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उत्तराखंड: डेडलाइन बीतने के बाद भी 20% राशन कार्ड ई-केवाईसी लंबित, आखिर कहाँ फंसा है पेंच?

The Hill India News
Last updated: January 15, 2026 12:23 pm
The Hill India News
Published: January 15, 2026
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देहरादून। उत्तराखंड में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) को पारदर्शी बनाने और फर्जीवाड़े को रोकने के लिए शुरू किया गया राशन कार्ड डिजिटलाइजेशन अभियान अपनी समय सीमा समाप्त होने के बाद भी अधूरा है। साल 2025 की अंतिम तारीख (31 दिसंबर) गुजर जाने और जनवरी 2026 के मध्य तक पहुँचने के बावजूद, प्रदेश में अब भी लगभग 20 प्रतिशत लाभार्थियों की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है। इस सुस्त रफ़्तार पर खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने कड़ा रुख अपनाते हुए विभागीय अधिकारियों को स्थिति स्पष्ट करने के निर्देश दिए हैं।

Contents
कनेक्टिविटी और संसाधनों की कमी बनी बड़ी बाधाक्या है ई-केवाईसी का उद्देश्य?मंत्री रेखा आर्या ने व्यक्त की नाराजगीपात्र लाभार्थियों को घबराने की जरूरत नहींभविष्य की रणनीति: घर-घर सत्यापन की तैयारी?जन-जागरूकता की अपीलमुख्य आकर्षण:

कनेक्टिविटी और संसाधनों की कमी बनी बड़ी बाधा

विभागीय आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश भर में अब तक केवल 80 फीसदी राशन कार्डों का ही सफलतापूर्वक ई-केवाईसी हो सका है। इस देरी के पीछे मुख्य कारण उत्तराखंड की विषम भौगोलिक परिस्थितियां और डिजिटल बुनियादी ढांचे की कमी को बताया जा रहा है।

अधिकारियों का कहना है कि प्रदेश के दूरस्थ पर्वतीय क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट कनेक्टिविटी की भारी समस्या है। इसके अलावा, कई बायोमेट्रिक मशीनों की उपलब्धता और तकनीकी खामियों के कारण भी अभियान की गति प्रभावित हुई है। विशेषकर चमोली, पिथौरागढ़ और उत्तरकाशी जैसे सीमांत जिलों के कई गांवों में ई-केवाईसी की प्रक्रिया को पूरा करना विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है।

क्या है ई-केवाईसी का उद्देश्य?

भारत सरकार के निर्देशों के तहत शुरू किए गए इस अभियान का मुख्य उद्देश्य राशन कार्डों को पूरी तरह डिजिटल करना और अपात्र लोगों को व्यवस्था से बाहर करना है। ई-केवाईसी के माध्यम से:

  • फर्जीवाड़े पर लगाम: डुप्लीकेट राशन कार्डों की पहचान करना।

  • पारदर्शिता: यह सुनिश्चित करना कि राशन केवल वास्तविक लाभार्थी (End-user) को ही मिले।

  • बायोमेट्रिक प्रमाणीकरण: अभ्यर्थी के फिंगरप्रिंट या आंख की रेटिना स्कैन के जरिए सत्यापन करना।

  • डाटा शुद्धिकरण: अंत्योदय और प्रायोरिटी हाउसहोल्ड (PHH) श्रेणियों के डाटा को त्रुटिहीन बनाना।

मंत्री रेखा आर्या ने व्यक्त की नाराजगी

खाद्य आपूर्ति मंत्री रेखा आर्या ने इस मामले पर नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि सरकार का लक्ष्य हर पात्र व्यक्ति को योजना का लाभ पहुँचाना है। उन्होंने कहा, “ई-केवाईसी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि सरकारी राशन का अधिकार केवल पात्र अभ्यर्थियों का ही हो। धांधली और डुप्लीकेसी को रोकने के लिए यह अभियान अनिवार्य है, लेकिन 80 प्रतिशत पर आंकड़े का रुकना चिंताजनक है।”

मंत्री ने स्पष्ट किया कि विभाग ने दो बार समय सीमा बढ़ाई थी ताकि जनता को असुविधा न हो। इसके बावजूद जो 20 फीसदी काम बचा है, उसकी समीक्षा की जाएगी।

पात्र लाभार्थियों को घबराने की जरूरत नहीं

राशन कटने के डर से परेशान कार्ड धारकों को राहत देते हुए मंत्री रेखा आर्या ने एक महत्वपूर्ण घोषणा की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी पात्र व्यक्ति को राशन से वंचित नहीं किया जाएगा। मंत्री ने कहा कि जिन लोगों को गंभीर बीमारी, शारीरिक दिव्यांगता या बुढ़ापे के कारण बायोमेट्रिक और रेटिना स्कैनिंग में समस्या आ रही है, उन्हें पहले ही नियमों में छूट दी गई है। इसके अलावा, जो लोग तकनीकी कारणों या नेटवर्क न होने की वजह से ई-केवाईसी नहीं करा पाए हैं, उनके मामलों की व्यक्तिगत रूप से जांच की जाएगी। यदि आवश्यक हुआ, तो राज्य सरकार केंद्र सरकार से इस संबंध में विशेष अनुरोध करेगी ताकि पात्रों का राशन न रुके।


भविष्य की रणनीति: घर-घर सत्यापन की तैयारी?

सूत्रों की मानें तो अब विभाग उन 20 प्रतिशत मामलों के लिए एक विशेष रणनीति तैयार कर रहा है जो ई-केवाईसी से छूट गए हैं। इसमें ‘मोबाइल वैन’ या राशन डीलरों द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन करने जैसी संभावनाओं पर विचार किया जा रहा है। सरकार का प्रयास है कि फरवरी 2026 तक इस आंकड़े को 100 फीसदी के करीब पहुँचाया जाए।

जन-जागरूकता की अपील

खाद्य विभाग ने एक बार फिर जनता से अपील की है कि वे अपने नजदीकी सरकारी सस्ते गल्ले की दुकान पर जाकर अपनी ई-केवाईसी प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूर्ण कराएं। सरकार का मानना है कि इस प्रक्रिया के पूर्ण होने से न केवल सरकारी खजाने पर पड़ने वाला बोझ कम होगा, बल्कि जरूरतमंदों को मिलने वाले अनाज की गुणवत्ता और उपलब्धता में भी सुधार होगा।


मुख्य आकर्षण:

  • अभियान की स्थिति: 80% पूर्ण, 20% अभी भी लंबित।

  • अंतिम तिथि: 31 दिसंबर 2025 (जो बीत चुकी है)।

  • मुख्य कारण: दुर्गम क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी और संसाधनों का अभाव।

  • राहत की बात: पात्र व्यक्तियों का राशन नहीं रोका जाएगा, तकनीकी समस्याओं वालों को मिलेगी छूट।

उत्तराखंड में राशन कार्ड ई-केवाईसी का मुद्दा अब एक प्रशासनिक चुनौती बन गया है। एक तरफ सरकार भ्रष्टाचार मुक्त वितरण प्रणाली चाहती है, तो दूसरी तरफ भौगोलिक बाधाएं इस मार्ग में रोड़ा बनी हुई हैं। अब देखना यह होगा कि मंत्री रेखा आर्या के हस्तक्षेप के बाद विभाग इस 20 प्रतिशत की खाई को कितनी जल्दी भर पाता है।

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