हरिद्वार: बाबा नीब करौली के जीवन और उनके संदेश पर आधारित फिल्म ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद फिल्म निर्माता अनुप्रिया नागर धर्मनगरी हरिद्वार पहुंचीं। फिल्म की सफलता के लिए ईश्वर और संतों का आभार जताने के साथ उन्होंने सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में पूजा-अर्चना की और आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। इस दौरान फिल्म की सफलता, आध्यात्मिक विषयों पर सिनेमा निर्माण और भविष्य की योजनाओं को लेकर भी चर्चा हुई।
अनुप्रिया नागर ने फिल्म की सफलता को केवल बॉक्स ऑफिस की उपलब्धि नहीं, बल्कि संतों और ईश्वर के आशीर्वाद का परिणाम बताया। हरिद्वार पहुंचकर उन्होंने धार्मिक वातावरण में पूजा-अर्चना की और संतों से मार्गदर्शन लिया। वहीं, स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने भी उन्हें भविष्य के लिए शुभकामनाएं देते हुए कहा कि जिस श्रद्धा और भाव के साथ उन्होंने इस विषय पर काम किया है, उसी भावना के साथ आगे भी अच्छे कार्य करती रहें।
स्वामी कैलाशानंद से मिलीं अनुप्रिया, फिल्म की सफलता पर हुई चर्चा
सिद्धपीठ दक्षिण काली मंदिर में अनुप्रिया नागर ने आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज से मुलाकात की। स्वामी कैलाशानंद ने कहा कि अनुप्रिया अपने परिजनों के साथ पूरे भाव और श्रद्धा के साथ हरिद्वार पहुंची हैं। उन्होंने बताया कि अनुप्रिया लंबे समय से उनकी साधना और अनुष्ठानों से प्रेरणा लेती रही हैं।
स्वामी कैलाशानंद के मुताबिक फिल्म के शुरुआती दौर में जब इसकी सफलता को लेकर चिंता और आशंकाएं थीं, तब अनुप्रिया ने उनसे संपर्क किया था। उन्होंने कहा कि हनुमान जी के दर्शन और संतों के आशीर्वाद के बाद फिल्म ने सफलता हासिल की।
उन्होंने अनुप्रिया नागर को आगे भी सफलता प्राप्त करने का आशीर्वाद दिया और कहा कि ‘हनुमान अंश’ की सफलता की कहानी देवभूमि उत्तराखंड से भी जुड़ी हुई है। फिल्म के माध्यम से उत्तराखंड का नाम भी देशभर में पहुंचा है। उन्होंने यह भी कहा कि युवाओं ने फिल्म को पसंद किया और दर्शकों के समर्थन के कारण फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर अच्छी सफलता मिली।
धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर आगे भी फिल्म बनाने की इच्छा
हरिद्वार में मुलाकात के दौरान अनुप्रिया नागर ने भविष्य में धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर फिल्में बनाने की इच्छा भी जाहिर की। उनका उद्देश्य संत महापुरुषों के जीवन, उनके संघर्ष, विचारों और समाज के लिए दिए गए संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना है।
हालांकि स्वामी कैलाशानंद गिरि महाराज ने उन्हें सलाह दी कि फिलहाल ‘हनुमान अंश’ को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर ध्यान दिया जाए। उन्होंने कहा कि फिल्म की कहानी और संदेश को घर-घर तक पहुंचाने का प्रयास किया जाना चाहिए, ताकि अधिक से अधिक लोग इससे जुड़ सकें।
यूके में पढ़ाई के दौरान मिली नीब करौली बाबा से जुड़ी जानकारी
अनुप्रिया नागर ने बताया कि इस फिल्म के पीछे की कहानी उनके लिए बेहद खास है। उन्होंने कहा कि जब वह यूके में पढ़ाई कर रही थीं, तब उन्हें पता चला कि दुनिया के चर्चित टेक्नोलॉजी उद्यमी स्टीव जॉब्स भी बाबा नीब करौली के भक्त रहे थे। इसके बाद उनकी रुचि कैंची धाम और बाबा नीब करौली के जीवन से जुड़े विषयों में बढ़ी।
कैंची धाम से जुड़ी जानकारी और बाबा के जीवन से प्रभावित होकर उन्होंने इस विषय पर गहन शोध शुरू किया। रिसर्च के दौरान उन्हें हनुमान जी के जीवन, उनके संदेश और बाबा नीब करौली से जुड़े कई ऐसे पहलुओं की जानकारी मिली, जिन्होंने उन्हें फिल्म बनाने के लिए प्रेरित किया।
