देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन 17 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी की ओर से देशभर में ‘सेवा संकल्प अभियान’ शुरू किया जा रहा है। इस अभियान के तहत ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम भी रखा गया है, जिसमें लोगों से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप प्रज्वलित करने की अपील की गई है। भाजपा की ओर से बताया गया है कि यह अभियान प्रधानमंत्री के सार्वजनिक जीवन के 25 वर्ष पूरे होने के अवसर पर भी आयोजित किया जा रहा है और इसके तहत सेवा, जनसरोकार तथा विभिन्न सामाजिक गतिविधियां आयोजित की जाएंगी।
उत्तराखंड में इसी कार्यक्रम को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गणेश गोदियाल ने ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए हैं। गोदियाल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर दीप जलाने की अपील के संदर्भ में अंकिता भंडारी प्रकरण का मुद्दा उठाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री कई बार उत्तराखंड आए हैं, लेकिन उनके अनुसार अंकिता भंडारी मामले में कथित ‘वीआईपी’ पहलू को लेकर प्रधानमंत्री की ओर से सार्वजनिक रूप से स्पष्ट घोषणा नहीं की गई।
गोदियाल ने प्रदेश की जनता से अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर यदि दीप जलाया जाए तो उसे केवल किसी व्यक्ति के जन्मदिन के उत्सव तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उत्तराखंड के महत्वपूर्ण मुद्दों को भी याद किया जाए। उन्होंने विशेष रूप से अंकिता भंडारी को याद करते हुए न्याय की प्रार्थना करने की बात कही।
‘जनता अपने विवेक से करे विचार’
कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने कहा कि लोकतंत्र में जनता अपने प्रतिनिधियों का चुनाव इसलिए करती है ताकि जनहित से जुड़े मामलों में कानून के अनुसार कार्रवाई हो और लोगों को न्याय मिल सके। उन्होंने सवाल उठाया कि किसी राजनीतिक नेता के प्रति दिखाई जाने वाली भक्ति और समर्थन से प्रदेश के वास्तविक मुद्दों का समाधान किस हद तक संभव है, इस पर जनता को स्वयं विचार करना चाहिए।
गोदियाल ने प्रधानमंत्री के उत्तराखंड दौरों का जिक्र करते हुए कहा कि राज्य में कई गंभीर विषय हैं, जिन पर राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर स्पष्टता की अपेक्षा की जाती है। उनके बयान का केंद्र अंकिता भंडारी प्रकरण और उससे जुड़े कथित ‘वीआईपी’ पहलू पर रहा।
हालांकि, इस मामले में यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के मुख्य आरोपियों के खिलाफ न्यायिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण घटनाक्रम हो चुके हैं। अगस्त 2026 में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने मामले के तीन दोषियों की जमानत याचिकाएं खारिज की थीं और वे उम्रकैद की सजा काट रहे हैं।
‘भाजपा नेताओं को बचाने’ के आरोप पर सियासत
गणेश गोदियाल ने अपने बयान में भाजपा पर आरोप लगाया कि पार्टी के प्रभावशाली नेताओं से जुड़े कथित पहलुओं पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने दावा किया कि सरकार को इस मामले में और स्पष्ट कदम उठाने चाहिए।
हालांकि, ऐसे राजनीतिक आरोपों को आरोप के रूप में ही देखा जाना चाहिए। अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े अलग-अलग पहलुओं पर जांच और न्यायिक कार्यवाही समय-समय पर सामने आती रही है। जनवरी 2026 में उत्तराखंड सरकार ने कथित ‘वीआईपी एंगल’ की जांच के लिए केंद्र से सीबीआई जांच की सिफारिश किए जाने की जानकारी भी सार्वजनिक हुई थी।
