देहरादून: उत्तराखंड में बदलते मौसम के बीच मौसमी बीमारियों का प्रकोप लगातार बढ़ता जा रहा है। प्रदेश में स्वाइन फ्लू यानी सीजनल इन्फ्लुएंजा के मामले तेजी से सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ गई है। पिछले 24 घंटे में ही स्वाइन फ्लू के 25 नए मामले सामने आए हैं। इनमें 11 मामले देहरादून जिले से हैं, जबकि अन्य जिलों में 14 नए मरीजों की पुष्टि हुई है। प्रदेश में अब स्वाइन फ्लू के कुल मरीजों की संख्या बढ़कर 408 हो गई है।
हालांकि राहत की बात यह है कि संक्रमित मरीजों में से 324 लोग स्वस्थ होकर ठीक हो चुके हैं, जबकि 82 मरीजों का इलाज अभी जारी है। स्वाइन फ्लू से प्रदेश में अब तक 2 मरीजों की मौत भी हो चुकी है। स्वास्थ्य विभाग लगातार स्थिति की निगरानी कर रहा है और संदिग्ध मरीजों की जांच पर विशेष जोर दिया जा रहा है।
मौसम बदलते ही बढ़ने लगा स्वाइन फ्लू का खतरा
उत्तराखंड में मौसम में लगातार बदलाव देखने को मिल रहा है। कभी बारिश, कभी तापमान में गिरावट और फिर अचानक गर्मी बढ़ने से वायरल और फ्लू जैसी बीमारियों के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इसी बीच स्वाइन फ्लू के मामलों में लगातार वृद्धि स्वास्थ्य विभाग के लिए चुनौती बनती जा रही है।
स्वाइन फ्लू को लेकर सबसे ज्यादा चिंता इस बात की है कि इसकी चपेट में बच्चे और बुजुर्ग भी बड़ी संख्या में आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के मुताबिक प्रदेश में अब तक सामने आए 408 मामलों में अलग-अलग आयु वर्ग के मरीज शामिल हैं।
आंकड़ों के अनुसार 1 से 10 वर्ष की उम्र के 66 बच्चों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। वहीं 11 से 20 वर्ष की उम्र के 31 मरीज, 21 से 30 वर्ष के 41 मरीज और 31 से 40 वर्ष की उम्र के 34 मरीज संक्रमित पाए गए हैं।
इसके अलावा 41 से 50 वर्ष की उम्र के 44 मरीज, 51 से 60 वर्ष के 67 मरीज, 61 से 70 वर्ष के 70 मरीज, 71 से 80 वर्ष के 42 मरीज और 81 से 90 वर्ष की उम्र के 13 मरीज स्वाइन फ्लू की चपेट में आए हैं।
इन आंकड़ों से साफ है कि बुजुर्गों में संक्रमण का खतरा काफी अधिक बना हुआ है। खासतौर पर 51 से 70 वर्ष के आयु वर्ग में संक्रमित मरीजों की संख्या उल्लेखनीय है।
महिलाओं के मुकाबले पुरुष ज्यादा संक्रमित
स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में एक और महत्वपूर्ण बात सामने आई है। प्रदेश में स्वाइन फ्लू से संक्रमित मरीजों में पुरुषों की संख्या महिलाओं से ज्यादा है।
कुल 408 संक्रमित मरीजों में 224 पुरुष हैं, जबकि 184 महिलाएं स्वाइन फ्लू से संक्रमित पाई गई हैं। यानी प्रदेश में महिलाओं की तुलना में पुरुष मरीजों की संख्या अधिक है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक संक्रमण से बचाव के लिए केवल किसी एक आयु या वर्ग को ही नहीं, बल्कि सभी लोगों को सावधानी बरतने की जरूरत है। खासतौर पर बच्चों, बुजुर्गों और पहले से स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से जूझ रहे लोगों को फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने पर लापरवाही नहीं करनी चाहिए।
25 नए मामलों ने बढ़ाई स्वास्थ्य विभाग की चिंता