अनुप्रिया के मुताबिक, इसी शोध के दौरान उनके मन में इस विषय को बड़े पर्दे पर प्रस्तुत करने का विचार मजबूत हुआ। उन्होंने महसूस किया कि संत महापुरुषों की जीवन यात्रा और उनके संदेश को मनोरंजन के साथ-साथ एक सकारात्मक और आध्यात्मिक संदेश के रूप में दर्शकों तक पहुंचाया जा सकता है।
आर्थिक मुश्किलों के बावजूद नहीं छोड़ा फिल्म बनाने का सपना
अनुप्रिया नागर ने बताया कि भारत लौटने के बाद उन्हें जानकारी मिली कि बाबा नीब करौली और हनुमान जी से जुड़े इस विषय पर फिल्म बनाने का प्रयास पहले भी किया जा रहा था, लेकिन आर्थिक कठिनाइयों के कारण यह काम आगे नहीं बढ़ पा रहा था।
इसके बाद उन्होंने खुद इस परियोजना को आगे बढ़ाने का फैसला किया। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई को फिल्म में लगाया। खास बात यह रही कि इस फिल्म के निर्माण में उनके साथ दो अन्य महिलाओं ने भी निवेश किया। इस तरह तीन महिलाओं ने मिलकर फिल्म निर्माण की जिम्मेदारी संभाली।
यह पहल इसलिए भी खास मानी जा रही है क्योंकि फिल्म निर्माण जैसे बड़े और चुनौतीपूर्ण क्षेत्र में तीन महिलाओं ने मिलकर एक आध्यात्मिक विषय को पर्दे पर उतारने का जोखिम उठाया।
शुरुआती दस दिनों में हुई चिंता, फिर बदला माहौल
अनुप्रिया ने बताया कि फिल्म रिलीज होने के शुरुआती दस दिनों में उन्हें इसके प्रदर्शन को लेकर चिंता होने लगी थी। उन्हें आशंका थी कि फिल्म दर्शकों तक अपेक्षित तरीके से नहीं पहुंच पा रही है। लेकिन इसके बाद परिस्थितियां बदलने लगीं और फिल्म ने बेहतर प्रदर्शन करना शुरू किया।
उनके अनुसार, इसके बाद संतों और ईश्वर की कृपा से फिल्म को दर्शकों का समर्थन मिला और बॉक्स ऑफिस पर इसका प्रदर्शन बेहतर हुआ। उन्होंने फिल्म की सफलता का श्रेय दर्शकों के प्यार के साथ-साथ संतों और ईश्वर के आशीर्वाद को दिया।
संत महापुरुषों की कहानियों को सिनेमा के जरिए लोगों तक पहुंचाने का संकल्प
अनुप्रिया नागर का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ फिल्म बनाकर व्यावसायिक सफलता हासिल करना नहीं है। वह संत महापुरुषों के जीवन और उनके संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाना चाहती हैं।
उनका मानना है कि आज के दौर में सिनेमा समाज तक किसी विचार और संदेश को पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है। ऐसे में संतों और आध्यात्मिक व्यक्तित्वों के जीवन से जुड़ी प्रेरक कहानियों को आधुनिक सिनेमा के माध्यम से युवा पीढ़ी तक पहुंचाया जा सकता है।
आने वाले समय में भी वह इसी उद्देश्य के साथ धार्मिक और आध्यात्मिक विषयों पर फिल्में बनाने का प्रयास जारी रखना चाहती हैं। हालांकि अगली फिल्म की कहानी को लेकर अभी कोई अंतिम घोषणा नहीं की गई है, लेकिन हरिद्वार में हुई मुलाकात के दौरान इस दिशा में उनकी रुचि स्पष्ट रूप से सामने आई।
फिल्म की सफलता में सहयोग देने वालों का जताया आभार
अनुप्रिया नागर ने फिल्म की सफलता में सहयोग और मार्गदर्शन देने वाले सभी लोगों का आभार जताया। उन्होंने विशेष रूप से फिल्म से जुड़े अंतरराष्ट्रीय प्रभारी शांतनु शुक्ला के सहयोग और मार्गदर्शन के लिए धन्यवाद दिया।
हरिद्वार यात्रा के दौरान उनका संतों से मिलना और आशीर्वाद लेना इस बात का संकेत भी माना जा रहा है कि वह अपनी आगामी रचनात्मक यात्रा में आध्यात्मिक और धार्मिक विषयों को महत्वपूर्ण स्थान देना चाहती हैं।
फिलहाल ‘हनुमान अंश’ की सफलता के बाद अनुप्रिया नागर का अगला कदम क्या होगा, इस पर दर्शकों की नजरें बनी हुई हैं। एक ओर जहां फिल्म को दर्शकों का समर्थन मिला है, वहीं दूसरी ओर निर्माता की संत महापुरुषों की जीवन गाथाओं को पर्दे पर लाने की इच्छा ने उनकी अगली फिल्म को लेकर उत्सुकता बढ़ा दी है। हरिद्वार में संतों का आशीर्वाद लेने के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि अनुप्रिया नागर अपनी अगली फिल्म के लिए किस आध्यात्मिक व्यक्तित्व या प्रेरक कहानी को चुनती हैं।
