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उत्तराखंड की सियासत में हलचल: बंगाल और असम चुनाव परिणामों पर कांग्रेस का बड़ा दावा, कहा– ‘उत्तराखंड में भी होगा बदलाव’

देहरादून: पश्चिम बंगाल और असम विधानसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के पक्ष में आए रुझानों के बाद उत्तराखंड की राजनीति में भी गर्माहट आ गई है। जहां एक ओर उत्तराखंड में भाजपा कार्यकर्ताओं के बीच जश्न का माहौल है, वहीं मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने भी इन नतीजों पर अपनी पैनी नजर बनाए रखी है। कांग्रेस ने इन परिणामों को एक संकेत के रूप में लेते हुए राज्य के आगामी विधानसभा चुनावों में जीत का दावा किया है।

उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने चुनावों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि बदलाव प्रकृति का शाश्वत नियम है और यही बदलाव आगामी चुनाव में उत्तराखंड में भी देखने को मिलेगा।


बदलाव लोकतंत्र का अभिन्न अंग: गणेश गोदियाल

देहरादून में पत्रकारों से बातचीत करते हुए उत्तराखंड कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने कहा कि ‘बदलाव लोकतंत्र से परे नहीं है, इसलिए निश्चित रूप से लोकतंत्र में बदलाव होना है और यही हुआ भी है।’ उन्होंने आगे कहा कि जिस प्रकार सुदूर दक्षिण के राज्य केरल में लगातार 10 साल के शासन के बाद भी एक नई सरकार सत्ता में आ सकती है, उसी उम्मीद के साथ वे उत्तर भारत के महत्वपूर्ण राज्य उत्तराखंड के परिणामों को देख रहे हैं।

उन्होंने स्पष्ट किया कि बंगाल चुनाव की परिस्थितियों को देखते हुए कांग्रेस पार्टी ने वहां कभी पूर्ण बहुमत की सरकार बनाने का दावा नहीं किया था। गोदियाल ने कहा, “कांग्रेस पार्टी को असम के परिणामों पर जरूर गौर करने और आत्ममंथन करने की जरूरत है, लेकिन बंगाल में हमारी स्थिति पहले से ही स्पष्ट थी, इसलिए हम उस पर कोई विशेष प्रतिक्रिया नहीं देना चाहते हैं।” गोदियाल ने यह भी जोड़ा कि असम को अपवाद मान लिया जाए, तो बाकी राज्यों के चुनावी नतीजों से यह साफ हो जाता है कि जनता बदलाव चाहती है।


हरीश रावत का ऐलान: 15 मई से पूरे प्रदेश में करेंगे संवाद

इस बीच, कांग्रेस के दिग्गज नेता और पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पश्चिम बंगाल और असम के चुनाव परिणामों पर अपनी गहरी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इन परिणामों को देखने के बाद राजनीति में सीधे संवाद के महत्व को समझा है।

हरीश रावत ने अपने संकल्प के बारे में जानकारी देते हुए कहा कि, ‘आज के चुनाव परिणामों के बाद मुझे काफी गंभीरता के साथ यह अनुभूति हुई है कि राजनीति में सतत और तर्कपूर्ण संवाद बेहद जरूरी है।’ इसके साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि बहुत सोच-विचार के बाद उन्होंने यह निर्णय लिया है कि वे आगामी 15 मई से पूरे उत्तराखंड का दौरा करेंगे और जनता के बीच जाकर सीधा संवाद स्थापित करेंगे। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि हरीश रावत का यह कदम उत्तराखंड कांग्रेस को एकजुट करने और कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा फूंकने का काम करेगा।


बीजेपी में जश्न, लेकिन कांग्रेस ने रखी उम्मीदें

दूसरी तरफ, इन नतीजों के बाद उत्तराखंड में भाजपा के खेमे में भारी उत्साह देखा जा रहा है। पार्टी कार्यकर्ताओं ने ढोल-नगाड़ों के साथ जश्न मनाया और इसे केंद्र सरकार की नीतियों पर जनता की मुहर बताया। लेकिन कांग्रेस का मानना है कि राज्यों के अपने स्थानीय मुद्दे होते हैं और उत्तराखंड की जनता वहां की मौजूदा सरकार के कामकाज से असंतुष्ट है।

गोदियाल का दावा है कि राज्य में बेरोजगारी, महंगाई और बुनियादी ढांचे की समस्याओं से जूझ रही जनता बदलाव के लिए पूरी तरह तैयार है। कांग्रेस नेताओं का मानना है कि हरीश रावत के प्रदेशव्यापी संवाद कार्यक्रम से पार्टी को जमीन पर अपनी पकड़ मजबूत करने में काफी मदद मिलेगी।


उत्तराखंड कांग्रेस की आगामी रणनीति

उत्तराखंड के आगामी चुनावों के लिए कांग्रेस पार्टी अपनी रणनीति को धार दे रही है। पार्टी नेतृत्व का मानना है कि अगर जनता को सही विकल्प और स्पष्ट दृष्टिकोण दिया जाए, तो सत्ताधारी दल को चुनौती दी जा सकती है। हरीश रावत का ‘जन-संवाद’ कार्यक्रम इसी रणनीति का एक मुख्य हिस्सा माना जा रहा है। यह देखना दिलचस्प होगा कि कांग्रेस का यह आक्रामक रुख आने वाले समय में राज्य की राजनीति को किस दिशा में ले जाता है।

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