पिछले 24 घंटे में स्वाइन फ्लू के 25 नए मामले सामने आना इस बात का संकेत है कि संक्रमण अभी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आया है। देहरादून में 11 नए मामले मिलने के बाद राजधानी में स्वास्थ्य व्यवस्था पर भी नजर बढ़ा दी गई है।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच, उपचार और उनकी स्थिति की लगातार निगरानी करने के निर्देश दिए गए हैं। अधिकारियों को यह भी कहा गया है कि यदि किसी क्षेत्र में फ्लू के मामलों में अचानक बढ़ोतरी होती है तो तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाएं।
अभी तक प्रदेश में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए 1017 सैंपल लिए गए हैं। इनमें से 408 सैंपल पॉजिटिव पाए गए। देहरादून में 269 और अन्य जिलों में 139 मरीजों में संक्रमण की पुष्टि हुई है।
कोरोना ने भी बढ़ाई चिंता
स्वाइन फ्लू के साथ-साथ प्रदेश में कोरोना संक्रमण के मामले भी सामने आ रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार कोरोना संक्रमण की जांच के लिए अब तक 531 सैंपल लिए गए हैं, जिनमें से 46 लोगों में कोरोना संक्रमण की पुष्टि हुई है।
इन संक्रमित मरीजों में 20 मरीज देहरादून से हैं, जबकि 26 मरीज अन्य जिलों से सामने आए हैं। हालांकि कोरोना के मामले फिलहाल स्वाइन फ्लू की तुलना में कम हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग इसे भी नजरअंदाज नहीं करना चाहता।
मौसमी बीमारियों के बीच कोरोना और स्वाइन फ्लू के लक्षणों में कई समानताएं होने के कारण जांच और चिकित्सकीय सलाह का महत्व और बढ़ जाता है। बुखार, खांसी, गले में खराश, कमजोरी या सांस से जुड़ी समस्या को केवल सामान्य वायरल मानकर नजरअंदाज करना उचित नहीं है।
डेंगू के भी 150 मरीज, 128 हुए ठीक
स्वाइन फ्लू और कोरोना के बीच डेंगू के आंकड़े भी स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा रहे हैं। प्रदेश में डेंगू की जांच के लिए अब तक करीब 27,839 सैंपल लिए जा चुके हैं। इनमें से 150 मरीजों में डेंगू की पुष्टि हुई है।
इनमें 75 मरीज देहरादून जिले से हैं, जबकि अन्य जिलों से भी 75 मरीज सामने आए हैं। राहत की बात यह है कि डेंगू से संक्रमित 128 मरीज ठीक हो चुके हैं, जबकि 22 मरीजों का उपचार विभिन्न अस्पतालों में चल रहा है।
इस तरह उत्तराखंड में एक साथ स्वाइन फ्लू, कोरोना और डेंगू के मामले सामने आने से स्वास्थ्य विभाग को तीनों बीमारियों पर समान रूप से नजर रखनी पड़ रही है।
स्वाइन फ्लू के इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
स्वाइन फ्लू यानी H1N1 संक्रमण के शुरुआती लक्षण कई बार सामान्य फ्लू जैसे दिखाई देते हैं। यही वजह है कि लोग शुरुआत में इसे सामान्य वायरल समझकर इलाज में देरी कर सकते हैं। लेकिन लक्षण गंभीर होने पर तत्काल चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है।
स्वाइन फ्लू के प्रमुख लक्षणों में अचानक तेज बुखार आना, ठंड लगना, लगातार खांसी, गले में खराश या दर्द, सिरदर्द, मांसपेशियों में दर्द, अत्यधिक थकान और कमजोरी, नाक बहना या बंद होना शामिल हैं।
कुछ मरीजों में सांस लेने में परेशानी या सांस फूलने की समस्या भी हो सकती है। बच्चों में कभी-कभी उल्टी और दस्त जैसे लक्षण भी देखने को मिल सकते हैं।
अगर किसी व्यक्ति में तेज बुखार के साथ लगातार खांसी, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे लापरवाही नहीं करनी चाहिए और डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए।
बचाव के लिए अपनाएं ये सावधानियां
