आतंकी धमकियों के बाद प्रशासन का बड़ा एहतियाती कदम, 25 अगस्त तक ड्यूटी पर नहीं आने की सलाह; PM स्पेशल रोजगार पैकेज के कर्मचारियों को सुरक्षित स्थानों पर जाने को कहा गया
श्रीनगर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर की कश्मीर घाटी में हालिया आतंकी घटनाओं और कश्मीरी पंडित सरकारी कर्मचारियों को मिली कथित धमकियों के बाद सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ गई है। सरकार ने एहतियाती कदम उठाते हुए सैकड़ों कश्मीरी पंडित कर्मचारियों को 25 अगस्त तक प्रशासनिक अवकाश पर भेज दिया है। इन कर्मचारियों को फिलहाल ड्यूटी पर नहीं आने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है। पुलिस का कहना है कि सामने आई धमकियों की जांच की जा रही है और कर्मचारियों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं।
इस पूरे घटनाक्रम के साथ ही घाटी में चल रहे बड़े सुरक्षा अभियान ने भी सवाल खड़े किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, 22 जुलाई से शुरू हुई कार्रवाई में 3,000 से अधिक संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। पुलिस इनमें से कई लोगों को ‘ओवर ग्राउंड वर्कर्स’ यानी ऐसे कथित मददगारों के रूप में देख रही है, जो आतंकियों को पर्दे के पीछे से सहायता पहुंचा सकते हैं। हालांकि, हिरासत में लिए गए हर व्यक्ति को आतंकी गतिविधियों में शामिल मानना उचित नहीं है और जांच के बाद ही किसी व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट होगी।
धमकी भरी चिट्ठी के बाद बढ़ा डर
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच ताजा डर की सबसे बड़ी वजह एक कथित धमकी भरी चिट्ठी बताई जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस पत्र में कुछ कर्मचारियों के नाम और संपर्क संबंधी जानकारी होने की बात सामने आई। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गईं और जिन कर्मचारियों के नाम कथित तौर पर सूची में थे, उन्हें सुरक्षित तरीके से जम्मू भेजे जाने की जानकारी सामने आई है।
प्रधानमंत्री के विशेष रोजगार पैकेज के तहत घाटी में काम कर रहे कर्मचारियों को भी सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी गई है। कई कर्मचारी पहले ही जम्मू पहुंच चुके हैं, जबकि घाटी में मौजूद कर्मचारियों को भी फिलहाल सावधानी बरतने के लिए कहा गया है।
एक कश्मीरी पंडित कर्मचारी के मुताबिक, पुलिस की ओर से कर्मचारियों को फिलहाल कार्यालय नहीं जाने की सलाह दी गई है। घाटी में रह रहे कर्मचारियों से भी अनावश्यक रूप से घर से बाहर नहीं निकलने को कहा गया है।
एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने इसे एहतियाती कदम बताते हुए कहा है कि धमकियों की जांच की जा रही है और सभी संबंधित लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक उपाय किए जा रहे हैं।
क्या है प्रधानमंत्री का स्पेशल रोजगार पैकेज?
