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The Hill India > Blog > उत्तर प्रदेश > मिट्टी की ‘सेहत’ सुधारने को यूपी सरकार का मास्टरप्लान: ढैंचा और लोबिया से लहलहाएंगे खेत, बीजों पर मिलेगी 50% सब्सिडी
उत्तर प्रदेशफीचर्ड

मिट्टी की ‘सेहत’ सुधारने को यूपी सरकार का मास्टरप्लान: ढैंचा और लोबिया से लहलहाएंगे खेत, बीजों पर मिलेगी 50% सब्सिडी

The Hill India News
Last updated: April 20, 2026 3:04 am
The Hill India News
Published: April 20, 2026
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लखनऊ: उत्तर प्रदेश की कृषि अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और ‘धरती मां’ की घटती उर्वरता को पुनर्जीवित करने के लिए योगी सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के कृषि निदेशक डॉ. पंकज त्रिपाठी ने राज्य के करोड़ों किसानों से मिट्टी की सेहत में सुधार के लिए पारंपरिक ‘हरी खाद’ (Green Manure) को अपनाने की भावुक अपील की है। डॉ. त्रिपाठी ने चेताया है कि यदि मिट्टी में जीवांश कार्बन की मात्रा को तुरंत नहीं सुधारा गया, तो आने वाले समय में फसल उत्पादन पर इसका गंभीर संकट खड़ा हो सकता है।

Contents
खतरे की घंटी: यूपी की मिट्टी में मात्र 0.2% बचा जीवांश कार्बनयूरिया-डीएपी के बोझ से केंचुओं का पलायनहरी खाद: क्या है प्रक्रिया और कौन सी फसलें हैं कारगर?अप्रैल-मई का समय है सबसे उपयुक्तबीजों पर 50% की भारी सब्सिडी: ऐसे उठाएं लाभलागत घटेगी, मुनाफा बढ़ेगा

खतरे की घंटी: यूपी की मिट्टी में मात्र 0.2% बचा जीवांश कार्बन

कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में उत्तर प्रदेश की मिट्टी में जीवांश कार्बन (Organic Carbon) की मात्रा खतरनाक स्तर तक गिरकर मात्र 0.2 से 0.3 प्रतिशत रह गई है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, एक स्वस्थ और उपजाऊ मिट्टी के लिए यह स्तर 0.8 से 1 प्रतिशत के बीच होना अनिवार्य है।

डॉ. पंकज त्रिपाठी ने बताया कि रासायनिक खादों, विशेषकर यूरिया और डीएपी के असंतुलित उपयोग ने मिट्टी की संरचना को बिगाड़ दिया है। उन्होंने कहा, “जीवांश कार्बन मिट्टी की आत्मा है। इसकी कमी होने से न केवल उत्पादन घटता है, बल्कि किसानों को उस कमी को पूरा करने के लिए और अधिक महंगे रासायनिक उर्वरक डालने पड़ते हैं, जिससे खेती की लागत लगातार बढ़ रही है।“

यूरिया-डीएपी के बोझ से केंचुओं का पलायन

रिपोर्ट के मुताबिक, गर्मी के मौसम में खेतों को खाली छोड़ना और लगातार रसायनों का छिड़काव करना मिट्टी के लिए फायदेमंद केंचुओं और सूक्ष्म जीवों (Micro-organisms) के लिए काल साबित हो रहा है। ये सूक्ष्म जीव मिट्टी को भुरभुरा और हवादार बनाने का काम करते हैं। डॉ. त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि हरी खाद मिट्टी को फिर से जीवित करने का सबसे सस्ता और प्रभावी वैज्ञानिक तरीका है।

हरी खाद: क्या है प्रक्रिया और कौन सी फसलें हैं कारगर?

डॉ. त्रिपाठी ने सुझाव दिया है कि किसान अपने खेतों में ढैंचा, सनई, लोबिया, ग्वार और मक्का जैसी फसलें उगाएं।

  • प्रक्रिया: इन फसलों को बोने के बाद जब ये 30 से 40 दिन की हो जाएं और इनमें फूल आने की अवस्था हो, तब इन्हें खेत में ही हल या हैरो से पलटकर मिट्टी में मिला देना चाहिए।

  • लाभ: मिट्टी में दबने के बाद ये फसलें तेजी से सड़ती हैं और ‘ह्यूमस’ का निर्माण करती हैं। इसे ही हरी खाद कहा जाता है। यह मिट्टी में नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश जैसे पोषक तत्वों को प्राकृतिक रूप से पुनर्स्थापित करती है।

अप्रैल-मई का समय है सबसे उपयुक्त

कृषि निदेशक के अनुसार, अप्रैल और मई की भीषण गर्मी का समय हरी खाद के लिए वरदान साबित हो सकता है। आमतौर पर रबी की फसल कटने के बाद किसान खेतों को खाली छोड़ देते हैं। डॉ. त्रिपाठी ने अपील की है कि इस खाली समय में हरी खाद की फसल बोने से तेज धूप के कारण जमीन खराब होने (Soil Erosion) का खतरा कम होता है और अगली फसल (सावन/खरीफ) के लिए खेत को भरपूर पोषण मिल जाता है।

बीजों पर 50% की भारी सब्सिडी: ऐसे उठाएं लाभ

उत्तर प्रदेश सरकार किसानों को हरी खाद के प्रति प्रोत्साहित करने के लिए ‘सब्सिडी’ का सहारा ले रही है। कृषि विभाग जल्द ही ढैंचा और अन्य मिश्रित हरी खाद के बीजों पर 50 प्रतिशत की सब्सिडी उपलब्ध कराएगा।

कैसे करें आवेदन? इच्छुक किसान उत्तर प्रदेश कृषि विभाग के आधिकारिक पोर्टल पर जाकर अपना पंजीकरण करा सकते हैं। पंजीकरण के बाद किसान अपने नजदीकी राजकीय कृषि बीज भंडार से रियायती दरों पर बीज प्राप्त कर सकेंगे। सरकार का लक्ष्य है कि प्रदेश के हर जिले में अधिक से अधिक रकबे को हरी खाद के अंतर्गत लाया जाए।

लागत घटेगी, मुनाफा बढ़ेगा

अंत में डॉ. त्रिपाठी ने जोर देकर कहा कि साल में कम से कम एक बार हरी खाद का उपयोग करने से रासायनिक उर्वरकों पर होने वाला खर्च 25 से 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि दीर्घकालिक रूप से किसान की आय दोगुनी करने की दिशा में एक ठोस कदम है।

उत्तर प्रदेश में ‘हरी खाद‘ अभियान केवल एक सरकारी योजना नहीं, बल्कि एक कृषि क्रांति की शुरुआत है। यदि किसान वैज्ञानिक दृष्टिकोण अपनाते हुए मिट्टी की सेहत पर ध्यान दें, तो न केवल उनकी लागत घटेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए भी उपजाऊ जमीन सुरक्षित रह सकेगी।

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TAGGED:Dhaincha Seed Subsidy UPDr. Pankaj Tripathi Agriculture Director.Organic Farming Uttar PradeshUttar Pradesh Agriculture Department SchemeWhat is Organic Carbon
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