स्वाइन फ्लू और कोरोना जैसे श्वसन संक्रमणों से बचाव के लिए व्यक्तिगत स्वच्छता बेहद जरूरी है। लोगों को नियमित रूप से साबुन और पानी से हाथ धोने चाहिए। जहां पानी और साबुन उपलब्ध न हो, वहां सैनिटाइजर का इस्तेमाल किया जा सकता है।
भीड़भाड़ वाले स्थानों पर जाने से बचना चाहिए और आवश्यकता होने पर मास्क का इस्तेमाल करना चाहिए। खांसते या छींकते समय मुंह और नाक को टिश्यू या रुमाल से ढकना चाहिए। अपने चेहरे, आंख, नाक और मुंह को बार-बार छूने से बचना भी संक्रमण के खतरे को कम करने में मदद कर सकता है।
यदि किसी व्यक्ति में फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देते हैं तो उसे आराम करना चाहिए और अनावश्यक रूप से भीड़ या अन्य लोगों के संपर्क में आने से बचना चाहिए। लक्षण होने पर मास्क पहनना और परिवार के सदस्यों से उचित दूरी बनाए रखना भी जरूरी है।
पर्याप्त मात्रा में तरल पदार्थों का सेवन करें और डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही दवाओं का इस्तेमाल करें। खुद से दवा लेने या लक्षणों को लंबे समय तक नजरअंदाज करने से बचना चाहिए।
स्वास्थ्य अधिकारियों को मॉनिटरिंग के निर्देश
प्रदेश में स्वाइन फ्लू के बढ़ते मामलों को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सभी चिकित्सा प्रभारियों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए हैं। अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच और उपचार के साथ-साथ उनकी स्थिति पर भी नजर रखने को कहा गया है।
देहरादून के सीएमओ मनोज शर्मा ने कहा कि सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को लगातार मॉनिटरिंग करने के निर्देश दिए गए हैं। अस्पतालों में आने वाले संदिग्ध मरीजों की जांच, उपचार और उनकी स्थिति पर नजर रखने के साथ ही फ्लू के मामलों में किसी भी तरह की बढ़ोतरी होने पर तत्काल आवश्यक कदम उठाने को कहा गया है।
अगले कुछ दिन बेहद महत्वपूर्ण
उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के 408 मामलों का सामने आना स्वास्थ्य विभाग के लिए गंभीर संकेत है। हालांकि बड़ी संख्या में मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, लेकिन पिछले 24 घंटे में 25 नए मामले सामने आने से साफ है कि संक्रमण का खतरा अभी बना हुआ है।
ऐसे में आने वाले दिनों में लोगों को विशेष सावधानी बरतने की जरूरत है। खासकर बच्चों और बुजुर्गों को संक्रमण से बचाना बेहद जरूरी है। वहीं बुखार, खांसी, गले में दर्द, सांस लेने में परेशानी या अत्यधिक कमजोरी जैसे लक्षण सामने आने पर जांच और डॉक्टर की सलाह में देरी नहीं करनी चाहिए।
स्वास्थ्य विभाग की ओर से निगरानी बढ़ा दी गई है, लेकिन संक्रमण को रोकने में आम लोगों की भूमिका भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। व्यक्तिगत स्वच्छता, मास्क का जरूरत के अनुसार इस्तेमाल, भीड़ से दूरी, संक्रमित व्यक्ति से सावधानी और समय पर चिकित्सकीय सलाह जैसे कदम स्वाइन फ्लू के प्रसार को रोकने में अहम भूमिका निभा सकते हैं।
फिलहाल उत्तराखंड में स्वाइन फ्लू के 408, कोरोना के 46 और डेंगू के 150 मामले सामने आ चुके हैं। ऐसे में बदलते मौसम के बीच सावधानी ही सबसे बड़ा बचाव है। खासकर उन लोगों को अतिरिक्त सतर्क रहने की जरूरत है जो संक्रमण की चपेट में जल्दी आ सकते हैं। स्वास्थ्य विभाग की निगरानी के साथ अगर आम लोग भी जरूरी सावधानियां अपनाते हैं, तो इन मौसमी बीमारियों के बढ़ते प्रभाव को काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।