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की मौजूदा स्थिति को समझने के लिए प्रधानमंत्री के स्पेशल रोजगार पैकेज की पृष्ठभूमि को समझना भी जरूरी है।
2010 में शुरू किए गए इस विशेष रोजगार पैकेज के तहत करीब 6,000 कश्मीरी पंडितों को सरकारी नौकरियां दी गई थीं। इसका उद्देश्य 1990 के दशक में अलगाववादी हिंसा के कारण घाटी से विस्थापित हुए कश्मीरी पंडित परिवारों की वापसी और पुनर्वास में मदद करना था।
इन कर्मचारियों की घाटी में नियुक्ति को केवल रोजगार से नहीं, बल्कि विस्थापित परिवारों की वापसी और पुनर्वास की व्यापक प्रक्रिया से भी जोड़कर देखा गया। इसलिए जब भी घाटी में कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा को लेकर खतरा सामने आता है, तो यह मामला केवल सरकारी कर्मचारियों की सुरक्षा तक सीमित नहीं रहता, बल्कि पुनर्वास नीति और घाटी में अल्पसंख्यकों के भरोसे से भी जुड़ जाता है।
2022 में भी निशाने पर आए थे पंडित कर्मचारी
कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के सामने सुरक्षा का संकट नया नहीं है। 2022 में आतंकवादियों ने टारगेट किलिंग के जरिए इन कर्मचारियों को निशाना बनाया था। उस दौरान पांच कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की मौत हुई थी।
इन घटनाओं के बाद प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज के तहत काम कर रहे कर्मचारियों में भारी असुरक्षा की भावना पैदा हुई थी। बड़ी संख्या में कर्मचारियों ने जम्मू में ट्रांसफर और पोस्टिंग की मांग को लेकर करीब सात महीने तक विरोध प्रदर्शन किया था।
कर्मचारियों की मांग थी कि उन्हें घाटी से निकालकर जम्मू में तैनात किया जाए, ताकि उनकी जान को खतरा कम हो सके। हालांकि, सरकार ने उस समय सभी कर्मचारियों को जम्मू में पोस्ट करने की मांग स्वीकार नहीं की। इसके बजाय कुछ कर्मचारियों को श्रीनगर और घाटी के अन्य अपेक्षाकृत सुरक्षित प्रमुख कस्बों में स्थानांतरित किया गया था।
यही पुराना अनुभव अब ताजा धमकियों के बीच कर्मचारियों की चिंता को और बढ़ा रहा है।
22 जुलाई के हमले के बाद सुरक्षा अभियान तेज
मौजूदा घटनाक्रम की शुरुआत 22 जुलाई को अनंतनाग में हुई एक आतंकी घटना के बाद सुरक्षा अभियान तेज होने से भी जुड़ी है। इस हमले में एक पुलिसकर्मी की मौत हुई थी। इसके बाद सुरक्षा एजेंसियों ने घाटी के विभिन्न हिस्सों में संदिग्धों की पहचान और पूछताछ का अभियान शुरू किया।
कुछ ही समय बाद कुलगाम में प्रवासी मजदूरों को निशाना बनाए जाने की घटना ने सुरक्षा चिंताओं को और बढ़ा दिया। अधिकारियों को आशंका है कि आतंकी संगठन घाटी में अल्पसंख्यकों और बाहरी लोगों को निशाना बनाकर डर का माहौल पैदा करने की कोशिश कर सकते हैं।
इसी वजह से अल्पसंख्यक आबादी वाले क्षेत्रों और कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के रहने वाले इलाकों में सुरक्षा और गश्त बढ़ाई गई है।
3 हजार से ज्यादा संदिग्ध हिरासत में, OGW नेटवर्क पर फोकस
सुरक्षा अभियान का दूसरा बड़ा पहलू बड़ी संख्या में संदिग्धों की हिरासत है। अधिकारियों के मुताबिक, 22 जुलाई के बाद से 3,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। इससे पहले शुरुआती कार्रवाई के दौरान अलग-अलग रिपोर्टों में करीब 2,500 संदिग्धों को हिरासत में लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
पुलिस की कार्रवाई में कथित ओवर ग्राउंड वर्कर्स (OGWs) पर खास ध्यान है। ‘ओवर ग्राउंड वर्कर’ शब्द आम तौर पर उन कथित मददगारों के लिए इस्तेमाल किया जाता है, जिन पर आतंकियों को रसद, ठिकाना, सूचना या अन्य प्रकार की सहायता पहुंचाने का आरोप होता है।
हालांकि, यहां एक महत्वपूर्ण बात यह है कि हिरासत में लिए गए व्यक्ति के खिलाफ आरोप और उसकी वास्तविक भूमिका जांच के बाद ही स्पष्ट होती है। इसलिए किसी भी संदिग्ध को बिना न्यायिक प्रक्रिया के दोषी मानना उचित नहीं होगा।
आतंकी भर्ती कम होने के दावे के बीच बड़ा सवाल
घाटी में सुरक्षा एजेंसियां लगातार यह दावा करती रही हैं कि स्थानीय युवाओं की आतंकी संगठनों में नई भर्ती में भारी कमी आई है और स्थानीय भर्ती लगभग शून्य के करीब पहुंच गई है।
लेकिन दूसरी ओर, यदि बड़ी संख्या में लोगों को कथित OGW नेटवर्क से जुड़े होने के संदेह में हिरासत में लिया जा रहा है, तो यह सवाल भी उठता है कि आतंकी संगठनों को जमीन पर मिलने वाली मदद का नेटवर्क वास्तव में कितना सक्रिय है?
