कर्णप्रयाग/देहरादून: उत्तराखंड के चमोली जिले के अंतर्गत आने वाले रणनीतिक और धार्मिक महत्व के केंद्र कर्णप्रयाग में स्थिति बेहद संवेदनशील लेकिन पूरी तरह नियंत्रण में है। 16 जून 2026 को स्थानीय दुकानदारों और हेमकुंड साहिब की यात्रा पर आए निहंग सिख श्रद्धालुओं के बीच भड़के अचानक विवाद ने अब प्रशासनिक और राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज कर दी है। कानून-व्यवस्था की स्थिति को भांपते हुए और विभिन्न संगठनों द्वारा ‘कर्णप्रयाग कूच’ के किए गए आह्वान को निष्प्रभावी करने के लिए चमोली जिला प्रशासन ने बड़ा कदम उठाया है। चमोली के जिला मजिस्ट्रेट के निर्देश पर पूरे कर्णप्रयाग क्षेत्र में भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 163 (पूर्ववर्ती IPC की धारा 144 का संशोधित रूप) लागू कर दी गई है। यह प्रतिबंधात्मक आदेश आगामी 27 जून 2026 तक प्रभावी रहेगा।
नगरासू गुरुद्वारे पर तनाव और सुरक्षा बलों का मोर्चा
घटनाक्रम की शुरुआत तब हुई जब नगरासू गुरुद्वारे के परिसर और उसकी छत पर कुछ पारंपरिक वेशभूषा से लैस निहंग सिख श्रद्धालुओं को शस्त्रों का प्रदर्शन करते देखा गया। स्थानीय निवासियों और व्यापारियों का आरोप है कि अचानक गुरुद्वारे में निहंगों की संख्या में अप्रत्याशित बढ़ोतरी हुई, जिससे स्थानीय स्तर पर भय और असमंजस का माहौल बन गया। देखते ही देखते इस मामले ने तूल पकड़ लिया और स्थानीय व्यापारियों व यात्रियों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई।
जैसे ही इस संवेदनशील घटना की भनक प्रशासन को लगी, उत्तराखंड पुलिस और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) की संयुक्त टुकड़ियों ने बिना वक्त गंवाए मोर्चा संभाल लिया। ग्राउंड जीरो पर पहुंचे सुरक्षा बलों ने बेहद सूझबूझ और संयम का परिचय देते हुए छत पर मौजूद निहंग श्रद्धालुओं से सीधा संवाद स्थापित किया। सुरक्षा एजेंसियों के वरिष्ठ अधिकारियों ने उन्हें कानून-व्यवस्था के महत्व को समझाया, जिसके बाद वे शांतिपूर्वक नीचे उतरने को तैयार हुए। एहतियात के तौर पर पूरे गुरुद्वारा परिसर और उसके आसपास के संवेदनशील व्यावसायिक इलाकों में भारी पुलिस बल और सशस्त्र जवानों को तैनात कर दिया गया है।
प्रत्यक्षदर्शियों के दावे और प्रशासनिक छानबीन
स्थानीय प्रत्यक्षदर्शियों और व्यापार मंडल के सदस्यों के अनुसार, विवाद के दौरान माहौल काफी तनावपूर्ण हो गया था। गुरुद्वारे के भीतर एक श्रद्धालु को कथित रूप से बंधक बनाए जाने के भी आरोप लगे हैं, हालांकि वहां तैनात सेवादार को छोड़ दिया गया। इस कर्णप्रयाग निहंग विवाद के बाद से ही स्थानीय बाजारों में सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं, जिसके कारण व्यापारिक संगठनों ने प्रशासन से कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि वे स्थिति पर चौबीसों घंटे पैनी नजर रख रहे हैं। चमोली के पुलिस अधीक्षक (SP) और उपजिलाधिकारी (SDM) लगातार क्षेत्र में फ्लैग मार्च कर रहे हैं और स्थानीय संभ्रांत नागरिकों व दोनों पक्षों के प्रतिनिधियों के साथ शांति बैठकें आयोजित कर रहे हैं। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि वर्तमान में स्थिति पूरी तरह काबू में है और किसी भी तरह की शारीरिक हिंसा या जनहानि की कोई रिपोर्ट नहीं है।
उत्तराखंड सरकार का रुख: ‘यह धार्मिक नहीं, आपसी मतभेद का मामला’
इस संवेदनशील मुद्दे पर राजधानी देहरादून में राज्य सरकार ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। उत्तराखंड के गृह सचिव (Home Secretary) शैलेश बगौली ने इस पूरे घटनाक्रम पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:
“शुरुआती जांच और खुफिया रिपोर्टों से यह साफ पता चलता है कि यह घटना किसी भी प्रकार के धार्मिक मुद्दे से प्रेरित नहीं है। बल्कि यह दो पक्षों के बीच अचानक उपजे तात्कालिक भावनात्मक रिएक्शन्स (Emotional Reactions) और व्यक्तिगत मतभेदों के कारण पैदा हुआ एक स्थानीय विवाद है। उत्तराखंड देवभूमि है, जहां सभी धर्मों, संप्रदायों और आस्थाओं का बराबर सम्मान किया जाता है। हमारी सांस्कृतिक विरासत हमेशा से आपसी मेलजोल, शांति, सद्भाव और आपसी सम्मान पर टिकी रही है। राज्य सरकार इस सांप्रदायिक सौहार्द के ताने-बाने को किसी भी कीमत पर बिखरने नहीं देगी।”
गृह सचिव ने आगे बताया कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए सरकार ने अत्यंत पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाया है। गढ़वाल क्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक (IG) को निर्देश दिए गए हैं कि वे इस पूरे मामले की निष्पक्ष, तथ्य-आधारित और गहराई से जांच करें। उन्होंने आश्वस्त किया कि पुलिस दोनों पक्षों की दलीलों और सबूतों को सुनेगी और कानून के मुताबिक कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। इसके अतिरिक्त, कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त महानिदेशक (ADG Law & Order) को भी घटना की एक विस्तृत ‘स्टेटस रिपोर्ट’ जल्द से जल्द शासन को सौंपने का जिम्मा दिया गया है।
अफवाहबाजों को सख्त चेतावनी: यात्रा को प्रभावित करने की अनुमति नहीं
वर्तमान में उत्तराखंड में प्रसिद्ध चारधाम यात्रा के साथ-साथ सिखों के पवित्र तीर्थ स्थल श्री हेमकुंड साहिब की यात्रा भी पूरे शबाब पर है। देश-विदेश से लाखों की संख्या में श्रद्धालु उत्तराखंड पहुंच रहे हैं। ऐसे में सरकार किसी भी तरह की ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
उत्तराखंड सरकार ने एक कड़ा परामर्श (Advisory) जारी करते हुए सोशल मीडिया और अन्य मंचों पर इस घटना को सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश करने वाले तत्वों को चेताया है। सरकार ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि हेमकुंड साहिब यात्रा के दौरान हुई इस छिटपुट घटना को किसी भी हालत में एक बड़े धार्मिक विवाद के तौर पर पेश न किया जाए। डिजिटल मीडिया और सोशल प्लेटफॉर्म्स पर भ्रामक खबरें या नफरत फैलाने वाले पोस्ट डालने वाले उपद्रवियों के खिलाफ आईटी एक्ट और भारतीय न्याय संहिता की सुसंगत धाराओं के तहत सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
शांति और सौहार्द की अपील
कर्णप्रयाग के इस बाजार में फिलहाल शांति व्यवस्था बहाल है, लेकिन धारा 163 लागू होने के कारण 5 या उससे अधिक लोगों के एक जगह एकत्र होने, बिना अनुमति के जुलूस निकालने या हथियार लेकर चलने पर पूरी तरह पाबंदी है। पुलिस प्रशासन ने स्थानीय निवासियों, व्यापारियों और तीर्थयात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी तरह की अफवाहों पर ध्यान न दें और क्षेत्र में शांति, संयम व आपसी भाईचारा बनाए रखने में पुलिस-प्रशासन का सहयोग करें।
विशेषज्ञों का मानना है कि चारधाम और हेमकुंड साहिब यात्रा के पीक सीजन में इस तरह के विवादों को हवा मिलना राज्य की पर्यटन आधारित आर्थिकी और छवि दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है। यही कारण है कि धामी सरकार और चमोली प्रशासन इस कर्णप्रयाग निहंग विवाद को शुरुआती स्तर पर ही पूरी तरह शांत करने के लिए चौतरफा सुरक्षात्मक और प्रशासनिक कदम उठा रहा है।