इसके अलावा, जून 2026 में अंकिता भंडारी प्रकरण से जुड़े कथित ऑडियो-वीडियो मामले में पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर की गिरफ्तारी की खबर भी सामने आई थी। इस मामले में अलग-अलग एफआईआर और न्यायिक कार्यवाही हुई है।
महेंद्र भट्ट के आह्वान पर भी निशाना
गणेश गोदियाल ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष महेंद्र भट्ट की ओर से प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप जलाने के आह्वान को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भाजपा द्वारा प्रधानमंत्री के जन्मदिन को इस तरह मनाने का फैसला प्रदेश के हित में कितना उपयोगी है, इस पर जनता को विचार करना चाहिए।
भाजपा की ओर से ‘आशीर्वाद का दीया’ अभियान को प्रधानमंत्री के प्रति शुभकामना और आशीर्वाद व्यक्त करने के कार्यक्रम के तौर पर प्रचारित किया गया है। भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन की अपील के अनुसार 17 सितंबर की शाम घरों में दीप जलाने का कार्यक्रम रखा गया है।
‘दीया जलाना है तो अंकिता को याद करें’
गोदियाल ने अपने बयान में कहा कि यदि लोग दीप जलाते हैं तो वे अंकिता भंडारी को भी याद करें और प्रार्थना करें कि इस मामले में न्याय की प्रक्रिया आगे बढ़े। उन्होंने प्रधानमंत्री से जुड़े राजनीतिक संदर्भ में यह भी अपील की कि राज्य सरकार को कथित ‘वीआईपी’ पहलू पर आगे कार्रवाई के लिए निर्देश दिए जाएं।
गोदियाल ने मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी को लेकर भी अपने बयान में मांग रखी कि कथित ‘वीआईपी’ के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज करने के संबंध में अगले 24 से 48 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाए।
उनके इस बयान के बाद प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर होने वाले कार्यक्रम को लेकर उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर अंकिता भंडारी प्रकरण चर्चा के केंद्र में आ गया है।
अंकिता प्रकरण पर लगातार उठते रहे हैं सवाल
अंकिता भंडारी हत्याकांड उत्तराखंड के सबसे चर्चित मामलों में रहा है। मामले में मुख्य आरोपियों को अदालत से सजा हो चुकी है, जबकि इससे जुड़े कुछ अन्य कथित पहलुओं और अलग-अलग मामलों को लेकर भी जांच एवं न्यायिक कार्यवाही समय-समय पर जारी रही है। जून 2026 में हाईकोर्ट ने अंकिता प्रकरण से जुड़े सोशल मीडिया ऑडियो-वीडियो मामले में चार एफआईआर में से दो को रद्द किया था, जबकि दो मामलों में जांच जारी रखने के निर्देश दिए थे।
ऐसे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर भाजपा के ‘आशीर्वाद का दीया’ कार्यक्रम और कांग्रेस के इस पर उठाए गए सवालों ने उत्तराखंड में राजनीतिक बहस को नया मुद्दा दे दिया है।
एक ओर भाजपा प्रधानमंत्री के जन्मदिन को ‘सेवा संकल्प अभियान’ के माध्यम से सेवा और सामाजिक गतिविधियों से जोड़ने की तैयारी कर रही है, वहीं कांग्रेस इस अवसर पर प्रदेश के लंबित और संवेदनशील मुद्दों को सामने रख रही है। भाजपा का राष्ट्रीय स्तर का अभियान 17 सितंबर से 17 अक्टूबर तक चलने की जानकारी दी गई है।
उत्तराखंड में अब यह मुद्दा राजनीतिक बयानबाजी से आगे किस रूप में सामने आता है, यह आने वाले दिनों में स्पष्ट होगा। फिलहाल प्रधानमंत्री के जन्मदिन पर दीप जलाने की भाजपा की अपील और गणेश गोदियाल की प्रतिक्रिया ने प्रदेश की सियासत में ‘आशीर्वाद का दीया’ बनाम ‘अंकिता के लिए न्याय’ की बहस को चर्चा में ला दिया है।
