
पटना/नई दिल्ली: बिहार की सियासत के लिए आज यानी गुरुवार, 5 मार्च 2026 का दिन इतिहास के पन्नों में दर्ज होने जा रहा है। पिछले दो दशकों से बिहार की सत्ता के केंद्र बिंदु रहे ‘सुशासन बाबू’ यानी नीतीश कुमार अब राज्य की राजनीति को अलविदा कहकर देश की राजधानी दिल्ली की ओर रुख कर रहे हैं। राज्यसभा की 37 सीटों के लिए नामांकन के आखिरी दिन नीतीश कुमार का पर्चा दाखिल करना महज एक चुनावी प्रक्रिया नहीं, बल्कि बिहार के सत्ता समीकरणों में आने वाले उस बड़े भूकंप का संकेत है, जिसकी चर्चा वर्षों से हो रही थी।
नामांकन की तैयारी: गृह मंत्री अमित शाह की मौजूदगी में बड़ा कदम
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार आज सुबह 11:30 बजे बिहार विधानसभा पहुंचेंगे और राज्यसभा उम्मीदवार के तौर पर अपना नामांकन दाखिल करेंगे। उनके साथ जेडीयू कोटे से रामनाथ ठाकुर भी अपना पर्चा भरेंगे। इस ऐतिहासिक क्षण का गवाह बनने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के भी पटना पहुंचने की संभावना है।
सूत्रों के मुताबिक, बुधवार को पटना में हुई जेडीयू विधायकों और वरिष्ठ नेताओं की गुप्त बैठक में नीतीश कुमार ने स्पष्ट कर दिया कि अब वह केंद्र की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे। हालांकि, पार्टी का कोई भी नेता अभी इस पर आधिकारिक मुहर नहीं लगा रहा है, लेकिन विधानसभा के गलियारों में हलचल तेज है।
20 साल बाद बड़ा फेरबदल: ‘बड़े भाई’ की भूमिका में बीजेपी
बिहार में पिछले दो दशकों से बीजेपी ‘छोटे भाई’ की भूमिका में रही है, लेकिन नीतीश कुमार के दिल्ली जाने के फैसले ने बीजेपी के लिए ‘किंगमेकर’ से ‘किंग’ बनने का रास्ता साफ कर दिया है।
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नया पावर फॉर्मूला: चर्चा है कि बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री होगा।
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डिप्टी सीएम का पद: यदि मुख्यमंत्री बीजेपी का होता है, तो गठबंधन धर्म के तहत जेडीयू को डिप्टी सीएम का पद दिया जाएगा।
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नीतीश के उत्तराधिकारी: राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि इस बदलाव के साथ ही नीतीश कुमार के बेटे की राजनीति में औपचारिक एंट्री हो सकती है, जिन्हें भविष्य के लिए तैयार किया जाएगा।
सीएम की रेस में कौन? इन नामों पर टिकी हैं निगाहें
बीजेपी आलाकमान ने जिस तरह मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में नए चेहरों को उतारकर चौंकाया था, वैसा ही कुछ बिहार में भी देखने को मिल सकता है। फिलहाल तीन नाम सबसे ज्यादा चर्चा में हैं:
1. नित्यानंद राय (केंद्रीय राज्यमंत्री)
नित्यानंद राय का नाम रेस में सबसे आगे है। यादव समुदाय से आने वाले राय केंद्र में कद्दावर मंत्री हैं और अमित शाह के भरोसेमंद माने जाते हैं। बिहार में यादव वोट बैंक में सेंध लगाने के लिए बीजेपी उन पर दांव खेल सकती है।
2. सम्राट चौधरी (डिप्टी सीएम एवं प्रदेश अध्यक्ष)
कुशवाहा समाज का बड़ा चेहरा और वर्तमान डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी ने पिछले कुछ समय में नीतीश कुमार के खिलाफ आक्रामक राजनीति कर अपनी पहचान बनाई है। ओबीसी राजनीति के लिहाज से वह बीजेपी की पहली पसंद हो सकते हैं।
3. महिला या अति-पिछड़ा (EBC) कार्ड
सूत्रों का कहना है कि बीजेपी किसी अति-पिछड़ा वर्ग से आने वाली महिला नेता को मुख्यमंत्री बनाकर एक बड़ा सामाजिक संदेश दे सकती है। यह ‘साइलेंट वोटर’ को साधने की मास्टरस्ट्रोक रणनीति हो सकती है।
एनडीए की महाबैठक: अमित शाह तय करेंगे फॉर्मूला
नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के बाद आज दोपहर अमित शाह और एनडीए के घटक दलों (जेडीयू, लोजपा-आर, हम) के बीच एक उच्च स्तरीय बैठक होनी है। इस बैठक में सरकार के नए स्वरूप पर चर्चा होगी।
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क्या बिहार में एक डिप्टी सीएम होगा या दो?
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जेडीयू के मंत्रियों का पोर्टफोलियो क्या होगा?
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आने वाले 2025-26 के चुनावी रोडमैप की तैयारी कैसे होगी?
नीतीश कुमार का दिल्ली जाना: मजबूरी या मास्टरस्ट्रोक?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि नीतीश कुमार का केंद्र में जाना एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। पिछले कुछ समय से बिहार में ‘एंटी-इंकंबेंसी’ (सत्ता विरोधी लहर) और गठबंधन के भीतर बढ़ते दबाव के बीच नीतीश कुमार ने सम्मानजनक विदाई और केंद्र में बड़ी जिम्मेदारी को बेहतर विकल्प माना है। उन्हें केंद्र में कोई बड़ा मंत्रालय या एनडीए के संयोजक जैसी महत्वपूर्ण भूमिका दी जा सकती है।
किसानों और युवाओं की क्या है प्रतिक्रिया?
बिहार की सत्ता में इस बड़े उलटफेर को लेकर राज्य की जनता मिली-जुली प्रतिक्रिया दे रही है। युवाओं को उम्मीद है कि बीजेपी के नेतृत्व वाली नई सरकार रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, वहीं किसानों को डर है कि नेतृत्व परिवर्तन के दौरान कहीं विकास की योजनाएं ठंडे बस्ते में न चली जाएं।
बिहार में नई सुबह की आहट
आज शाम तक बिहार की राजनीति की तस्वीर पूरी तरह साफ होने की उम्मीद है। 10 बार मुख्यमंत्री पद की शपथ लेने वाले नीतीश कुमार का जाना एक युग का अंत है, तो बीजेपी का मुख्यमंत्री बनना एक नए अध्याय की शुरुआत। क्या बीजेपी का नया चेहरा बिहार की जटिल जातिगत राजनीति को साध पाएगा? यह देखना दिलचस्प होगा।



