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Kerala Assembly Election 2026: केरल चुनाव नतीजों पर टिकीं निगाहें, शशि थरूर के बयान ने बढ़ाई मुख्यमंत्री पद की सरगर्मी

The Hill India News
Last updated: May 4, 2026 2:55 am
The Hill India News
Published: May 4, 2026
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Photo Source : PTI/X
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तिरुवनंतपुरम: केरल की राजनीति आज एक ऐसे महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ी है, जहाँ आज होने वाली मतगणना न केवल अगले पांच सालों का भविष्य तय करेगी, बल्कि राज्य के कई बड़े राजनीतिक दिग्गजों के भाग्य का भी फैसला करेगी। राज्य में इस बार मुकाबला त्रिकोणीय रहा है, लेकिन मुख्य लड़ाई सत्ताधारी वाम लोकतांत्रिक मोर्चे (LDF) और विपक्षी यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (UDF) के बीच मानी जा रही है। राजनीतिक गलियारों में सबसे बड़ा सवाल यह नहीं है कि कौन जीतेगा, बल्कि यह है कि यदि कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ सत्ता में आता है तो मुख्यमंत्री की कुर्सी पर कौन बैठेगा? क्या पार्टी किसी अनुभवी विधायक पर भरोसा जताएगी या फिर दिल्ली की राजनीति में सक्रिय किसी बड़े चेहरे को राज्य की कमान सौंपकर सबको चौंका देगी?

Contents
मुख्यमंत्री के चेहरे पर शशि थरूर का रुखएग्जिट पोल और जमीनी हकीकतवामपंथ के लिए ऐतिहासिक संकट का क्षणकेरल में क्या हैं चुनावी समीकरण?

विशेष रूप से, वरिष्ठ कांग्रेस नेता और सांसद शशि थरूर के नाम को लेकर चल रही चर्चाओं ने इस चुनावी सरगर्मी को और भी दिलचस्प बना दिया है।

मुख्यमंत्री के चेहरे पर शशि थरूर का रुख

तिरुवनंतपुरम में पत्रकारों से बात करते हुए जब कांग्रेस सांसद शशि थरूर से सीधा सवाल पूछा गया कि क्या कोई मौजूदा सांसद (MP) केरल का मुख्यमंत्री बन सकता है, तो उन्होंने बहुत ही चतुराई और स्पष्टता से इसका जवाब दिया। थरूर ने कहा, ‘मैं अच्छी तरह जानता हूं कि आप मुझसे क्या कहलवाना चाहते हैं, लेकिन मैं वैसा कुछ नहीं कहने वाला। इसका उत्तर बहुत स्पष्ट है।’

उन्होंने कांग्रेस पार्टी की आंतरिक प्रक्रिया का हवाला देते हुए आगे कहा, ‘कांग्रेस पार्टी में हमारी एक मानक प्रक्रिया है। चुनाव परिणामों के बाद पार्टी अध्यक्ष का एक प्रतिनिधि नवनिर्वाचित विधायकों से मिलता है। वह व्यक्ति विधायकों की राय और पसंद को समझता है। इसके बाद वह दिल्ली जाकर आलाकमान को रिपोर्ट देता है। आलाकमान उन सभी सुझावों को ध्यान में रखते हुए अंतिम फैसला करता है। इसके बाद वे किसी भी नियम या सीमा से बंधे नहीं होते, वे जो चाहें चुन सकते हैं। यह पूरी तरह उन पर निर्भर करता है।’ थरूर के इस बयान ने यह स्पष्ट कर दिया है कि मुख्यमंत्री के चयन का विकल्प पूरी तरह खुला है और आलाकमान भविष्य की जरूरतों को देखते हुए कोई भी बड़ा और दूरगामी फैसला ले सकता है।

VIDEO | When asked about exit poll predictions as counting of votes is scheduled for tomorrow, Congress leader Shashi Tharoor (@ShashiTharoor) says, "No, I think again, you know, exit polls in our country have lots of problems. So I don't want to particularly rely on them. But… pic.twitter.com/9peoO6aD8T

