शन पार्टी के लिए ऐतिहासिक साबित हो सकता है।
केरल में यदि यूडीएफ सरकार बनाती है तो यह कांग्रेस के लिए बड़ी राजनीतिक जीत मानी जाएगी। वहीं असम में बीजेपी की वापसी यह संकेत देती है कि पूर्वोत्तर में पार्टी की पकड़ अब भी मजबूत बनी हुई है।
हालांकि यह सभी केवल शुरुआती रुझान हैं और अंतिम नतीजे आने में अभी समय बाकी है। कई सीटों पर मुकाबला बेहद करीबी है और हर राउंड के साथ तस्वीर बदल सकती है। राजनीतिक दलों के समर्थक जहां जश्न मना रहे हैं, वहीं उम्मीदवार और नेता लगातार मतगणना केंद्रों से अपडेट ले रहे हैं।
देशभर की नजरें अब इन पांच राज्यों के अंतिम परिणामों पर टिकी हुई हैं, क्योंकि ये नतीजे आने वाले वर्षों की राष्ट्रीय राजनीति का रुख तय कर सकते हैं।