यही वजह है कि मौजूदा सुरक्षा अभियान को केवल गिरफ्तारियों की संख्या के नजरिए से नहीं, बल्कि आतंकियों को मिलने वाले कथित स्थानीय समर्थन, सूचना तंत्र और लॉजिस्टिक नेटवर्क को तोड़ने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।
अमरनाथ यात्रा भी समय से पहले रोकी गई
घाटी में सुरक्षा चिंताओं के बीच अमरनाथ यात्रा भी निर्धारित समय से पहले रोक दी गई। अधिकारियों के अनुसार, 9 अगस्त से यात्रा स्थगित करने के पीछे यात्रियों की संख्या में कमी, मौसम संबंधी चेतावनी और यात्रा मार्गों पर मरम्मत कार्य जैसे कारण बताए गए हैं।
हालांकि, घाटी में लगातार चल रहे सुरक्षा अभियानों और हालिया आतंकी घटनाओं के कारण जम्मू-कश्मीर में सुरक्षा को लेकर सतर्कता का स्तर ऊंचा बना हुआ है।
अब सबसे बड़ा सवाल- क्या कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की स्थायी सुरक्षा का समाधान निकलेगा?
ताजा घटनाक्रम ने एक बार फिर कश्मीरी पंडित कर्मचारियों की सुरक्षा और घाटी में उनके पुनर्वास के सवाल को केंद्र में ला दिया है। सरकार के सामने एक तरफ कर्मचारियों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित करने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ उन्हें घाटी में सुरक्षित वातावरण में काम करने का भरोसा दिलाना भी जरूरी है।
प्रशासन की ओर से 25 अगस्त तक कर्मचारियों को प्रशासनिक छुट्टी पर भेजना फिलहाल तत्काल सुरक्षा उपाय के तौर पर देखा जा रहा है। लेकिन आगे सबसे बड़ा सवाल यही होगा कि 25 अगस्त के बाद स्थिति कैसी रहती है और क्या कर्मचारियों को दोबारा घाटी में अपनी ड्यूटी पर लौटने के लिए पर्याप्त सुरक्षा मिल पाएगी।
फिलहाल सुरक्षा एजेंसियों की प्राथमिकता कथित धमकी की सच्चाई का पता लगाना, संभावित आतंकी नेटवर्क को तोड़ना और संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा मजबूत करना है। वहीं कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के लिए यह घटनाक्रम सिर्फ नौकरी का सवाल नहीं, बल्कि सुरक्षा, भरोसे और घाटी में सामान्य जीवन की वापसी से जुड़ा हुआ मुद्दा है।
ताजा घटनाक्रम यह दिखाता है कि घाटी में आतंकी हिंसा के खिलाफ सुरक्षा बलों की कार्रवाई जारी है, लेकिन अल्पसंख्यकों और विशेष रूप से कश्मीरी पंडित कर्मचारियों के बीच सुरक्षा का भरोसा कायम रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। आने वाले दिनों में जांच, सुरक्षा अभियान और धमकी की वास्तविकता सामने आने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि मौजूदा खतरा कितना गंभीर है और प्रशासन की अगली रणनीति क्या होगी।