— Press Trust of India (@PTI_News) May 3, 2026

एग्जिट पोल और जमीनी हकीकत

आज होने वाली मतगणना से पहले एग्जिट पोल के अनुमानों पर टिप्पणी करते हुए थरूर ने कहा कि हालांकि हमारे देश में एग्जिट पोल हमेशा सटीक नहीं होते, लेकिन इस बार सभी का एकमत होना चौंकाने वाला है। उन्होंने कहा, ‘मुझे विशेष रूप से एग्जिट पोल पर भरोसा करना पसंद नहीं है, क्योंकि उनमें कई तकनीकी और सैद्धांतिक समस्याएं होती हैं, लेकिन इस बार यह अद्भुत है कि सभी एक ही बात कह रहे हैं।’

एक सर्वसम्मत निष्कर्ष सामने आया है। सच कहूं तो 4 अप्रैल के बाद से मैंने जिन भी विशेषज्ञों, पत्रकारों और राजनीतिक विश्लेषकों से बात की है, वे सभी इस बात पर एकमत हैं कि यह यूडीएफ की जीत होने जा रही है। अगर परिणाम एग्जिट पोल और विशेषज्ञों के अनुमानों के अनुरूप नहीं रहे, तो यह वास्तव में बहुत बड़ा आश्चर्य होगा।

वामपंथ के लिए ऐतिहासिक संकट का क्षण

शशि थरूर ने इस चुनाव के राष्ट्रीय महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यदि एलडीएफ (LDF) इस चुनाव में हारती है, तो यह भारतीय राजनीति की एक ऐतिहासिक घटना होगी। उनके शब्दों में, ‘4 मई की सबसे बड़ी खबर यह होगी कि 1960 के दशक के बाद पहली बार ऐसा होगा जब वामपंथी दल देश के किसी भी राज्य की सत्ता में नहीं होंगे। 2011 में जब हम जीते थे, तब वे केरल और बंगाल दोनों हार गए थे, लेकिन तब भी त्रिपुरा में उनकी सरकार थी। लेकिन इस बार वे पूरे भारत में कहीं भी सत्ता में नहीं रहेंगे और यह हमारे देश के राजनीतिक इतिहास के लिए एक बहुत बड़ा घटनाक्रम होगा।’

#WATCH | Thiruvananthapuram, Keralam: When asked if an MP can become the CM of Kerala, Congress MP Shashi Tharoor says, "I know exactly what you're trying to get me to say. I'm not saying any of that. The answer is very clear. We have a standard practice in the Congress Party.… pic.twitter.com/4s7jDm4ZkG

— ANI (@ANI) May 3, 2026

केरल में क्या हैं चुनावी समीकरण?

बता दें कि केरल विधानसभा चुनाव 2026 का मुकाबला बेहद दिलचस्प रहा है। मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन के नेतृत्व वाला लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट इस बार भी कांग्रेस के नेतृत्व वाले यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट को कड़ी चुनौती दे रहा है। अगर इस बार लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट की वापसी होती है, तो यह एलडीएफ की लगातार तीसरी सरकार होगी और पिनाराई विजयन तीसरी बार मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेंगे।

वहीं, दूसरी ओर यूडीएफ भी इस बार बेहद मजबूत स्थिति में दिख रहा है। केरल का एक राजनीतिक इतिहास भी रहा है कि वहां की जनता किसी भी गठबंधन या पार्टी को लगातार दूसरा मौका जल्द नहीं देती है। हालांकि, पिछली बार एलडीएफ ने इस मिथक को तोड़ते हुए दूसरी बार वापसी की थी। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या केरल की जनता इस बार बदलाव को चुनती है या फिर कांग्रेस के नेतृत्व वाले गठबंधन का रुख करती है।

सभी मतगणना केंद्रों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं और दोपहर तक स्पष्ट रुझान आने की उम्मीद है। चुनाव परिणाम न सिर्फ केरल, बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर भी राजनीतिक समीकरणों की दिशा तय करेंगे।

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