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उत्तराखंडफीचर्ड

ऊर्जा प्रदेश उत्तराखंड में 1 गीगावाट सौर क्षमता का ऐतिहासिक आंकड़ा पार, PM मोदी के विजन को CM धामी ने दी रफ्तार

The Hill India News
Last updated: February 18, 2026 3:25 pm
The Hill India News
Published: February 18, 2026
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देहरादून: हिमालय की गोद में बसे उत्तराखंड ने विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच एक नया संतुलन स्थापित करते हुए नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में ‘स्वर्ण युग’ की शुरुआत की है। राज्य ने अपनी स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता में 1 गीगावाट (1000 मेगावाट) के जादुई आंकड़े को पार कर एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। नवीनतम आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड की कुल स्थापित सौर क्षमता अब 1027.87 मेगावाट से अधिक हो गई है, जो राज्य को देश के अग्रणी हरित ऊर्जा उत्पादकों की श्रेणी में खड़ा करती है।

Contents
पीएम मोदी का विजन और धामी सरकार का मिशनउत्तराखंड: श्रेणीवार स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता का विवरण (2026)उरेडा (UREDA): इस सफलता का सारथीस्वरोजगार और पर्यावरण: एक तीर से दो निशानेनीतिगत सुधार और भविष्य का रोडमैप

पीएम मोदी का विजन और धामी सरकार का मिशन

इस ऐतिहासिक उपलब्धि पर हर्ष व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और ‘आत्मनिर्भर भारत’ के संकल्प की जीत बताया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी की स्पष्ट नीतियों ने ही उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्य को हरित ऊर्जा की दिशा में जनआंदोलन शुरू करने की प्रेरणा दी है।

“प्रधानमंत्री जी ने हरित ऊर्जा के जिस विजन को देश के सामने रखा, उत्तराखंड ने उसे धरातल पर उतारने का कार्य किया है। आज सौर ऊर्जा केवल बिजली उत्पादन का जरिया नहीं, बल्कि हमारे युवाओं के लिए स्वरोजगार का एक सशक्त माध्यम बन चुका है।” — पुष्कर सिंह धामी, मुख्यमंत्री

उत्तराखंड: श्रेणीवार स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता का विवरण (2026)

उत्तराखंड ने 1027.87 मेगावाट की कुल क्षमता के साथ जो ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल की है, उसका विस्तृत श्रेणीवार विवरण नीचे दी गई तालिका में देख सकते हैं:

क्रम संख्या सौर परियोजना की श्रेणी स्थापित क्षमता (मेगावाट/MW में)
1. ग्राउंड माउंटेड सोलर प्लांट 397 MW
2. रूफटॉप सोलर (पीएम सूर्यघर योजना) 241 MW
3. मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना 137 MW
4. कॉमर्शियल नेट मीटरिंग 110 MW
5. कैप्टिव सोलर पावर प्लांट 51 MW
6. कनाल टॉप एवं कनाल बैंक सोलर 37 MW
7. सरकारी भवनों पर सोलर संयंत्र 26 MW
कुल ऐतिहासिक कुल क्षमता 1027.87 MW

वर्तमान में, मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना के तहत 100 मेगावाट से अधिक के नए संयंत्रों पर काम चल रहा है, जबकि सरकारी भवनों और कैप्टिव प्लांट्स के माध्यम से लगभग 43.5 मेगावाट की अतिरिक्त क्षमता जल्द ही ग्रिड से जुड़ने वाली है।


उरेडा (UREDA): इस सफलता का सारथी

इस गौरवशाली यात्रा में Uttarakhand Renewable Energy Development Agency (UREDA) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण रही है। उरेडा ने न केवल परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तकनीकी मार्गदर्शन दिया, बल्कि दूरस्थ और सीमांत पर्वतीय क्षेत्रों तक सौर समाधानों को पहुँचाने में अग्रणी भूमिका निभाई। जन-जागरूकता अभियानों और सरल अनुमोदन प्रक्रिया के माध्यम से उरेडा ने स्थानीय उद्यमियों और ग्रामीणों के मन में सौर ऊर्जा के प्रति विश्वास जगाया है।

स्वरोजगार और पर्यावरण: एक तीर से दो निशाने

उत्तराखंड के लिए सौर ऊर्जा केवल तकनीकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति को बदलने का भी हथियार है।

  1. स्थानीय रोजगार: मुख्यमंत्री सौर स्वरोजगार योजना ने हजारों युवाओं को अपने ही गांव में उद्यमी बनने का अवसर दिया है।

  2. कार्बन उत्सर्जन में कमी: 1 गीगावाट सौर क्षमता के साथ राज्य प्रतिवर्ष लाखों टन कार्बन उत्सर्जन को कम करने में सफल होगा।

  3. ऊर्जा आत्मनिर्भरता: सर्दियों के दौरान जब जल विद्युत परियोजनाओं (Hydropower) का उत्पादन कम होता है, तब सौर ऊर्जा राज्य की बिजली मांग को पूरा करने में ‘बैकबोन’ साबित हो रही है।


नीतिगत सुधार और भविष्य का रोडमैप

उत्तराखंड सरकार ने सौर ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए एक अनुकूल ‘इकोसिस्टम’ तैयार किया है। इसमें भारी सब्सिडी प्रावधान, सिंगल विंडो क्लीयरेंस और निजी निवेश को विशेष प्रोत्साहन शामिल है। राज्य सरकार का अगला लक्ष्य अब सौर ऊर्जा को कृषि क्षेत्र से जोड़ना है, जहाँ सोलर पंपों के माध्यम से किसानों की सिंचाई लागत को शून्य करने का प्रयास किया जा रहा है।

सरकारी भवनों को शत-प्रतिशत सौर ऊर्जा संचालित बनाने की दिशा में भी तेजी से काम चल रहा है, जिससे सरकारी खजाने पर बिजली बिलों का बोझ कम होगा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा मिलेगा।

1 गीगावाट का आंकड़ा पार करना उत्तराखंड के लिए एक मील का पत्थर है, लेकिन यह केवल शुरुआत है। ‘ऊर्जा प्रदेश’ के रूप में अपनी पहचान को अब ‘हरित ऊर्जा प्रदेश’ में बदलने की दिशा में राज्य के कदम मजबूती से बढ़ रहे हैं। यह उपलब्धि सतत विकास, पर्यावरण संरक्षण और प्रधानमंत्री के ‘नेट जीरो’ लक्ष्य की प्राप्ति की दिशा में एक सशक्त कदम है।

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