रुद्रपुर (ऊधम सिंह नगर)। उत्तराखंड की ऊधम सिंह नगर पुलिस ने शिक्षा जगत में सेंध लगाने वाले एक बहुत बड़े अंतरराज्यीय गिरोह के खिलाफ निर्णायक सफलता हासिल की है। रुद्रपुर में बीते दिनों उजागर हुए NCERT की फर्जी किताबें छापने और बेचने के मामले में पुलिस ने आखिरकार मुख्य आरोपी और इस पूरे सिंडिकेट के ‘किंगपिन’ नफीस खान उर्फ राजू को दबोच लिया है। मेरठ निवासी नफीस खान लंबे समय से पुलिस की आंखों में धूल झोंक रहा था, जिसे 3 अप्रैल को एक सटीक घेराबंदी के बाद गिरफ्तार किया गया।
इस गिरफ्तारी के साथ ही पुलिस ने एक ऐसे संगठित नेटवर्क को ध्वस्त करने का दावा किया है, जिसकी जड़ें उत्तराखंड से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान और दिल्ली तक फैली हुई थीं।
17 मार्च से शुरू हुई थी जांच की कड़ियां
इस पूरे मामले का पटाक्षेप बीती 17 मार्च को हुआ था, जब रुद्रपुर पुलिस ने एक गोदाम पर छापेमारी कर भारी मात्रा में संदिग्ध पुस्तकें बरामद की थीं। मामले की गंभीरता को देखते हुए NCERT नई दिल्ली के सहायक उत्पादन अधिकारी दीपक कुमार ने स्वयं रुद्रपुर कोतवाली में इस धोखाधड़ी के खिलाफ लिखित तहरीर दी थी। दीपक कुमार की शिकायत पर पुलिस ने कॉपीराइट अधिनियम और जालसाजी की विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज कर तफ्तीश शुरू की।
जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ी, पुलिस के सामने मेरठ के शातिर नफीस खान का नाम प्रमुखता से उभरा। पुलिस जांच में पाया गया कि नफीस न केवल इस गिरोह का संचालक था, बल्कि वह पूरे नेटवर्क की रणनीतियां भी खुद ही तैयार करता था।
मेरठ, मथुरा और राजस्थान: कैसे चलता था ‘नकली किताबों’ का खेल?
पुलिस पूछताछ में नफीस खान ने जिस तरह से अपने काम करने के तरीके (Modus Operandi) का खुलासा किया, वह चौंकाने वाला है। यह गिरोह किसी कॉर्पोरेट कंपनी की तरह बेहद सुनियोजित तरीके से संचालित होता था:
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भंडारण (Storage): गिरोह ने बरेली (UP) के भोजीपुरा थाना क्षेत्र में भारी मात्रा में कागज और छपाई सामग्री जमा कर रखी थी। यहां से सामग्री को रुद्रपुर के कीरतपुर स्थित गुप्त गोदामों में लाया जाता था।
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प्रिंटिंग का केंद्र (Printing Hub): किताबों के कवर और विशिष्ट होलोग्राम जैसे दिखने वाले फर्जी मार्क छपवाने के लिए कच्चा माल मथुरा भेजा जाता था। मथुरा की प्रिंटिंग प्रेसों में यह अवैध काम रात के अंधेरे में अंजाम दिया जाता था।
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वितरण और लॉजिस्टिक्स (Supply Chain): किताबें तैयार होने के बाद उन्हें राजस्थान के भरतपुर स्थित बड़े गोदामों में भेजा जाता था। यहां से मांग के अनुसार उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों में इन NCERT की फर्जी किताबों की सप्लाई की जाती थी।
हैरानी की बात यह है कि आरोपी गोदामों का किराया खुद वहन करता था और परिवहन के लिए सीधे वाहन मालिकों से संपर्क करता था ताकि किसी बिचौलिए की वजह से भेद न खुले।
हिस्ट्रीशीटर है आरोपी नफीस, पहले भी जा चुका है जेल
मुख्य आरोपी नफीस खान कोई नौसिखिया अपराधी नहीं है, बल्कि वह धोखाधड़ी की दुनिया का पुराना खिलाड़ी है। पुलिस के अनुसार, नफीस का लंबा आपराधिक इतिहास रहा है।
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वर्ष 2020: मेरठ के परतापुर थाने में उसके खिलाफ जालसाजी और कॉपीराइट एक्ट के तहत पहला बड़ा मामला दर्ज हुआ था।
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वर्ष 2023: बरेली के भोजीपुरा पुलिस ने भी उसे इसी तरह के अपराध में गिरफ्तार कर जेल भेजा था।
जेल से बाहर आने के बाद उसने अपना सबक सीखने के बजाय अपने नेटवर्क को और अधिक आधुनिक और गोपनीय बना लिया था। पुलिस अब उसके वित्तीय लेनदेन और संपत्तियों की भी जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि इस काले कारोबार से उसने कितनी अवैध संपत्ति अर्जित की है।
पुलिस का अगला कदम: ‘पूरा नेटवर्क होगा ध्वस्त’
रुद्रपुर पुलिस ने नफीस को न्यायालय में पेश कर दिया है और आगे की पूछताछ के लिए रिमांड की मांग की जा रही है। पुलिस के उच्चाधिकारियों का कहना है कि नफीस के पकड़े जाने के बाद अब गिरोह के अन्य फरार सदस्यों, विशेषकर मथुरा के उन प्रिंटिंग प्रेस मालिकों पर शिकंजा कसा जाएगा जिन्होंने फर्जीवाड़ा करने में उसकी मदद की।
“यह केवल कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं है, बल्कि हजारों छात्रों के भविष्य और उनकी शिक्षा के साथ किया गया खिलवाड़ है। हम इस गिरोह की अंतिम कड़ी तक पहुंचेंगे और सुनिश्चित करेंगे कि उत्तराखंड की धरती पर ऐसा अवैध कारोबार दोबारा न पनपे।” — पुलिस प्रवक्ता, ऊधम सिंह नगर
NCERT की फर्जी किताबें न केवल गुणवत्ता में खराब होती हैं, बल्कि उनमें तथ्यों की गलतियां भी हो सकती हैं। ‘बुग्याल न्यूज़’ सभी अभिभावकों और छात्रों से अपील करता है कि पुस्तकें हमेशा अधिकृत विक्रेताओं से ही खरीदें और किताबों पर लगे होलोग्राम की जांच अवश्य करें।



